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कांग्रेस में किचकिच : पंजाब के बाद राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी बदलाव के आसार, कैप्टन अमरिंदर को हटाने के बाद अब मुख्यमंत्री गहलोत और बघेल पर लटकी तलवार

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कांग्रेस पार्टी में कलह रुकने का नाम नहीं ले रही है। हालात यह है कि एक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद दूसरे प्रदेश में पार्टी के अंदर बगावत की आवाज बुलंद हो जाती है। अभी पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद से हटाए एक सप्ताह भी नहीं गुजरे कि अब राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्रियों को बदलने की अटकलें बढ़ गईं हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की मानें तो पंजाब के सीएम पद से कैप्टन के हटने के बाद बड़े बदलाव देखने की बारी राजस्थान और छत्तीसगढ़ की होगी। राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत से नाराज चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे के एक नेता का कहना है कि आलाकमान को लगता है, ये बदलाव न केवल 2023 में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए, बल्कि 2024 में लोकसभा चुनावों के लिए भी आवश्यक हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ राहुल गांधी की सूची में अगले स्थान पर है, जहां उन्हें पार्टी की समस्या का समाधान करना है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी. एस. सिंहदेव के सत्ता संघर्ष में फिलहाल तो शांति है, लेकिन इसे सियासी तूफान से पहले की शांति के रूप में देखा जा रहा है।

राजस्थान में गहलोत से नाराज पायलट पिछले साल ही फूंक चुके बगावत का बिगुल

दरअसल राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने पिछले साल मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ उनकी कार्यशैली के विरोध में बगावत कर दी थी, जिसके बाद पायलट को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था। उस समय पायलट का बीजेपी में जाना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि, आखिरी समय में राहुल गांधी और प्रियंका ने उन्हें मना लिया था। हालांकि, सचिन पायलट गुट से उस समय जो वादे किए गए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है। हालांकि अब सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व राजस्थान और छत्तीसगढ़ की समस्या का समाधान करना चाहता है।

दिल्ली दरबार में पायलट की लगातार हाजिरी से अटकलें तेज
सचिन पायलट ने हाल ही में दिल्ली में रेगिस्तानी राज्य में लंबित मुद्दों पर लंबी चर्चा की थी। दिल्ली दरबार में एक सप्ताह के भीतर पायलट की दो बार हाजिरी से उन अटकलों को बल मिला है, जिनमें कहा जा रहा है कि अब राजस्थान में भी नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। पायलट की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई मुलाकात में क्या चर्चा हुई इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बैठक में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में फेरबदल पर चर्चा की गई। पायलट लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि राजस्थान में मंत्रिमंडल का विस्तार और राज्य के बोर्ड व निगमों में शीघ्र नियुक्ति की जानी चाहिए। वह जोर दे रहे हैं कि जो कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उनके साथ काम कर रहे हैं, उन्हें उनका उचित हक पार्टी को देना चाहिए। दिसंबर 2018 में, कांग्रेस ने 200 में से 99 सीटें जीतीं और अशोक गहलोत को सीएम बनाया गया, भले ही वह चुनाव प्रचार के दौरान वे सीएम का चेहरा नहीं थे। इन चुनावों के पांच महीने बाद, लोकसभा चुनाव हुए, जहां कांग्रेस ने 25 सीटों में से मात्र एक जीत हासिल की। अब, अगला विधानसभा चुनाव 2023 में निर्धारित है और पार्टी एक नए सीएम चेहरे पर विचार कर रही है ताकि 2019 के लोकसभा परिणाम 2024 के संसदीय चुनावों में दोहराए न जाएं।

प्रशांत किशोर ने की थी पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बड़े बदलाव की सिफारिश

दरअसल, दिग्गज रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने व्यापक रणनीति बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि गांधी ने इसे अंबिका सोनी जैसे दिग्गज नेताओं और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ साझा किया था। किशोर ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बड़े बदलाव की सिफारिश की है। उनका कहना है कि ये तीनों ऐसे राज्य हैं, जहां कांग्रेस मजबूत जमीन पर है, इसलिए पार्टी को इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

माकन ने दिए राज्य में कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल के संकेत
अगले कुछ दिनों में, रेगिस्तानी राज्य में बड़े बदलाव होंगे, जो राजनीतिक कार्रवाई के मामले में निचले स्तर पर है। दरअसल, राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की थी कि राज्य में कैबिनेट विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल के लिए रोडमैप तैयार है। उन्होंने कहा, “अगर अशोक गहलोत बीमार नहीं पड़ते तो हम पहले ही कैबिनेट विस्तार कर चुके होते जबकि निगमों में और जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों के लिए रोडमैप तैयार है।” कांग्रेस नेता ने कहा कि गहलोत अभी भी अस्वस्थ हैं और घर से काम कर रहे हैं। उनके ठीक होते ही यह काम कर दिया जाएगा।

कई मौकों पर सामने आ चुकी है गहलोत और पायलट के रिश्तों की तल्खी

पिछले कुछ समय में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रिश्तों की तल्खी कई मौकों पर नजर आ चुकी है। दोनों नेताओं के समर्थक भी अक्सर ही ऐसी बयानबाजी करते रहते हैं जिससे साफ संदेश जाता है कि राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ सही नहीं चल रहा है। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बयान दिया है कि विधानसभा चुनावों में मेहनत सचिन पायलट ने की जबकि उसका फल किसी और को मिल गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश बदलाव की उम्मीद लगाकर बैठा है। चौधरी ने कहा कि सचिन पायलट ने शुरू से मेहनत की है और आम जनमानस चाहता है कि उन्हें मुख्मयंत्री बनाया जाए। राजेंद्र चौधरी ने कहा कि सचिन पायलट ताबड़तोड़ दौरा कर रहे हैं। उधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विशेष कार्याधिकारी (OSD) लोकेश शर्मा ने पिछले शनिवार को इस्तीफा दे दिया। इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने एक ट्वीट किया था जिसे पंजाब में कांग्रेस नेतृत्व में हुए बदलाव की परोक्ष आलोचना के रूप में देखा गया था। ट्वीट के लहजे से प्रतीत हुआ जैसे किसी ताकतवर व्यक्ति को बेसहारा बना दिया गया और औसत दर्जे के किसी व्यक्ति को ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी ‘ऑल इज वेल’ नहीं, मुख्यमंत्री पद के लिए भूपेश बघेल व टीएस सिंहदेव में चल रही खींचतान

कहने के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस में ‘ऑल इज वेल’ है, लेकिन असलियत में यह सिर्फ ऊपरी तौर नजर आने वाला भ्रम है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ढाई-ढाई साल के लिये शीर्ष पद के बंटवारे को लेकर कथित मौखिक समझौते का हवाला देकर भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री के पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस शासित पंजाब में हाल में नेतृत्व परिवर्तन के कारण अनिश्चितता और बढ़ गई है। असल में यहां नेतृत्व परिवर्तन की मांग तब जोर पकड़ने लगी जब बघेल ने जून 2021 में मुख्यमंत्री के तौर पर ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। सिंहदेव धड़े का दावा था कि आलाकमान ने 2018 में सरकार का कार्यकाल आधा पूरा होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाने पर सहमति जताई थी। हालांकि राज्य में कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया कई बार इन दावों से इंकार कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह ने जुलाई में आरोप लगाए कि सिंहदेव से उनकी जान को खतरा है। बाद में उन्होंने अपना दावा वापस ले लिया।

मुख्यमंत्री बघेल ने दिल्ली में किया था शक्ति प्रदर्शन 

कांग्रेस आलाकमान ने कलह को शांत करने के लिए अगस्त में बघेल और सिंहदेव को दिल्ली बुलाया था। वहां से लौटने पर बघेल ने कहा कि पार्टी के नेता राहुल गांधी ‘उनके निमंत्रण पर’ राज्य का दौरा करने पर सहमत हो गए हैं। उधर, मुख्यमंत्री बघेल जब दिल्ली के दौरे पर थे तो कांग्रेस के 70 में से 54 विधायकों ने अलग से राजधानी का दौरा किया था, जो एक तरह से बघेल का शक्ति प्रदर्शन था।

वरिष्ठ नेताओं में संघर्ष, कार्यकर्ताओं में टकराव
बिलासपुर पुलिस ने कुछ दिन पहले राज्य कांग्रेस के पूर्व सचिव पंकज सिंह के खिलाफ एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारी के साथ कथित मारपीट को लेकर मामला दर्ज किया। अगले दिन सिंहदेव के समर्थक और कांग्रेस विधायक शैलेश पांडेय अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया। किसी का नाम लिए बगैर पांडेय ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं के इशारे पर कार्रवाई हुई है। बिलासपुर जिले में पार्टी की स्थानीय इकाई ने पार्टी विरोधी गतिविधियों को शह देने के लिए पांडेय को निष्कासित करने की मांग की। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आर. कृष्ण दास का कहना है कि पंजाब में हाल में नेतृत्व परिवर्तन ने राज्य के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अनिश्चितता की भावना पैदा की है।

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