Home विचार जम्मू-कश्मीर को आतंक से मुक्त कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी, जानिए कैसे?

जम्मू-कश्मीर को आतंक से मुक्त कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी, जानिए कैसे?

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“गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्त” -धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यहीं इसी जम्मू – कश्मीर में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य की फिजाओं में फैली आतंक की हवा के रुख को मोड़ने में लगे हैं। उन्होंने ऐसी रणनीति बनायी है, जिसने राज्य के अंदर के आतंकवादियों, पाकिस्तान से घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं पर एक साथ शिकंजा कस दिया है। इस रणनीति के साथ ही राज्य में विकास की धारा को भी तेज कर दिया गया है और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आतंकवाद की जड़- धारा 370 और 35(A) को शक्तिहीन करने की योजना को लागू किया जा रहा है।

धारा 370 और 35(A) की अस्थायी संवैधानिक स्थिति – संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ एक मत हैं कि संविधान में जम्मू-कश्मीर के साथ भारत का रिश्ता बनाने वाली धारा 370, संविधान के Part XXI (Temporary, Transitional and Special Provisions) में आता है। संविधान का यह अध्याय अस्थायी एवं बदलाव की परिस्थिति में State को विशेष शक्ति देता है। आजादी के समय जम्मू-कश्मीर जिस बदलाव की परिस्तिथि से गुजरा, तब के कालखंड के लिए  State ने धारा 370 की शक्ति का उपयोग किया और इसी धारा के तहत राष्ट्रपति ने 35(A)का संवैधानिक आदेश भी पारित किया। 35 (A) का आदेश जम्मू कश्मीर के नागरिकों के जमीन से जुड़े कुछ अधिकारों को सुरक्षित करता है। आज देश की स्थायी परिस्थिति में धारा 370 और संवैधानिक आदेश 35(A) का बने रहने देना देश के स्थायित्व के लिए खतरा है क्योंकि इस अस्थायी व्यवस्था को स्थायी व्यवस्था मान लेने का एक षणयंत्र चल रहा है जिसके कुचक्र से राज्य के लोगों में भारत से अलग रहने की भावना को अधिक बल दिया जाता है। सरकार ने लोकसभा में धारा 370 और 35 (A) पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए भी यही कहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की आतंक विरोधी नीति का परिणाम
वर्तमान लोकसभा सत्र में सरकार ने देश की जनता के सामने प्रधानमंत्री मोदी की आतंकविरोधी नीति के परिणाम को रखा। पिछले साल जुलाई तक और इस साल जुलाई तक के आंकड़ों को तुलना करने पर रणनीति की सफलता हमें दिखाई देती है।

  • पाकिस्तान से घुसपैठ में 43 प्रतिशत की कमी।
  • कश्मीर के युवाओं का आतंकवादी बनने में 40 प्रतिशत की कमी।
  • आतंकवादियों द्वारा की गई वारदातों में 28 प्रतिशत की कमी।
  • सुरक्षा बलों की कार्यवाई में 59 प्रतिशत की वृद्दि होने की वजह से आतंकवादियों को Neutralize करने में 22 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी।
  • इस साल जनवरी माह से 14 जुलाई तक 126 आतंकवादियों को मार गिराया गया।
  • इस साल अमरनाथ की यात्रा के दौरान मात्र दो छोटी आतंकी वारदातें हुई हैं जबकि 2018 में 100 और 2017 में 36 आतंकवादी घटनाऐं हुई थीं।
  • इस बार अमरनाथ यात्रा में अब तक रिकार्ड 7 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर के युवाओं को विकास की धारा से जोड़ने के लिए 80,068 करोड़ रुपये की योजना चला रहे है।
  • इसके तहत 63 परियोजनाऐं चल रही है जिनमें सड़क निर्माण, बिजली के उत्पादन और वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सुविधाऐं, 2 AIIMS का निर्माण, IIM और IIT के निर्माण का काम हो रहा है।
  • युवाओं को रोजगार के लिए योग्य बनाने के लिए HIMAYAT और PMKVY की योजनाऐं चल रही हैं।
  • 13 माह पहले 14 जून 2018 को 44 राष्ट्रीय राइफल के राइफल मैन औरंगजेब को पुलवामा से आतंकवादियों ने अपहरण कर हत्या कर दी थी, लेकिन जुलाई 2019 में औरंगजेब के दोनों भाई मोहम्मद तारीक और मोहम्मद शबीर ने 156 इंनफैन्टरी बटालियन के रोमियो फोर्स में शामिल हुए हैं और राजौरी जिले में आतंकवादियों से सीधा मुकाबला कर रहे हैं।

कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की कमर तोड़ दी
हाल ही में कश्मीर के दौरे पर गए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ना तो किसी राजनीतिक दल के नेता से मुलाकात की और ना ही किसी हुर्रियत नेता से बातचीत की। इससे इन दलों को समझ में आ गया है कि केन्द्र सरकार हुर्रियत और अलगावादियों के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है।

पिछली सरकारों के दौरान हुर्रियत के नेताओं के बड़े जलवे थे, जो भी केन्द्रीय मंत्री कश्मीर के दौरे पर जाता था वह इन नेताओं से मिलने जरूर जाता था, लेकिन इस बार अमित शाह ने इन नेताओं से बातचीत नहीं की। अमित शाह के दौरे के दौरान पहली बार ऐसा हुआ जब राज्य में अलगाववादियों ने घाटी बंद का ऐलान नहीं किया। जबकि पहले घाटी बंद कर दिया जाता था और लोग जगह-जगह केन्द्रीय मंत्री का विरोध प्रदर्शन करते थे।

दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने राज्य में आतंकियों का सफाया करने के लिए सुरक्षा बलों को खुली छूट दी है। जिसके कारण राज्य में हुर्रियत की जमीन खिसक रही है। यहां तक कि जम्मू कश्मीर राज्य की जनता भी समझ रही है कि हुर्रियत के नेता उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं। घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने में हुर्रियत के नेताओं की बड़ी भूमिका मानी जाती है।

अलगाववादी नेताओं के काले कारनामों को जनता के सामने लाना
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद के वर्तमान सत्र के दौरान राज्य सभा को बताया कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी घाटी में हंगामा करते हैं, जबकि उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं। एक आकंड़े के मुताबिक 112 अलगाववादियों के 220 बच्चे विदेश में या तो पढ़ाई कर रहे हैं या फिर वो वहां रह रहे हैं, जिसमें हुर्रियत के भी कई नेता शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार हर बड़े नेता के परिवार के सदस्य विदेश में रहते या पढ़ते हैं। ये अलगाववादी नेता स्कूली बच्चों को पत्थरबाजी के लिए उकसाते हैं और स्कूलों को जबरदस्ती बंद कराते हैं। इस लिस्ट को देखकर आप हैरान हो जाएंगे-

  • तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन अशरफ सेहराई के दोनों बेटे खालिद और आबिद अशरफ सऊदी अरब में काम करते हैं और वहीं बस गये हैं।
  • जमात-ए-इस्लामी के सदर गुलाम मुहम्मद बट का बेटा सऊदी अरब में डॉक्टर है।
  • दुख्तरान-ए-मिल्लत की आसिया अंद्राबी के दोनों बेटे विदेश में पढ़ते हैं। उनका बेटा मुहम्मद बिन कासिम मलेशिया और अहमद बिन कासिम ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करता है।
  • सैयद अली शाह गिलानी का बेटा नीलम गिलानी ने पाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की है।
  • हुर्रियत के नेता मीरवाइज उमर फारूक की बहन राबिया फारूक अमेरिका में डॉक्टर हैं और वो वहीं रहती हैं।
  • बिलाल लोन के बेटी-दामाद ब्रिटेन में रहते हैं हैं और उनकी छोटी बेटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही है।
  • अलगाववादी मोहम्मद शफी रेशी का बेटा अमेरिका से पीएचडी कर रहा है।
  • अशरफ लाया की बेटी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।
  • मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद युसूफ मीर और फारूक गपतुरी की बेटियां भी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं।
  • इसी तरह डेमोक्रैटिक मूवमेंट लीडर ख्वाजा फरदौस वानी की बेटी भी पाकिस्तान में मेडिकल कोर्स कर रही है।
  • वहीदत-ए-इस्लामी नेता निसार हुसैन राठेर की बेटी ईरान में काम करती है और अपने पति के साथ वही पर बस गये हैं।

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