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भारत के विकास का न्यू इंजन बनेगा नॉर्थ ईस्ट:तेल गैस परियोजनाओं के लिए 1 लाख करोड़ मंजूर

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भारत की विकास गाथा में पीछे छूटे नॉर्थ ईस्ट में नई जान फूंकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तेजी से फैसले ले रही है। इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि न्यू इंडिया में नॉर्थ-ईस्ट, हिंदुस्तान के विकास का न्यू इंजन बन रहा है। मोदी सरकार ने उत्तर-पूर्व के विकास के लिए पांच मंत्र निर्धारित किए थे। हाइवे, रेलवे, वॉटर वे, एयरवे और आइवे’ के दम पर नॉर्थ-ईस्ट के विकास में जान फूंकने का प्लान तैयार किया गया है।

तेल और गैस क्षेत्र के विकास के लिए एक लाख करोड़

अब इसमें तेल और गैस क्षेत्र की भूमिका भी तेजी से बढ़ती जा रही है । तेल और गैस परियोजनाओं में बड़े पैमाने में निवेश से नॉर्थ-ईस्ट के विकास को धार मिल रही है। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपयों की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के वर्ष 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि इस क्षेत्र में अन्वेषण का रकबा 2025 तक मौजूदा 30,000 वर्ग किलोमीटर से दोगुना होकर 60,000 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा, जबकि पिछले तीन वर्ष में खुला क्षेत्र लाइसेंस नीति (ओएएलपी) के तहत लगभग 20,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पहले ही आवंटित किया जा चुका है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास की गति को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, ‘लुक ईस्ट’ नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में बदल दिया। नॉर्थ-ईस्ट में तेल और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में जो काम किए गए हैं उससे साफ है कि इस इलाके में तेल और प्राकृतिक गैस की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

पीएम मोदी की नॉर्थ-ईस्ट के विकास में नई जान फूंकने की कोशिश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। न्यू इकोनॉमी, न्यू एनर्जी एवं न्यू एम्पावरमेंट के मंत्र को लेकर नॉर्थ-ईस्ट में नई जान फूंकने की कोशिश हो रही है। नॉर्थ ईस्ट में पर्यटन का विकास भी इस इलाके की तस्वीर बदलने में बेहद मददगार हो सकता है। यहां टूरिज्म की जबरदस्त संभावना है, जिनमें ईको, विलेज, मेडिकल, स्पोर्ट्स, एडवेंचर, गोल्फ़, फ़िल्म, रिवर, बॉर्डर टूरिज्म पर काम किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत है।

फाइल फोटो

मोदी सरकार का नॉर्थ ईस्ट में पर्यटन के विकास पर जोर

मोदी सरकार का हमेशा से जोर नॉर्थ ईस्ट में पर्यटन के विकास पर रहा है।इसके लिए केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों से टास्क फ़ोर्स बनाने को कहा है ताकि टूरिज्म और संस्कृति के विकास के लिए तालमेल के साथ तेजी से आगे बढ़ा जा सके। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में विकास के कामों पर नजर रखने और परेशानियों को दूर करने के लिए, केंद्र सरकार के मंत्रियों के दौरे जारी है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत नॉर्थ ईस्ट के इलाक़े को 1300 करोड़ रुपए की लागत वाली सोलह योजनाओं को मंजूरी दीं है, जिसमें हेरिटेज, ईको सर्किट, आध्यात्मिक व धार्मिक और आदिवासियों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। जबकि प्रसाद योजना के तहत लगभग 200 करोड़ योजनाओं को हरी झंडी मिली है। इसमें 29.99 करोड़ रुपए की लागत वाले असम के गुवाहाटी स्थित विख्यात कामाख्या मंदिर परिसर का विकास कार्य भी शामिल है।

नॉर्थ ईस्ट को खेलों और फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी

पूर्वोत्तर क्षेत्र हमेशा से मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है, अब इस इलाके में लोगों की खेलों में दिलचस्पी और प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए बड़ा प्लान तैयार किया गया है। सरकार इस इलाके में सॉफ्ट स्किल के जरिए विकास की रफ्तार को और तेज करने की कोशिश में है। नॉर्थ ईस्ट में नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी है। ओलिंपिक खेलों में इस इलाके के खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है, मोदी सरकार की कोशिश है कि नॉर्थ ईस्ट में खेल प्रतिभाओं को और बढ़ावा मिले। इसी मिशन के तहत केंद्र सरकार मणिपुर में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाना चाहती है । केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति और पूर्वोत्तर मामलों के मंत्री जी किशन रेड्डी के मुताबिक मोदी सरकार 800 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की प्लानिंग कर रही है। इससे इस क्षेत्र में खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकेंगी।

दूसरी ओर मोदी सरकार पूरे इलाके को फिल्म और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के शूटिंग डेस्टिनेशन के तौर पर उभारने की भी कोशिश कर रही है। ताकि नॉर्थ ईस्ट की कुदरती खूबसूरती दुनिया के सामने आ सके। पर्यटन मंत्रालय फिल्ममेकर्स के साथ इसकी प्लानिंग करने में जुटा है।

नॉर्थ ईस्ट में विकास से पूर्वी एशिया से जुड़ेगा भारत

नॉर्थ ईस्ट एक तरफ से म्यांमार, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के साथ जुड़ा है तो दूसरी तरफ पूर्वी एशिया के देशों के साथ भारत के रिश्तों का गेटवे है। यही वजह है कि मोदी सरकार इस इलाके में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाने में जुटी है। नरेन्द्र मोदी की सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हज़ारों करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। नॉर्थ ईस्ट के हर राज्य की राजधानियों को बेहतरीन रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम तेज़ी से चल रहा है। आज नॉर्थ ईस्ट में छोटे-बड़े करीब 13 ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स हैं। इनके विस्तार के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। नॉर्थ ईस्ट के राज्यों की राजधानियों को 4 लेन, डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर्स को 2 लेन और गांवों को all weather road से जोड़ने का मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पीएम मोदी की कोशिशों से नॉर्थ ईस्ट की बदलेगी किस्मत

नॉर्थ ईस्ट में ऑर्गेनिक फार्मिंग के दम पर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मोदी सरकार का लक्ष्य देश में ‘एवरग्रीन रिवॉल्यूशन’ लाने का है, उत्तर-पूर्व के किसान भी इस मौके का फायदा उठा सकते हैं। संपदा (SAMPDA), यानि scheme for agro marine processing and development of agro processing cluster जैसी योजनाओं के दम पर किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। कृषि उत्पादों की processing पर जोर देकर किसानों को उनकी फसलों की अधिक कीमत मिल सकती है। PPP मॉडल और FDI के द्वारा भी मोदी सरकार किसानों की कमाई बढ़ाने में जुटी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्वोत्तर के विकास को लेकर बेहद गंभीर हैं। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने देश की सत्ता संभाली है, तभी से उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। देश की आजादी के बाद सभी प्रधानमंत्री जितनी बार पूर्वोत्तर के राज्यों के दौरे पर गए हैं, उससे अधिक बार पीएम मोदी वहां जा चुके हैं। यह नॉर्थ ईस्ट के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

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