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हां, यूपी के सीएम आदित्यनाथ का अपराधियों, आक्रांताओं, रसूखदारों और बाहुबलियों में आतंक है….जो पिछली सरकारों के नेताओं की कोठियों में ऐश करते थे, उनमें भय है!

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The Caravan (कारवां) मैग्जीन ने अपने एनीवर्सरी अंक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए ठीक ही लिखा है- आदित्यनाथ का आतंक का शासन। निश्चित रूप से यह उन बाहुबलियों के लिए आतंक का ही शासन है, जो पूर्ववर्ती सरकारों में सत्ता को अपनी मुठ्ठी में रखने का खेल खेलते थे और योगी आदित्यनाथ उन्हें जेल भेज रहे हैं। निश्चित रूप से यह उन अपराधियों, आक्रांताओं और समाजकंटकों के लिए भय का ही शासन है, जो अपराधों के बाद पिछली सरकारों के नेताओं, रसूखदारों की कोठियों-ठिकानों में छिपकर ऐश करते थे, और अब योगी के बुलडोजर घर तक पीछा कर उन्हें नेस्तनाबूत करने का हौंसला रखते हैं।ये सिर्फ हिंदूफोबिक नहीं, भारतीय सेना के खिलाफ भी दुष्प्रचार करते हैं
योगी आदित्यनाथ का निडर, निर्भीक और बाहुबलियों के लिए निर्मम तरीके से शासन करने का तरीका सिर्फ द कारवां मैगजीन को ही नहीं, कई अन्य हिंदू विरोधी और भारत विरोधी डिजिटल प्रचार मीडिया भी हैं, जिन्हें अपने वामपंथी विचारों के चलते पसंद नहीं है। और सीएम योगी के खिलाफ जिस तरह का प्रोपेगैंडा पोस्टर तैयार किया गया है, वैसा हिंदूफोबिक कंटेंट बनाने का पहला या आखिरी प्रयास नहीं है, इससे पहले भी ऐसे कुत्सित प्रयास अलग-अलग मीडिया कि शक्ल में सामने आते रहे हैं। वह चाहे द वायर हो, ऑल्ट न्यूज हो या फिर “द फेमिनिज्म इन इंडिया… ये सिर्फ हिंदूफोबिक नहीं हैं, बल्कि भारतीय सेना के खिलाफ भी दुष्प्रचार करते हैं!

घटिया पत्रकारिता करके अपने हिसाब से नेरेटिव गढ़ने में लगा
गुजरात के इंवेस्टिगेटिव जर्नालिस्ट विजय पटेल ने हिंदु विरोधी और भारत विरोधी डिजिटल प्रचार करके नफरत फैलाने वालों को अपने ट्वीट के जरिए अच्छा एक्सपोज किया है। एक के बाद एक ट्वीट में पटेल ने बखूबी बताया है कि किस तरह से कौन-कौन सा मीडिया घटिया पत्रकारिता करके अपने हिसाब से नेरेटिव गढ़ने में लगा हुआ है।

पटेल के मुताबिक सबसे पहले कुछ डिजिटल मीडिया घरानों, उनके संस्थापकों और उनके पत्रकारों से मिलना चाहिए। वे कितने हिडनफोबिक और भारत विरोधी हैं, यह समझने के लिए बस उनके लेख और उनके विचार पढ़ना ही काफी होगा।

दरअसल, हैरत और क्षोभ की बात तो यह है कि इस तरह का मीडिया सिर्फ हिंदूफोबिक नहीं हैं, बल्कि भारतीय सेना के खिलाफ भी दुष्प्रचार करते हैं! ‘द वायर’ हिंदूफोबिक, वामपंथी प्रचार की मशीन है।

इसी प्रकार एचडब्ल्यू न्यूज…हाल ही में असम पुलिस ने इसके पत्रकारों के खिलाफ दंगों के बारे में झूठी खबरें बनाने के लिए मामला दर्ज किया है। नारीवाद के नाम पर सबसे अधिक प्रचार करने वाले एनजीओ में से एक, “द फेमिनिज्म इन इंडिया” और दक्षिण का प्रोपेगैंडा निर्माता, ‘द न्यूज मिनट’ भी कुछ अलग नहीं है।

Above all this and a few others are funded by NGO IPSMF
IPSMF is doing hate funding which is helping leftist and other anti-India forces to create Hindufobia in the world pic.twitter.com/J2ZURrT5Xm

— Vijay Patel🇮🇳 (@vijaygajera) January 1, 2022

पटेल साक्ष्यों के साथ कहते हैं कि ऑल्ट न्यूज़ और बरखा दत्त के स्क्रीनशॉट संलग्न नहीं कर रहा हूँ क्योंकि सभी जानते हैं कि वे कैसे प्रचार करते हैं। इन सबसे ऊपर और कुछ अन्य एनजीओ IPSMF द्वारा वित्त पोषित हैं। IPSMF हेट फंडिंग कर रहा है जो दुनिया में हिंदूफोबिया पैदा करने के लिए वामपंथी और अन्य भारत विरोधी ताकतों की मदद कर रहा है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि IPSMF को फंड कौन देता है? प्रमुख व्यापारिक घराने या उनके मालिक इसमें शामिल हैं।  ये लोग इस आईपीएसएमएफ को फंडिंग कर रहे हैं। यह हेट फंड दुनिया भर में हिंदूफोबिया पैदा करने के लिए जिम्मेदार है। इनमें से ज्यादातर लोग टेक और फार्मा/मेडिकल क्षेत्र से हैं।

इस IPSMF ने इन सभी प्रोपेगेंडा मीडिया को कुल 85 करोड़ रुपए दिए हैं। ये फंड सैकड़ों प्रोपेगेंडा पत्रकारों को मोटी तनख्वाह के रूप में जाता है।

आदर्श रूप से, अगर वे इन सभी से अनजान हैं, तो उन्हें तुरंत हेट फंडिंग बंद कर देनी चाहिए। यदि वे नहीं रुकते हैं, तो आपको समझना चाहिए कि वे स्वेच्छा से इस हिंदू विरोधी और भारत विरोधी तंत्र का समर्थन कर रहे हैं।

 

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