Home नरेंद्र मोदी विशेष आर्थिक सर्वे: पीएम मोदी की नीतियों से ग्लोबल झटकों के बावजूद हमारी...

आर्थिक सर्वे: पीएम मोदी की नीतियों से ग्लोबल झटकों के बावजूद हमारी इकोनॉमी तेज, जानिए ‘दस का दम’ से ऐसे आया आत्मविश्वास

SHARE

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में कई अहम फैक्टर्स हैं। पीएम मोदी के दूरदर्शी विजन के चलते यह भारत के विकास में योगदान देने वाले हैं। कम महंगाई और मजबूत ग्रोथ ने मॉनेटरी पॉलिसी को सपोर्टिव बनने का मौका दिया है। दिसंबर 2025 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पॉलिसी रेट घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया था और अर्थव्यवस्था को बेहतर दौर में बताया। एक बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए यह एक सकारात्मक स्थिति है। यह संकेत देता है कि पॉलिसी बनाने वालों को विश्वास है कि महंगाई को फिर से बढ़ाए बिना ग्रोथ जारी रह सकती है। इकोनॉमिक सर्वे ने 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 को संसद में पेश किया गया। यह भारतीय अर्थव्यवस्था पर सरकार का सबसे व्यापक रिपोर्ट कार्ड है और यह केंद्रीय बजट के लिए बौद्धिक ढांचा भी तैयार करता है। वित्त वर्ष 26 में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जिसमें ग्रॉस वैल्यू एडेड ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहेगी। सर्वे ने भारत की संभावित मध्यम अवधि की विकास दर को भी लगभग 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 7 प्रतिशत किया है। 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए चैप्टर में रणनीति को विस्तार
इस सर्वे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के लिए एक नया चैप्टर जोड़ा है, जो भारत के नजरिए और रणनीति को विस्तार से समझाता है। इस चैप्टर में यह बताया गया है कि एआई अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान में तेजी से फैलती हुई वास्तविकता बन गई है। मैकिंसे की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की 88 फीसदी कंपनियां अब किसी न किसी रूप में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। पहले यह केवल अमीर देशों में था, लेकिन अब मिडिल इनकम देशों में भी तेजी से फैल रहा है। एआई के एडवांस मॉडल बनाने का काम अब कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित है, क्योंकि इसके लिए भारी कैपिटल, कंप्यूटिंग पावर, विशेष हार्डवेयर और ऊर्जा की जरूरत होती है। सर्वे बताता है कि भारत को अपने आर्थिक हकीकत और जरूरतों के हिसाब से एआई की रणनीति अपनानी चाहिए। इसके लिए बॉटमअप अप्रोच सबसे सही तरीका है, जिसका मतलब है छोटे-छोटे सेक्टर-विशिष्ट मॉडल बनाना, जो कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, लोकल भाषा और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को हल कर सकें। ऐसे मॉडल कम कंप्यूटिंग पर काम कर सकते हैं, स्मार्टफोन या लोकल कंप्यूटर पर भी चल सकते हैं। इससे छोटे स्टार्टअप, यूनिवर्सिटी और स्थानीय कंपनियां भी इनोवेशन में भाग ले सकेंगी और तकनीक ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।

1. वैश्विक झटकों में भी भारत की स्थिर और तेज रफ्तार
इकोनॉमिक सर्वे का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ युद्ध, महंगाई, सप्लाई-चेन बाधाओं और ऊंची ब्याज दरों से जूझ रही हैं। तब भारत की अर्थव्यवस्था न केवल स्थिर है, बल्कि निरंतर गति भी पकड़ रही है। विकसित देशों में जहां ग्रोथ सुस्त पड़ रही है, वहीं भारत उच्च विकास दर बनाए हुए है। यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित नीतियों-राजकोषीय अनुशासन, मांग-आधारित वृद्धि और संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। भारत अब “फ्रैजाइल फाइव” नहीं, बल्कि “फर्स्ट मूवर एडवांटेज” वाली अर्थव्यवस्था बन चुका है।

2. मजबूत मैक्रो फाउंडेशन: महंगाई, घाटा और विदेशी मुद्रा भंडार
आर्थिक सर्वे बताता है कि भारत ने महंगाई को नियंत्रण में रखने, चालू खाते के घाटे को साधने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने में संतुलन साधा है। यही मजबूत मैक्रो फाउंडेशन निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है। जब वैश्विक पूंजी सुरक्षित ठिकाने तलाशती है, तब भारत का स्थिर नीति-परिवेश उसे आकर्षित करता है। इसका नतीजा है- एफडीआई, एफपीआई और घरेलू निवेश में निरंतरता।

3. सार्वजनिक पूंजीगत व्यय: हर सेक्टर में विकास का इंजन
मोदी सरकार ने पूंजीगत व्यय को विकास का इंजन बनाया है। सड़कें, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इन सब पर रिकॉर्ड निवेश हुआ है। आर्थिक सर्वे स्पष्ट करता है कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर प्रभाव निजी निवेश को भी खींचता है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च सिर्फ कंक्रीट नहीं, बल्कि रोजगार, उत्पादकता और भविष्य की प्रति-स्पर्धात्मकता है।

4. ‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’
पीएलआई योजनाओं ने विनिर्माण को नई जान दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो, सेमीकंडक्टर, सोलर और ग्रीन टेक जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक वैल्यू-चेन में ऊपर चढ़ रहा है। आर्थिक सर्वे बताता है कि निर्यात उन्मुख विनिर्माण से स्केल, स्किल और सस्टेनेबिलिटी तीनों को बल मिला है। भारत अब सिर्फ बाजार नहीं, उत्पादन केंद्र भी है।

5. इनोवेशन इकोसिस्टम: युवाओं की अर्थव्यवस्था
पीएम मोदी की नीतियों ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आर्थिक सर्वे का चमकता अध्याय बनाया है। छोटे शहरों तक फैला यह नवाचार-तंत्र रोजगार, उत्पादकता और समाधान-केंद्रित विकास दे रहा है। एआई, फिनटेक, हेल्थटेक, एग्रीटेक और क्लीन एनर्जी हर क्षेत्र में भारतीय युवा वैश्विक समस्याओं के भारतीय समाधान दे रहे हैं। यह “जॉब सीकर” से “जॉब क्रिएटर” की यात्रा है।6. कृषि में सुधार और ग्रामीण मांग की मजबूती
भारत गांवों में बसने वाला देश है और इस आर्थिक सर्वे की सबसे अहम बात है कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर संकेत करता है। फसल विविधीकरण, डिजिटल एग्री-मार्केट, इंफ्रास्ट्रक्चर, नेचुरल फार्मिंग और लक्षित सब्सिडी ने किसानों की आय और संभावनाएं दोनों ही बढ़ाई हैं। पीएम किसान सम्मान निधि सोने पर सुहागा बन रही है। ग्रामीण मांग के पुनरुत्थान से एफएमसीजी, ट्रैक्टर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हाउसिंग तक व्यापक असर दिखता है। यही देश के संतुलित विकास का संकेत है।

7. श्रम सुधार और उत्पादकता: दीर्घकालीन विकास की नींव
पीएम मोदी के नेतृत्व में लोगों और कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई श्रम सुधार किए गए हैं। श्रम संहिता, ई-श्रम, जीएसटी और डिजिटल भुगतान आदि सुधारों ने अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण तेज किया है। आर्थिक सर्वे बताता है कि औपचारिक रोजगार बढ़ने से उत्पादकता, सामाजिक सुरक्षा और कर-आधार, तीनों मजबूत होते हैं। यह दीर्घकालीन विकास की नींव है।

8. आम आदमी की बढ़ती कर देने की क्षमता से समृद्धि
यह आर्थिक सर्वे का महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक संकेतक है। कर-आधार का विस्तार केवल दरें बढ़ाने से नहीं, बल्कि आय बढ़ने और अनुपालन सरल होने से हुआ है। डिजिटल सिस्टम, फेसलेस टैक्सेशन और सरल रिटर्न ने आम नागरिक को कर-व्यवस्था से जोड़ा। इसका पता इससे भी चलते है कि इस वित्तीय वर्ष में कॉरपोरेट टैक्स की तुलना में व्यक्तिगत आयकर कहीं ज्यादा अदा किया गया है। आम आदमी की बढ़ती कर देने की क्षमता बताती है कि मध्यम वर्ग का आकार और आय दोनों बढ़ रहे हैं। यही सशक्त अर्थव्यवस्था का प्रमाण है।

 

9. हरित विकास और ऊर्जा सुरक्षा: भविष्य-तैयार भारत
ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, ई-मोबिलिटी और ऊर्जा दक्षता। इन क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वे स्पष्ट करता है कि हरित विकास और आर्थिक विकास विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटेगी, रोजगार बढ़ेंगे और कार्बन फुटप्रिंट कम होगा। यह “ग्रोथ विद ग्रीन” का भारतीय मॉडल है। पीएम मोदी की नीतियां मांग-आधारित विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित निवेश, नवाचार-प्रेरित रोजगार और समावेशी समृद्धि का संतुलन साधती हैं। यही कारण है कि भविष्य की रफ्तार सिर्फ तेज नहीं, टिकाऊ और भरोसेमंद दिखती है।

10. सुशासन, डिजिटल स्टेट और भरोसे की राजनीति
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आधार-जनधन-मोबाइल ट्रिनिटी, ई-गवर्नेंस और पारदर्शिता, इन सबने लीकेज घटाए और परिणाम बढ़ाए। आर्थिक सर्वे का निष्कर्ष है कि सुशासन विकास को गति देता है। यही भरोसे की राजनीति निवेशकों, उद्यमियों और नागरिकों—तीनों का विश्वास मजबूत करती है। इकोनॉमिक सर्वे का सार है जेट-स्पीड भारत, स्थिर हाथों में कमान का सुफल। भारत की अर्थव्यवस्था संयोग से नहीं, विजन, सुधार और अनुशासन से तेज दौड़ रही है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत का आत्मविश्वास इसलिए मजबूत है क्योंकि कमान स्थिर हाथों में है।

 

Leave a Reply