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पीएम मोदी की पहल से दुनिया में बजा भारतीय स्टार्टअप का डंका, देश में 70,809 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप

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बीते आठ साल की छोटी अवधि में देश की स्टार्टअप कहानी में इतने बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं कि इससे दुनिया हैरान है। कुछ साल पहले तक स्टार्टअप के मामले में भारत की दूर-दूर तक कोई गिनती तक नहीं की जाती थी, आज वह वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छोटी अवधि में ही भारत ने स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाकर एक लंबी छलांग लगाई है। आज देश में 70,809 स्टार्टअप हैं।

300 से 400 स्टार्टअप्स से 70 हजार से अधिक पहुंची संख्या

वर्ष 2014 में भारत में केवल 300 से 400 स्टार्टअप्स थे, वहीं आज उनकी संख्या 70 हजार से अधिक हो गई है। युवाओं के अपने कारोबार को लेकर बढ़ते रुझान और मोदी सरकार के द्वारा नए कारोबारियों को प्रोत्साहित करने की वजह से देश का स्टार्टअप इकॉसिस्टम मजबूत हुआ है। 31 मई 2022 तक के आंकड़े के अनुसार देश में 70,809 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। देश में 648 ऐसे जिले हैं जिसमें कम से कम एक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप है। देश में 47 प्रतिशत ऐसे मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं जिनमें कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। इन स्टार्टअप में 7,50,704 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

वर्ष 2015 से 2022 के बीच भारते स्टार्टअप की दुनिया ने लंबी छलांग लगाई है। इन सात वर्षों के दौरान निवेशकों की संख्या के लिहाज से इसमें नौ गुना वृद्धि दर्ज की गई है, स्टार्टअप में फंडिंग के लिहाज से इसमें सात गुना वृद्धि और इनक्यूबेटर की संख्या के हिसाब से इसमें सात गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

‘जॉब सीकर’ की जगह ‘जॉब क्रिएटर’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जनवरी, 2016 में उद्यमिता को बढ़ावा देने, एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने तथा भारत को ‘जॉब सीकर’ की जगह पर ‘जॉब क्रिएटर’ वाला देश बनाने के उद्देश्य से ‘स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव’ शुरू किया। इसके लिए सरकार ने अनेक सुधार किए। इन सुधारों के बाद कारोबार के आकांक्षी युवाओं को हौसला मिला और उन्होंने भारत को स्टार्टअप हब में बदलते हुए दुनिया में देश को तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया। इससे पूर्व की प्रणाली जटिल और अव्यवस्थित थी, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमियों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए हतोत्साहित होना पड़ता था।

स्टार्टअप में राज्यों की फंडिंग बढ़ी

राज्यों के स्टार्टअप रैंकिंग 2021 के मुताबिक, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 2019 में जहां स्टार्टअप के 20 पोर्टल थे वहीं 2021 में यह बढ़कर 27 हो गई। इसी तरह राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से मिलने वाली फंडिंग के मामले में 2019 में जहां यह संख्या 130 थी वहीं 2021 में यह बढ़कर 571 हो गया।

 

स्टार्टअप के विकास के लिए सात क्षेत्रों में सुधार पर जोर

स्टार्टअप के क्षेत्र में विकास के लिए सात क्षेत्रों में सुधार पर जोर दिया गया गया है। संस्थागत समर्थन, नवाचार एवं एंटरप्रेन्योरशिप का समर्थन, बाजार तक पहुंच, इनक्यूबेशन सपोर्ट, फंडिंग सपोर्ट, मेंटोरशिप सपोर्ट एवं क्षमता निर्माण।

राज्यों के स्टार्टअप रैंकिंग का मूल्यांकन सात क्षेत्रों में किए गए सुधार के आधार पर किया गया है। इन क्षेत्रों में संस्थागत समर्थन, नवाचार को बढ़ावा देना, बाजार तक पहुंच मुहैया कराना और पूंजी उपलब्ध कराने जैसे 26 कार्य बिंदु शामिल हैं।

शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य

शीर्ष प्रदर्शन वाले राज्य : केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर
नेतृत्वकर्ता राज्य : उत्तर प्रदेश, पंजाब व उत्तराखंड के अलावा तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार आइलैंड, अरुणाचल प्रदेश एवं गोवा
आकांक्षी नेतृत्वकर्ता: छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़, पुडुचेरीऔर नगालैंड
उभरते स्टार्टअप परिवेश वाले राज्य : आंध्र प्रदेश, बिहार, मिजोरम, लद्दाख

भारत में स्टार्टअप इंडिया स्कीम की शुरुआत

आज भारत विश्व में यूनिकॉर्न स्टार्टअप के मामले में तीसरे स्थान पर है। इसके पीछे कंपनी की मेहनत के साथ साथ मोदी सरकार से मिलने वाला समर्थन भी है। आज इस मुकाम तक पहुंचने और जल्द ही और आगे बढ़ने के उद्देश्य के साथ सरकार ने वर्ष 2016 में देशवासियों के लिए एक योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का नाम था स्टार्टअप इंडिया स्कीम (startup india scheme)। इस योजना के जरिये सरकार देश के नागरिकों को स्वरोजगार/ स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती रही है। इस स्कीम की शुरुआत इस उद्देश्य के साथ शुरू की गयी थी कि देश में युवाओं को रोजगार मिले और बेरोजगारी की समस्या खत्म हो सके। इसके साथ ही इन स्टार्टअप के जरिये न सिर्फ उद्योग जगत का विकास होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।

अगले दो वर्षों में भारत में होंगे 100 से अधिक यूनिकॉर्न

हुरुन इंडिया फ्यूचर यूनिकॉर्न इंडेक्स 2022 के अनुसार, अगले दो से चार वर्षों में भारत में 122 नए यूनिकॉर्न (स्टार्टअप का मूल्य 1 बिलियन से अधिक) होगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े यूनिकॉर्न हाउस में भी एक ताकत के रूप में उभरा है। 2014 में देश में 400 के आसपास स्टार्टअप्स हुआ करते थे, लेकिन आज 8 वर्ष के छोटे से कालखंड में देश में 70,000 से अधिक रिकॉग्नाइज स्टार्टअप्स हैं। आज देश में जितनी प्रोएक्टिव स्टार्टअप नीति है, उतना ही परिश्रमी स्टार्टअप नेतृत्व भी है इसलिए देश में युवा नई ऊर्जा के साथ विकास को नई गति दे रहा है।

प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 के तीन महीनों में 14 नए यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप (1 अरब डॉलर से ज़्यादा के मूल्यांकन वाले) थे, जिससे भारतीय यूनिकॉर्न की कुल संख्या 84 हो गई है। मार्च लगातार तीसरी तिमाही रही जिसमें घरेलू स्टार्टअप ने ताजा फंडिंग में 10 बिलियन से ज़्यादा की कमाई की। मार्च 2022 को समाप्त तिमाही में, कुल 10.8 बिलियन डॉलर का फंड प्रवाह हुआ और 14 नए स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न बन गए। आज इसका श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को जाता है।

इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंकिंग

इनोवेशन को लेकर भारत में जो अभियान चल रहा है, उसका प्रभाव है कि ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भी भारत की रैंकिंग में बहुत सुधार आया है। वर्ष 2015 में इस रैंकिंग में भारत 81 नंबर पर रुका पड़ा था। अब इनोवेशन इंडेक्स में भारत 46 नंबर पर है, 50 से नीचे आया है। यानी भारत की रैंकिंग में 35 पायदान का सुधार हुआ है।

भारत की स्टार्टअप क्रांति बनेगी महत्वपूर्ण पहचान

भारत की यह स्टार्टअप क्रांति आजादी के अमृत काल की महत्वपूर्ण पहचान बनेगी। आज देश में प्रो-एक्टिव स्टार्टअप नीति एवं पर्याप्त स्टार्टअप नेतृत्व है। सबसे खास बात, देश की युवा शक्ति इसमें अहम भूमिका अदा कर रही है। पूरी दुनिया में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की प्रशंसा हो रही है। भारत में स्टार्टअप्स सामान्य भारतीय युवाओं के सपने पूरा करने के सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

लाखों युवाओं को रोजगार

आज देश के हर राज्य में 600 से अधिक जिलों में कम से कम एक स्टार्टअप है। आज करीब आधे स्टार्टअप्स टीयर-2 और टीयर-3 सिटीज में हैं। ये सामान्य, गरीब परिवारों के युवाओं के आइडिया को बिजनेस में बदल रहे हैं। इन स्टार्टअप्स में आज लाखों युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

बिहार से हुई थी स्टार्टअप की शुरुआत

बिहार देश का वो पहला राज्य बना था, जहां स्टार्टअप की सबसे पहले शुरुआत हुई थी। पीएम मोदी की राह पर चलते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने राज्य के लिए साल 2016 में ‘बिहार स्टार्ट अप पॉलिसी 2016’ लेकर आए। ‘बिहार स्टार्ट अप पॉलिसी 2016’ बिहार उद्यमी संघ के सहयोग से बनाई गई थी।

क्या होते हैं स्टार्टअप ?

स्टार्टअप एक ऐसी कंपनी होती है जिसने अभी कामकाज शुरू किया है। आप अकेले या कुछ लोगों के साथ मिलकर कंपनी की नींव रखते हैं, जिसे इनक्युबेशन कहते हैं। यहां पर लोग अपनी-अपनी कुशलता और विशेषज्ञता लेकर आते हैं। नए कारोबारी आइडिया पर मिलकर काम करते हैं। इस तरह की कंपनी के जरिए ग्राहकों को एक यूनिक प्रोडक्ट या सर्विस दी जाती है। स्टार्टअप सफल होने के बाद एक बड़ी कंपनी के तौर पर अपनी पहचान बना लेते हैं।

‘स्टार्टअप इंडिया’ भारत सरकार की एक प्रमुख पहल

स्टार्टअप इंडिया पहल की घोषणा 15 अगस्त, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस प्रमुख पहल का उद्देश्य देश में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण करना है जो सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगा। इसके अलावा, 16 जनवरी, 2016 को भारत के प्रधान मंत्री द्वारा स्टार्टअप इंडिया के लिए एक कार्य योजना का शुभारंभ किया गया था। भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया पहल के विजन को वास्तव में साकार करने की दिशा में तेजी से प्रयास किए हैं। स्टार्टअप इंडिया पहल के अंतर्गत पर्याप्त प्रगति की गई है, जिसने पूरे देश में उद्यमशीलता की भावना को जगाया है।

 

स्टार्टअप्स की सफलता का कारण

हमारे स्टार्टअप्स की सफलता का कारण देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण, शासकीय प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं लोगों के माइंडसेट में परिवर्तन कर नए इकोसिस्टम का निर्माण करना है। वहीं स्टार्टअप्स के लिए हैकथॉन मजबूत बुनियाद बना है। विद्यालय स्टार्टअप्स की नर्सरी के रूप में काम कर रहे हैं। यहां अटल टिंकरिंग लैब बनाए गए हैं। देश में 700 से अधिक इन्क्यूबेशन सेन्टर्स बनाए गए हैं। स्टार्टअप के इन्क्यूबेशन के साथ ही इनकी फंडिंग की व्यवस्था भी की जाती है।

 

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