Home समाचार पंजाब कांग्रेस में संकट गहराया,अब हाईकमान और कैप्टन में सीधी जंग

पंजाब कांग्रेस में संकट गहराया,अब हाईकमान और कैप्टन में सीधी जंग

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पंजाब कांग्रेस में संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी हाईकमान के बीच अब सीधी जंग छिड़ गई है। हालांकि उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका को अनुभवहीन और नाकाबिल पहले ही बता दिया था लेकिन अब पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के बयान पर जवाबी हमला करते हुए सोनिया गांधी से ही सीधे सीधे पूछ लिया है कि, क्या कांग्रेस जैसी भव्य और पुरानी पार्टी में निरादर और अपमान झेलना ही बुजुर्ग और ईमानदार नेताओं के लिए शेष बचा है। दरअसल सुप्रिया ने मीडिय को दिए कैप्टन के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि राजनीति में गुस्से की जगह नहीं है। ईर्ष्या और बदले की भावना नहीं रखनी चाहिए। सुप्रिया के इस बयान से खफा कैप्टन ने ट्वीट किया, ‘हां, राजनीति में गुस्से की कोई जगह नहीं है लेकिन क्या कांग्रेस जैसी भव्य पार्टी में निरादर और अपमान की जगह है। अगर मेरे जैसे वरिष्ठ पार्टी नेता के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है तो मुझे आश्चर्य है कि कार्यकर्ताओं के साथ कैसा बर्ताव होता होगा। मालूम हो कि कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा था कि, बुजुर्गों को गुस्सा आता है और कई बार गुस्से और क्रोध में बहुत सारी बातें कह देते हैं। मुझे लगता है उनके गुस्से का, उनकी उम्र का, उनके तजुर्बे का सम्मान करना चाहिए। वो जरूर इस पर पुनर्विचार करेंगे। राजनीति में गुस्सा, ईर्ष्या-द्वेष, व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी और बदला लेने की भावना की जगह नहीं है।

आर-पार के मूड में अमरिंदर, सिद्धू को पटखनी देने में जुटे
कैप्टन के मूड से साफ है कि वे आर-पार के मूड में हैं और पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहेंगे। 2022 के चुनाव में सिद्धू को पटखनी देने में जुटे कैप्टन अब कुछ भी कर गुजरने के मूड में हैं। मालूम हो कि कैप्टन ने कड़े तेवर दिखाते हुए नवजोत सिद्धू को अगले चुनाव में मुख्यमंत्री नहीं बनने देने का एलान किया था। साथ ही उन्होंने राहुल और प्रियंका को अनुभवहीन बताते हुए सलाहकारों के कारण गलत फैसले लेने का आरोप लगाया था। इस तरह कैप्टन ने एक तरफ तो पंजाब कांग्रेस को और दूसरी तरफ गांधी परिवार पर निशाना साधकर हाईकमान को नाराज कर दिया।

कैप्टन का दिखा खौफ, करीबी अधिकारियों को हटाया
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद भी विरोधी नेताओं में उनका खौफ बरकार है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कैप्टन के करीबी कहे जाने वाले अधिकारियों को हटाकर दूसरे अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां दी हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हुस्न लाल को मुख्यमंत्री का प्रिंसिपल सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं आईएएस तेजवीर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। विशेष प्रधान सचिव के पद पर राहुल तिवारी की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी कहे जाने वाले गुरकीत कृपाल सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है। पंजाब में यह बड़ा फेरबदल माना जा रहा है। सचिवालय सूत्रों की मानें तो इसी सप्ताह और भी बड़े ओहदों पर बैठे अधिकारियों को इधर से उधर किया जा सकता है। अफरातफरी का आलम यह है कि शहर में जगह जगह लगे कैप्टन के फोटो और होर्डिंग्स हटाए जा रहे हैं। हालांकि इससे कैप्टन के समर्थकों में काफी आक्रोश है, लेकिन इसकी परवाह किए बिना सिद्धू और चन्नी अपने अभियान में जुटे हुए हैं। यही नहीं, प्रदेश की अर्थव्यवस्था की समीक्षा किए बिना चन्नी ने पदभार संभालने के बाद तुरंत किसानों के सभी बकाया बिल माफ करने का एलान कर दिया।

कांग्रेस में मचा घमासान, पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं
कैप्टन को हटाने के बाद भी पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भले ही पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की बात कहें, लेकिन एक धड़ा अभी असंतुष्ट है। ताजा विवाद चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बनने के बाद पार्टी प्रभारी हरीश रावत के बयान से उपजा है जिसमें उन्होंने कहा था कि 2022 के चुनाव में चेहरा नवजोत सिंह सिद्धू होंगे। पंजाब कांग्रेस प्रभारी के इस बयान के तुरंत बाद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने ट्वीट जड़ दिया कि रावत का यह बयान हैरान करने वाला है। उन्होंने पंजाब में अगला चुनाव नवजोत सिद्धू के नेतृत्व में लड़े जाने पर सवाल खड़े कर दिए। जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण के दिन ही रावत का यह बयान चौंकाने वाला है। यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने वाला बयान है। उनके चयन को नकारता है। इसी बीच सुनील जाखड़ के भतीजे अजयवीर जाखड़ ने पंजाब किसान आयोग के पद से इस्तीफा दे दिया है। उधर, जाखड़ के बयान पर कांग्रेस नेता हरमिंदर सिंह गिल ने कहा कि उन्होंने जो बयान दिया है उस पर सिर्फ वही टिप्पणी कर सकते हैं। चरणजीत चन्नी को सीएम बनाने का फैसला पार्टी आलाकमान का है न कि हरीश रावत का।

सिद्धू को साध कर चलेगी कांग्रेस, चुनाव में होंगे मुख्य चेहरा 

हालांकि इस पूरे प्रकरण पर मचे घमासान के बाद पार्टी आलाकमान ने सफाई दी कि मुख्यमंत्री चन्नी और प्रदेश प्रधान दोनों मिलकर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में चल रही सियासी उठापटक के बीच पार्टी नवजोत सिंह सिद्धू को पूरी तरह साध कर चलेगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद से हटाने से लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने तक सिद्धू की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसलिए 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू ही कांग्रेस का मुख्य चेहरा होंगे। मालूम हो कि इससे पहले पार्टी ने कहा था कि विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे।

भाजपा नेता ने बताया दलित समुदाय का अपमान
वहीं, भाजपा आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट किया कि केवल नवजोत सिद्धू को कुर्सी दिलाने के लिए यदि चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया है तो यह पूरे दलित समुदाय का बहुत बड़ा अपमान है। यह पूरी तरह से कांग्रेस द्वारा दलित सशक्तीकरण की बात को कमजोर करता है। शर्म की बात है। उधर, विवाद बढ़ता देख आलाकमान को इस जंग में कूदना पड़ा। जिसके बाद राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बायान जारी किया कि उन्होंने हरीश रावत से बात की है, रावत ने उन्हें बताया कि मीडिया उनके बयान को ठीक ढंग से नहीं समझ पाया। इसलिए मैं इस बात को दोहराता हूं कि हमारे सीएम चरणजीत सिंह चन्नी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू हैं। दोनों नेता सबके साथ मिलकर पंजाब का चुनाव लड़ेगे।

 

वेट एंड वाच की नीति अपना रहे विपक्षी दल, कैप्टन को अपने पाले में लाने की कवायद
विपक्षी दलों के नेता अभी वेट एंड वाच की नीति अपना रहे हैं। उनका मानना है जो हालात अभी बने हुए हैं उससे पंजाब कांग्रेस में अभी कुछ शांत होने वाला नहीं है। इधर, जिस तरीके से पार्टी आलाकमान ने कैप्टन को मजबूर कर इस्तीफा लिया है उससे एक बात तो तय हो गई है कि जल्द ही वह कोई बड़ा फैसला लेंगे। यदि वह कांग्रेस में ही रहकर अपने विरोधियों को परास्त करने का प्रयास करते हैं तो भी सियासती समीकरणों में बदलाव आएगा जिसका सीधा फायदा किसी न किसी विपक्षी दल को होगा। यही कारण है कि विपक्षी नेता भी कैप्टन पर हमलावर होने के बजाय सीधे-सीधे कांग्रेस पार्टी को घेरने का प्रयास कर रहे हैं।  शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की ओर से भी अभी तक ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई जिसमें उन्होंने कैप्टन को घेरा है। उन्होंने अपने बयानों में सिर्फ कांग्रेस पर ही सवाल खड़े किए हैं। इधर आम आदमी पार्टी की तरफ से भी सीधे कैप्टन पर सियासी हमला नहीं किया गया है। पार्टी के पंजाब सह प्रभारी राघव चड्ढा ने पंजाब कांग्रेस में हुए इस बदलाव पर कहा है कि कांग्रेस पार्टी अब डूबता जहाज है। भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा ने भी पूरे प्रकरण पर सिद्धू व कांग्रेस को ही निशाने पर लिया है। इन सबों के बीच कैप्टन को अपने पाले में लाने की कवायद में भी सभी दल जुट गए हैं। कुछ ने प्रत्यक्ष तो कुछ ने अप्रत्यक्ष रूप से कैप्टन को पार्टी में शामिल होने का निमंत्रण भी दे दिया है।

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