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लोकार्पण के बाद काशी विश्वनाथ धाम बना शिव भक्तों के आकर्षण का केंद्र, सावन के शुरुआती 16 दिनों में ही रचा गया इतिहास,जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं का टूटा रिकॉर्ड

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शिव भक्तों के लिए सावन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि सावन के महीने में ही भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। यह महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। श्रद्धालु मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते हैं। इसलिए इस महीने में मंदिरों में शिव भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लेकिन इस सावन में बनारस का नव निर्मित काशी विश्वनाथ मंदिर शिव भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद पहले सावन में दर्शनार्थियों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 

शुरुआती 16 दिनों में 50 लाख श्रद्धालुओं ने किया दर्शन

दरअसल नव्य, भव्य और दिव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद देश-दुनिया से बड़ी संख्या में भक्त काशी पहुंच रहे हैं। आलम यह है कि सावन के शुरुआती 16 दिनों में ही काशी में आस्था की इस कतार ने अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम करते हुए इतिहास रच दिया है। इस बार सावन के शुरुआती 16 दिनों में ही 50 लाख से ज्यादा शिव भक्तों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन, जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया है।

प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख भक्त कर रहे दर्शन-पूजन

मंदिर प्रबंदन के मुताबिक 14 जुलाई से 31 जुलाई तक ही करीब 45 लाख भक्तों ने दर्शन कर लिए थे। सावन में प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख भक्त काशी विश्वनाथ पहुंचकर दर्शन पूजन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पहले सोमवार को जहां करीब साढ़े पांच लाख भक्तों ने दर्शन किया था तो वहीं सावन के दूसरे सोमवार को छह लाख के करीब भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। तीसरे सोमवार को रात नौ बजे तक 6.30 लाख से अधिक भक्त दर्शन के लिए काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे चुके थे। ऐसे में अगर तीन सोमवार का ही आंकड़ा जोड़ लें तो यह करीब 17 लाख से ज्यादा का है।

शिव भक्तों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों को लाभ

इस बार इतनी बड़ी संख्या में शिव भक्तों के आने की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। शुरुआती 16 दिनों के आधार पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सावन में श्रद्धालुओं का आंकड़ा लगभग 1 करोड़ के आसपास पहुचेगा। शिव भक्तों की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों को सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है। जिनका पिछले 2 सालों का घाटा लगभग पूरा हो गया है। बाजार पूरी तरह से गुलजार हैं, रेस्टोरेंट्स भी भरे हुए हैं और साड़ी के कारोबार को खासा लाभ मिल रहा है।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने भक्तों को किया आकर्षित

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने बाबा के भक्तों को आकर्षित किया है। इसलिए देश-विदेश से लोग बाबा का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। क्योंकि इसके निर्माण में प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी ली थी और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा था। इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी बात यह है कि मंदिर परिसर में भीड़ से मुक्ति और बाबा के सुगम दर्शन-पूजन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कॉरिडोर में चार विशालकाय दरवाजे लगाए गए हैं, जो कॉरिडोर में अंदर जाने या बाहर निकलने वाले रास्तों पर हैं। श्रद्धालु अब गंगा स्नान करने के बाद सीधे बाबा दरबार में मत्था टेकने आ रहे हैं।

विशेष सुविधाओं से बाबा का दर्शन हुआ आसान

बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा स्‍नान के बाद धाम के चौक तक पहुंचने के लिए 80 सीढ़‍ियां चढ़नी होती है। जो सीढ़‍ियां नहीं चढ़ सकते, उनके लिए एस्‍केलेटेर और लिफ्ट की व्‍यवस्‍था की गई है। गंगा घाट से मंदिर परिसर तक रैंप बनाए गए हैं। इससे बुजुर्ग और दिव्यांग भक्त आसानी से महादेव का आशीर्वाद ले रहे हैं और अभिषेक कर रहे हैं। काशी विश्‍वनाथ धाम का चौक मां गंगा की लहरों से 22 मीटर की ऊंचाई पर बना है।

कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए अनके व्यवस्थाएं

नवनिर्मित इस कॉरिडोर में श्रद्धालुओं के लिए अनके व्यवस्थाएं की गई हैं, जिनमें म्यूजियम, स्प्रिचुअल बुक सेंटर, आभासी म्यूजियम, गंगा व्यू गैलरी, धरोहर केंद्र, फूड कोर्ट, वैदिक केंद्र, सांस्कृतिक केंद्र, भोगशाला, ओडीओपी प्रोडॅक्ट शॉप और मुमुक्षु भवन के लिए सुरक्षा संबंधी इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम शामिल है।

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