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NewsClick पर छापेमारी से प्रवर्तन निदेशालय के हाथ लगे अहम सुराग !

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अनर्गल मोदी विरोध के लिए जाना जाने वाला न्यूज पोर्टल न्यूज क्लिक और उसके निदेशकों के आवासों पर गुरुवार तक लगातार तीसरे दिन भी छापेमारी जारी रही। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस छापेमारी को कुल 30.51 करोड़ के फॉरेन रिमिटैन्सेस से जोड़ कर देखा जा रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय से मिले सूत्रों से जो बात निकलकर सामने आई है, वह बहुत ही अचरज में डालने वाली है। दरअसल, ‘न्यूज क्लिक’ पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से 10 करोड़ रुपए मिले हैं। खास बात यह है कि न्यूज क्लिक के मालिक प्रबीर पुरकायस्थ को यह नहीं पता कि अमेरिका की कंपनी ने यह 10 करोड़ रुपया उन्हें क्यों दिया है।

वैसे यह मामला सिर्फ 10 करोड़ के विदेशी धन लेने तक ही सीमित नहीं है। इस बार एक दूसरी अमेरिकी कंपनी से 20 करोड़ मिले। सूत्रों ने बताया कि न्यूज क्लिक को अमेरिका की एक दूसरी कंपनी ने Export Remittance के रूप में 20 करोड़ रुपया दिया। वह भी सिर्फ इस काम के लिए कि न्यूज क्लिक ने People’s Dispatch नाम के एक पोर्टल पर कंटेंट को अपलोड किया।

फर्जीवाड़े की यह दास्तान यहीं खत्म नहीं होती। न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ ने 1.5 करोड़ रुपए मेंटेनेंस के नाम पर ले लिए, लेकिन पता चला है कि प्रवीर पुरकायस्थ के यहां मेंटेनेंस का काम एक नौवीं पास इटेक्ट्रीशियन करता है। मेंटेनेंस का काम भी बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन के किया गया, लिहाजा इसका कोई प्रूफ वे प्रवर्तन निदेशालय को नहीं दे पाए।

पत्रकारिता का यह मामला राजनीति से भी जुड़ा है। न्यूज क्लिक का रिश्ता सीपीआई से जुड़ा है। सूत्रों ने बताया, प्रवर्तन निदेशालय को जो जानकारी हाथ लगी है उसके मुताबिक, न्यूज क्लिक में काम करने वाले एक व्यक्ति को 52 लाख रुपए अमेरिकी कंपनी से मिले हैं और ये व्यक्ति सीपीआई के आईटी सेल का मेंबर भी है और सीपीआई के नेताओं का ट्विटर अकाउंट भी चलाता है।

प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि न्यूज क्लिक को अमेरिका में एक ही जगह रजिस्टर्ड अलग-अलग कंपनियों से बड़े पैमाने पर धन मिला है। इसी में एक डिफेंस सप्लायर (Defence Supplier) की कंपनी है। मिली जानकारी के मुताबिक, न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ को गौतम नौलखा के साथ मिलकर कंपनी खोलने के लिए 20 लाख रुपए दिए हैं। ये वही गौतम नौलखा है, जो भीमा कोरेगांव दंगों का मुख्य आरोपी है और जेल में बंद है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमेरिका डिफेंस सप्लायर कंपनी आखिर एक मीडिया संस्थान को पैसे क्यो दे रही है, वो भी उस शख्स को जो दंगों का आरोपी है और जेल में बंद है।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बीते मंगलवार को ‘न्यूज क्लिक’ के दिल्ली स्थित कार्यालय पर छापा मारे जाने की खबर सामने आई थी। जांच एजेंसी ने ‘न्यूज क्लिक’ के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर भी छापा मारा था।  ईडी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि इस पोर्टल को कुछ संदिग्ध विदेशी कंपनियों से फंडिंग की गई है, जिसकी जांच की जा रही है।

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