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भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार की सख्ती का असर, नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर ब्रिटिश कोर्ट ने लगाई मुहर

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भ्रष्टाचार के प्रति मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति रही है। मोदी सरकार की इस सख्ती का असर भी देखाई दे रहा है। देश-विदेश में छिपे भ्रष्टाचारी और घोटालेबाजों की शामत आ गई है। मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन के जज ने भारत प्रत्यर्पण का आदेश दे दिया है। पंजाब नेशनल बैंक से करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी मामले में आरोपी नीरव मोदी इस समय लंदन की जेल में है। लंदन में वेस्टमिंस्टर कोर्ट के जज सैमुअल गूजी ने साफ कहा कि नीरव को दोषी ठहराने लायक जरूरी सबूत मौजूद हैं। कोर्ट ने ये भी माना कि नीरव मोदी ने सबूत मिटाने और गवाहों को धमकाने की साजिश रची। जज ने कहा कि नीरव मोदी को भारत भेजने पर आत्महत्या का कोई खतरा नहीं है क्योंकि उसके पास आर्थर रोड जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।

मोदी सरकार एक-एक भगोड़े अपराधी को भारत लाने में लगी है। डालते हैं एक नजर

केस दर्ज होने के 20 साल बाद सट्टेबाज संजीव चावला का प्रत्यर्पण
मोदी सरकार के प्रयासों का नतीजा है कि फरवरी 2020 में दिल्ली पुलिस भगोड़े सट्टेबाज संजीव चावला को ब्रिटेन से भारत लाने में कामयाब रही। वह 2000 के फिक्सिंग स्कैंडल में शामिल था। पिछले साल फरवरी, 2020 में मैच फिक्सिंग के आरोपी सट्टेबाज संजीव चावला को लंदन से प्रत्यर्पित कर लिया गया। वह 2000 के फिक्सिंग स्कैंडल में शामिल था। मामला दर्ज होने के 20 साल बाद उसे भारत लाया गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही थी। 

विजय माल्या पर कसा शिकंजा
मोदी सरकार के प्रयासों से ब्रिटेन की कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। जिसके खिलाफ माल्या ने अपील की थी। लंदन हाई कोर्ट ने माना है कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ बेईमानी के पुख्ता सुबूत हैं। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिसंबर 2018 में माल्या के भारत प्रत्यर्पण का आदेश दिया था। फरवरी 2019 में ब्रिटेन के तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद ने भी मंजूरी दी थी। माल्या ने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील के लिए हाईकोर्ट से मंजूरी मांगी थी। हाईकोर्ट ने जुलाई, 2019 में मंजूरी दी थी। मोदी सरकार ने विजय माल्या के खिलाफ लंदन की अदालत में लगातार केस लड़कर उसके प्रत्यर्पण की नौबत ला दी है। माल्या जल्द ही भारत में होगा। उसने विभिन्न बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये गबन किए हैं।

कसा शिकंजा तो रकम लौटाने को तैयार हुआ माल्या
माल्या ने पहले तो पूरी गारंटी दिए बिना बड़े कर्ज लिए और फिर उन्हें न लौटाने का मंसूबा बनाया। कर्ज न लौटाने को लेकर उसने तमाम बहाने बनाए, परंतु जब मोदी सरकार और बैंकों ने उस पर शिकंजा कसा तो वह रकम लौटाने के लिए तो तैयार हो गया, लेकिन मोदी सरकार अब माल्या को हर हाल में सलाखों के पीछे देखना चाहती है। 

मेहुल चोकसी को इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
अब सरकार एक और भगोड़े मेहुल चौकसी पर शख्त हो गई है। सीबीआई के अनुरोध पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ हजारों करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस किया है। चोकसी अभी एंटीगा में रह रहा है और उसने भारत न आने को लेकर बहाना बनाया था।

बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल यूएई से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया
इसके पहले इसी महीने अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की वजह से ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण पर राजी हुआ। जाहिर है कि 3700 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में मुख्य आरोपी है। अगस्ता वेस्टलैंड ने भारतीय वायु सेना के अधिकारियों और सोनिया गांधी समेत तत्कालीन यूपीए सरकार के लोगों को प्रभावित कर कंपनी की डील दिलाने में मदद के लिए मिशेल की नियुक्ति की थी। 

इंडोनेशिया से पकड़ा गया भगोड़ा कारोबारी विनय मित्तल
बैंकों का पैसा लूट कर विदेश भागने वालों को पकड़ने के लिए मोदी सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून बनाया था। इस कानून के बनने के बाद विदेशों में बैठे घोटालेबाजों की शामत आ गई है। सीबीआई ने इसकी कानून के तहत 7 बैंकों से 40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर फरार उद्योगपति विनय मित्तल को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। सीबीआई इस भगोड़े कारोबारी को इंडोनिशेया से प्रत्यर्पित कर भारत ले आई। 

मोदी सरकार की सख्ती का असर, बहरीन से पकड़ा गया भगोड़ा आर्थिक घोटालेबाज
सीबीआई ने 9 वर्ष पहले बैंकों को लाखों का चूना लगाने वाले एक आर्थिक घोटालेबाज को बहरीन में धर दबोचा है। सीबीआई ने मोहम्मद याहया नाम के इस शख्स के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून के तहत कार्रवाई की है। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने बैंकों का धन लूट कर विदेश भागने वाले कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई के लिए इसी वर्ष अगस्त में भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून बनाया है। इस कानून के तहत देश ही नहीं विदेश में भी ऐसा घोटालेबाजों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है।

मोदी सरकार के भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत सीबीआई को यह पहली कामयाबी थी। बता दें कि 47 वर्षीय मोहम्मद याहया 2003 में बैंगलुरू के कुछ बैंकों के साथ करीब 46 लाख रुपए का घोटाला करने बाद खाड़ी देश भाग गया था। याहया को बहरीन से पकड़ा गया। पिछले काफी समय से उस पर भारतीय एजेंसियों की नजर थी। बहरीन में उसकी गिरफ्तारी के बाद सभी आवश्यक कार्रवाई को पूरा कर भारत लाया गया। 

विदेश भागने की कोशिश में एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी
प्रधानमंत्री मोदी का साफ कहना है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट कर भागने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा। जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को 25 मई, 2019 को विदेश भागने से पहले मुंबई एयरपोर्ट पर हवाई जहाज से नीचे उतार लिया गया। फ्लैट बेचने के नाम पर आम लोगों से कोरोड़ों-अरबों रुपये ठगने वाले शराब और रियल एस्टेट कारोबारी मनप्रीत उर्फ मॉन्टी चड्डा को 12 जून, 2019 को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। बताया गया कि मॉन्टी चड्डा फुकेट भागने की फिराक में था, लेकिन दिल्ली पुलिस की इकॉनोमिक ऑफिस विंग ने मॉन्टी चड्डा को एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया।

 

कांग्रेस सरकारों की मेहरबानी से बच निकला क्वात्रोची
इसके विपरीत बोफोर्स सौदे में दलाली खाने वाले ओत्तावियो क्वात्रोची को कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक बचाया। अंत में ऐसी स्थिति बना दी जिससे वह साफ बच निकला। परिणामस्वरूप 1989 में हुए आम चुनाव और उसके बाद के चुनावों में कांग्रेस बहुमत के लिए तरस गई। बोफोर्स घोटाले ने मतदाताओं के मानस को इसलिए भी अधिक झकझोरा था, क्योंकि यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला था। बोफोर्स घोटाला 1987 में उजागर हुआ था। उसके बाद से ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार के बयान बदलते रहे।

कांग्रेस सरकारों ने बोफोर्स मामले को दबाने की कोशिश की
केंद्र में आईं कांग्रेसी या कांग्रेस समर्थित सरकारों ने इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की। नरसिंह राव सरकार के विदेश मंत्री माधव सिंह सोलंकी ने तो दावोस में स्विस विदेश मंत्री से यहां तक कह दिया था कि बोफोर्स केस राजनीति से प्रेरित है। इस पर देश में भारी हंगामा हुआ तो सोलंकी को इस्तीफा देना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि यदि राजीव गांधी ने बोफोर्स की दलाली के पैसे खुद नहीं लिए तब भी उनकी सरकार और अनुवर्ती कांग्रेसी सरकारों ने क्वात्रोची को बचाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर क्यों लगाया? पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने 2016 में क्यों कहा कि मैंने बोफोर्स की फाइल दबवा दी थी?

मनमोहन सरकार ने क्वात्रोची के फ्रीज खाते चालू कराए
वर्ष 2006 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने एक एएसजी बी दत्ता को लंदन भेजा था। उन्होंने लंदन के बैंक में क्वात्रोची के फ्रीज खाते चालू कराए जिसमें से उसने रकम निकाल भी ली थी। वैसे बोफोर्स दलाली मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में है। इसमें याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल की दलील है कि मामला तार्किक परिणति पर नहीं पहुंचा तो इसकी पुन: सुनवाई हो।

भ्रष्टाचार पर सख्ती के लिए बनाए गए कई कानून
मोदी सरकार ने हर बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के मामले में कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो बख्शा नहीं जाएगा। सरकार हर स्तर पर देश के आर्थिक अपराधियों को कानून के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए कई सख्त कानून भी बनाए हैं, आइये डालते हैं एक नजर-
*फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स ऑर्डिनेंस
*राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण को मंजूरी
*संपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा
*इंसोल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड
*अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट स्कीम पर रोक विधेयक
*पीएसबी पुनर्पूंजीकरण
*एफआरडीआई विधेयक
*बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम

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