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संकट में राजस्थान की गहलोत सरकार, मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने साथी विधायकों के साथ अलग रास्ता अपनाने की दी धमकी

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राजस्थान में दर्जी कन्हैया लाल हत्याकांड, अजमेर के चिश्ती दरगाह के खादिमों के जहरीले बोल और सांप्रदायिक दंगों ने माहौल को खराब कर दिया है। राज्य की अशोक गहलोत सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति ने हिन्दुओं में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। इसे देखकर कांग्रेस नेताओं और अशोक गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों को अपने भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायक और सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कांग्रेस से अलग होने की धमकी दी है।

राज्य में राजनीतिक हवा का बदलता रुख देखकर गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले विधायकों को वादे और सरकार का रवैया नजर आने लगा है। समर्थन देने वाले छह विधायक अब वादे पूरे नहीं करने और मंत्रियों का रवैया ठीक नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक बगावत का झंडा उठाने वाले सैनिक कल्याण राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा कि सभी लोग मुझसे आकर कहते हैं कि वादे पूरे नहीं किए गए। कई मंत्री काम नहीं करते हैं, जिसे लेकर भी हमारे साथियों में अविश्वास बढ़ रहा है।

नाराज विधायकों ने कहा कि हमसे कहा था कि दिल्ली में सोनिया गांधी, राहुल गांधी से बातचीत करवा देंगे, लेकिन अभी तक हमारी बात नहीं करवाई है। अगर हमसे किए वादे पूरे नहीं ​किए तो हमें सोचना पड़ेगा। गुढ़ा ने कहा ​कि अभी तो मुझे खुद को ही पता नहीं है कि मेरा कमिटमेंट क्या है? मुझे क्या फैसला लेना पड़ेगा। सा​थियों के साथ बैठेंगे, बात करेंगे। अभी चर्चा ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने की संभावना भी कम हो गई है।

गौरतलब है कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा बसपा के उन 6 बागी विधायकों में से एक हैं, जिन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर गहलोत सरकार को स्थिरता दी और इसके विधायकों की संख्या बढ़कर 106 हो गई। 2020 के राजनीतिक संकट के दौरान भी उन्होंने गहलोत सरकार का साथ दिया। हालांकि राजेंद्र गुढ़ा को जहां सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया है, वहीं लाखन मीणा, दीपचंद्र खैरिया और जोगिंदर अवाना को बोर्ड- निगमों में एडजस्ट किया गया। लेकिन संदीप यादव और वाजिब अली सरकार में भागीदारी नहीं मिलने से नाराज हैं।

 

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