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आईएमफ ने की कृषि कानूनों की तारीफ, कहा-किसानों का मुनाफा बढ़ेगा

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किसान आंदोलन के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने नए कृषि कानूनों की तारीफ की है। आईएमएफ ने कहा कि इससे किसानों का मुनाफा बढ़ेगा और ग्रामीण विकास के मदद मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि यह कृषि सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आईएमएफ के संचार निदेशक गेरी राइस ने कहा कि ‘हमारा मानना है कि भारत में कृषि सुधारों के लिए कृषि कानून एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कानून से किसानों को विक्रेताओं के साथ सीधे कंट्रेक्ट करने में और बिचौलियों की भूमिका को कम करके ज्यादा लाभ कमाने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण विकास को भी मदद मिलेगी।’

मोदी सरकार को मिला रहा किसानों का व्यापक समर्थन
नए कृषि कानून पर जारी किसान आंदोलन के बीच जहां 24 किसान संगठन इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं, वहीं इसके समर्थन में देशभर के 25 किसान संगठनों ने 28 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। इन 25 किसान संगठनों के किसानों ने कृषि मंत्री तोमर को अपना समर्थन पत्र सौंपा।

इससे पहले हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के कई किसान संगठनों ने कृषि कानून का समर्थन करते हुए कृषि मंत्री को सहमति पत्र सौंपा था और रद्द किए जाने पर दी प्रदर्शन की धमकी दी थी।

रद्द किए जाने पर दी प्रदर्शन की धमकी
14 दिसंबर को देशभर के करीब 10 किसान यूनियनों के नेताओं ने तीन नये कृषि कानूनों पर कृषि मंत्री तोमर को एक समर्थन पत्र सौंपा और उन्होंने सरकार से इन कानूनों को बरकरार रखने की मांग की।

अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के इन किसानों ने कृषि मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन पूरी तरह राजनीति से प्रभावित हैं।

किसान यूनियनों से बात करन के बाद नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि ऑल इंडिया किसान समन्वय समिति के किसान आए थे। उन्होंने हमारे कृषि कानून का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये बिल पूरी तरह से किसानों के हित में है और इन्हें किसी भी कीमत पर वापस नहीं लिया जाना चाहिए। 

देशभर से आये अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने आज कृषि भवन में मुलाकात कर नए कृषि कानूनों के समर्थन में…

Posted by Narendra Singh Tomar on Monday, December 14, 2020

सरकार के लिए राहत की बात है कि उत्तराखंड के किसानों के एक प्रतिनिधमंडल ने भी रविवार 13 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात कर नए कृषि कानूनों को अपना समर्थन दिया।

उत्तराखंड के किसानों का कहना है कि सितंबर में बने तीनों कानून कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड से आए किसान भाई मुझसे मिले और उन्होंने कृषि सुधार को समझा और अपनी राय दी। केंद्र सरकार की ओर से भी सभी किसान भाइयों का आभार व्यक्त करता हूं। किसानों के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। 

उत्तराखंड के किसान नेताओं ने कृषि मंत्री को बताया कि तीनों कानून सरकार ने किसानों के हित में बनाए हैं। सुधार भले हो सकते हैं, लेकिन कानून को वापस लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उत्तराखंड के किसानों ने सरकार से इस मामले पर दबाव में न आने की अपील की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विपक्षी दल आंदोलन की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। 


इससे पहले हरियाणा के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पद्मश्री से सम्मानित सोनीपत के प्रगतिशील किसान क्लब के अध्यक्ष कंवल सिंह चौहान की अगुवाई में कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात की और सितंबर में बने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन किया। कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात के बाद कंवल सिंह चौहान ने कहा कि विरोध कर रहे किसानों को गुमराह किया जा रहा है। किसान संगठनों ने कृषि मंत्री से कृषि कानून रद्द नहीं करने की मांग की। किसान संगठनों ने इस संबंध में कृषि मंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।

हरियाणा के किसानों ने कहा कि सरकार आंदोलनकारी किसानों की मांग के अनुसार कानून में सुधार करना चाहे तो उसका स्वागत है, लेकिन अगर कानून निरस्त किए गए तो वो इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले और भी कुछ किसान संगठन कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने कानून वापस न लेकर उनमें केवल संशोधन करने की हामी भरी है। 

आखिर क्या हैं नए कृषि कानून के प्रावधान
मोदी सरकार शुरुआत से ही गरीबों और किसानों के हितों के लिए समर्पित रही है। नए कृषि कानून से न सिर्फ खेती-बाड़ी का काम आसान होगा, किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी इसका लाभ होगा। यही वजह है कि नए कृषि कानून को कृषि सुधार की दिशा में मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है। आइए एक नजर डालते हैं नए कृषि कानून के प्रावधानों पर।

मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा कानून 

सरकार का पक्ष: इस कानून को सरकार ने कांट्रैक्ट फार्मिंग के मसले पर लागू किया है। इससे खेती का जोखिम कम होगा और किसानों की आय में सुधार होगा। समानता के आधार पर किसान प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम होगा। किसानों की आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट्स तक पहुंच सुनिश्चित होगी। मतलब यह है कि इसके तहत कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। जिसमें बड़ी-बड़ी कंपनियां किसी खास उत्पाद के लिए किसान से कांट्रैक्ट करेंगी। उसका दाम पहले से तय हो जाएगा। इससे अच्छा दाम न मिलने की समस्या खत्म हो जाएगी।

कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार-संवर्धन एवं सुविधा कानून 

सरकार का पक्ष:  इस कानून के लागू हो जाने से किसानों के लिए एक सुगम और मुक्त माहौल तैयार हो सकेगा, जिसमें उन्हें अपनी सुविधा के हिसाब से कृषि उत्पाद खरीदने और बेचने की आजादी होगी। ‘एक देश, एक कृषि मार्केट’ बनेगा। कोई अपनी उपज कहीं भी बेच सकेगा। किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे, जिससे बाजार की लागत कम होगी और उन्हें अपने उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी।

इस कानून से पैन कार्ड धारक कोई भी व्यक्ति, कंपनी, सुपर मार्केट किसी भी किसान का माल किसी भी जगह पर खरीद सकते हैं। कृषि माल की बिक्री कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में होने की शर्त हटा ली गई है। जो खरीद मंडी से बाहर होगी, उस पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं लगेगा।

आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020
इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर करने का प्रावधान है। ऐसा माना जा रहा है कि कानून के प्रावधानों से किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा क्योंकि बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी। 1955 के इस कानून में संशोधन किया गया है। 

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