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सोनिया-राहुल गांधी में दम है तो चापलूसी से हटकर राजस्थान में कार्रवाई करके दिखाएं, जाखड़ का तर्क- कांग्रेस हाईकमान स्पष्ट करे कि पायलट गलत हैं या गहलोत?

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राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस की आलाकमान ‘त्रिमूर्ति’ और टॉप लीडरशिप तीन दिन तक चिंतन-मंथन किया। इस नव संकल्प शिविर में पार्टी के लगातार खो रहे जनाधार और खिसकती जमीन को तलाशने के लिए कुछ उपाय मिले या नहीं, यह तो कांग्रेस के कर्णधार ही जाने, लेकिन इस मंथन से इस्तीफे का विष जरूर निकल आया। अब पार्टी में ऐसा कोई नीलकंठ तो है नहीं, जो विष को गटक ले, सो इसको फैलना था और फैल गया। पंजाब का यह विष-वमन आलाकमान के साथ राजस्थान पर असर कर रहा है। पंजाब के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने जायज सवाल किया है कि यदि सोनिया-राहुल गांधी में दम है तो राजस्थान में कार्रवाई करके दिखाएं। राजस्थान में भी तो सीएम-पायलट के बीच बगावती तेवर लगातार चल रहे हैं। लगातार ढील के पेंच लड़ाने के बजाए कांग्रेस हाईकमान को स्पष्ट करना चाहिए कि पायलट गलत हैं या गहलोत? और उसे जो भी गलत लगे, उस पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखानी चाहिए।

आलाकमान को सोनी-चौधरी जैसे चापलूस पसंद, असली पार्टी कार्यकर्ता हाशिए पर
उदयपुर में चल रहे चिंतन शिविर के दौरान ही पंजाब के तेजतर्रार कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ ने इस्तीफा देकर बड़ी हलचल मचा दी थी। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद सुनील जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में नेता चमचे और चापलूस ज्यादा है, जबकि पार्टी कार्यकर्ता हाशिए पर। जाखड़ कहते हैं पंजाब के नेताओं ने पंजाब में वो काम करना शुरू किया जो आतंकवाद के दौर में भी नहीं हो रहा था। वो कहते हैं कि मैंने तो कांग्रेस की आंखों में सुरमा लगाने का काम किया था, लेकिन सोनिया की करीबी अंबिका सोनी और राजस्थान के हरीश चौधरी जैसे नेताओं ने आलाकमान को मैसेज दिया कि हम तो कांग्रेस की आंखें फोड़ रहे हैं।

कांग्रेस में भेदभाव : पंजाब में एक्शन और राजस्थान में पायलट की बगावत के बाद भी चुप्पी
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस की गुड बुक में शुमार पंजाब के बड़े नेता सुनील जाखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर न सिर्फ सबको चौंका दिया बल्कि कांग्रेस पर तमाम तरह के आरोप भी लगाए। वह कहते हैं अगर कांग्रेस सच में दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहती है तो उसको राजस्थान में भी तय करना चाहिए कि सचिन पायलट विरोध करके गलत थे या मुख्यमंत्री के पद पर बैठे अशोक गहलोत। उन्होंने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए उदयपुर नव संकल्प शिविर से बेहतर मंच और कोई हो ही नहीं सकता था। राजस्थान में भी तो भयंकर विरोध हुआ था। सचिन पायलट ने किया था। सीएम अशोक गहलोत को कांग्रेस आलाकमान से भरे मंच पर पूछना चाहिए था कि अगर विरोध करने वाले सचिन पायलट गलत थे तो उनको पार्टी से बाहर किया जाए। और अगर ऐसा नहीं था तो खुद अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें।सोनिया मैडम के आंख-कान बने नेताओं ने पंजाब से कांग्रेस का सूपड़ासाफ किया
जाखड़ कहते हैं कि फर्क यहीं पर आपको दिखता है कि कैसे आलाकमान पंजाब और राजस्थान में भेदभाव करता है। पंजाब में ऐसा क्या था जो आलाकमान को नहीं पता था। क्या पंजाब की सियासत को लेकर सोनिया मैडम अनभिज्ञ थीं ? लेकिन उनकी आंख और कान पंजाब के दो ऐसे नेता थे, जिन्होंने न सिर्फ उनको भड़काया, बल्कि कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की जमीन भी तैयार की। बताइए…अंबिका सोनी ने तो हिंदू और सिख की राजनीति में पंजाब को बांटने की कोशिश की। अरे जब आतंकवाद के दौर में गरजने वाली बंदूकें भी पंजाब को हिंदू और सिख में नहीं बांट पाई तो यह कांग्रेस नेता क्या पंजाब को बांटने चले थे।

अभी तो गहलोत को पर पंद्रह दिन में बताना पड़ता है कि सीएम मैं ही हूं!
उदयपुर चिंतन शिविर से क्या कांग्रेस को फायदा होगा ? पूछे जाने पर जाखड़ तपाक से कहते हैं कि यह सब तो फॉर्मेलिटी है। इसके लिए कुछ भी किया जा सकता है। उदयपुर के चिंतन शिविर में आप बैठ कर के रूस और यूक्रेन युद्ध की चर्चा कर रहे हो। इससे पार्टी का भला होने वाला नहीं है। बेहतर है आप पार्टी में कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं बनाएं। चमचो और चापलूसों से कैसे छुटकारा मिले, उस पर योजनाएं बनाएं। तब जाकर कहीं चिंतन शिविर सफल होंगे। अभी तो हालात यह हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हर पंद्रह दिन बाद जनता में जाकर कहना पड़ रहा है कि अरे, अभी राजस्थान का मुख्यमंत्री मैं ही हूं !! सोनिया-राहुल की सरपस्ती में कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में अब सुनील जाखड़ भी शामिल हो गए हैं। इससे पहले कई बड़े और युवा नेता कांग्रेस से मुक्त हो चुके हैं।

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