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पहचान लीजिए, कौन-कौन अब भी श्रीराम मंदिर का अलग-अलग तरीके से कर रहे हैं विरोध

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अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण 5 अगस्त को शुरू होने वाला है। भव्य समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे। लेकिन करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भावनाओं से जुड़े इस मुद्दे को लेकर विपक्षियों ने राजनीति शुरू कर दी है। तमाम दलों के नेताओं ने दूसरे समुदायों के लोगों को खुश करने के लिए तरह-तरह के अड़ंगे लगाकर और बयान देकर राम मंदिर निर्माण का विरोध करना शुरू कर दिया है। डालते हैं ऐसे नेताओं पर एक नजर-

प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या दौरे पर ओवैसी ने जताया विरोध
लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रामलला मंदिर के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा का विरोध किया है। ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का रामलला मंदिर के लिए अयोध्या दौरे पर जाना प्रधानमंत्री के संवैधानिक शपथ का उल्लंघन होगा। देश के संविधान का अहम हिस्सा है धर्मनिरपेक्षता। इसके अलावा ओवैसी ने कहा कि हम इस बात को नहीं भूल सकते हैं कि बाबरी मस्जिद 400 सालों से अयोध्या में खड़ी थी लेकिन 1992 में इस मस्जिद को एक आपराधिक भीड़ ने ढहा दिया था।

उद्धव ठाकरे ने कहा राम मंदिर निर्माण का ‘ई-भूमि पूजन’ होना चाहिए
कभी हिंदुत्व और राम मंदिर आंदलोन की झंडाबरदार रही शिवसेना के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने 5 अगस्त को राम मंदिर का शिलान्यास वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए करने का सुझाव दिया है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित साक्षात्कार में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा राम मंदिर निर्माण के लिए ‘ई-भूमि पूजन’ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हो सकता है। उन्होंने कहा, ”यह खुशी का कार्यक्रम है और लाखों लोग इस समारोह में शामिल होना चाहते हैं। क्या हम कोरोना वायरस को फैलने की इजाजत दे सकते हैं? आज हम लोग कोविड-19 जैसी महामारी से लड़ रहे हैं। धार्मिक समागम प्रतिबंधित किए गए हैं। मैं समारोह के लिए अयोध्या जा सकता हूं ​लेकिन लाखों रामभक्तों का क्या? आप उन्हें कैसे रोकेंगे?” उद्धव ठाकरे के इस बयान को वीएचपी ने कड़ा विरोध किया है और इसे सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत बताया है।

शरद पवार ने मंदिर निर्माण के समय पर उठाया सवाल
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को अयोध्या में मंदिर निर्माण का सपना साकार होना रास नहीं आ रहा है। 19 जुलाई को शरद पवार ने राम मंदिर निर्माण के समय पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हमें ये फैसला करना होगा क्या ज्यादा जरूरी है। कोरोना को खत्म करने के लिए मोदी सरकार को काम करना चाहिए, यही उसकी प्राथमिकता में होना चाहिए। शरद पवार ने कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि राम मंदिर बनाने से कोरोना खत्म हो जाएगा। फिलहाल सरकार लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान पर ध्यान दे। अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ती जा रही है।

वामपंथी नेता डी राजा ने पीएम मोदी के अयोध्या जाने का किया विरोध
राम मंदिर निर्माण की तारीख तय होने के बाद से वामपंथियों को भी नींद नहीं आ रही है। सीपीआई नेता डी राजा ने प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या जाने का विरोध किया है। डी राजा का कहना है कि मंदिर के शिलान्यास समारोह में शिरकत करने का पीएम मोदी का फैसला बिलकुल गलत है। यह गलत संदेश देता है और सेक्युलरिज्म के खिलाफ है। इतना ही नहीं सीपीआई ने राम मंदिर के भूमि पूजन का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किए जाने का भी विरोध किया है और इसको लेकर केंद्र सरकार को चिट्ठी भी लिखी है।

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