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न्यू इंडिया में इस तरह चमक रहे देश के एयरपोर्ट, पीएम मोदी ने करोड़ों की लागत से बनकर तैयार बेंगलुरु एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 का किया उद्घाटन, देखते ही बन रही है खूबसूरती

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अवसरों पर कहा है कि वोट बैंक की राजनीति हमारे देश में दशकों से होती आ रही है और इसने देश का बहुत नुकसान किया है। उन्होंने कहा कि हम वोट बैंक नहीं, नया भारत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह हमेशा खुद को 130 करोड़ नागरिकों के परिवार के सदस्य के रूप में देखते हैं न कि प्रधानमंत्री के रूप में। अगर मैं देश के लिए कुछ कर पा रहा हूं तो 130 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और शुभकामनाओं के कारण ही संभव है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह सभी के कल्याण के लिए, प्रत्येक भारतीय के सम्मान के लिए, प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा के लिए, प्रत्येक भारतीय की समृद्धि के लिए, उनके जीवन में सुख और शांति लाने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, करेंगे। पीएम मोदी का यही विजन है जिसकी वजह से देश आज हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है और अपना पुराना वैभव हासिल करने की ओर अग्रसर है। पीएम मोदी ने कहा था कि हवाई चप्पल वाले भी हवाई सफर कर सकें, इस सपने को साकार करना है। नए भारत के विकास के इसी क्रम में बेंगलुरु एयरपोर्ट का टर्मिनल-2 बनकर तैयार हो गया है जिसका उद्घाटन पीएम मोदी 11 नवंबर को किया। इस एयरपोर्ट की तस्वीरें विकसित भारत के संकल्प को जाहिर करते हैं और पीएम मोदी के नए भारत के विजन को साकार करता है। नए भारत के शिल्पकार प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आधारभूत अवसंरचना का उत्कृष्ट उदाहरण बेंगलुरु एयरपोर्ट है। इसे देखकर हर भारतवासी गौरव कर सकता है। 

करोड़ों की लागत से बनकर तैयार बेंगलुरु एयरपोर्ट का टर्मिनल-2

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 नवंबर 2022 को लगभग 5000 करोड़ रुपये की लागत से बने बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Kempegowda International Airport) के टर्मिनल 2 का उद्घाटन किया। बेंगलुरु एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 की खूबसूरत तस्वीरें सामने आई हैं। इस टर्मिनल की खूबसूरती देखते ही बन रही है। पूरा टर्मिनल गोल्डन रंग से जगमग कर रहा है। T2 को बेंगलुरु के गार्डन सिटी के तौर पर डिज़ाइन किया गया है। इसे देखकर लगता है मानो एयरपोर्ट नहीं लोग बगीचे में वॉक करने आए हैं। T2 पर यात्रियों को संभालने की क्षमता के साथ-साथ चेक-इन और इमिग्रेशन के लिए काउंटर दोगुना हो सकते हैं। यह वर्तमान में 2.5 करोड़ से सालाना लगभग 5-6 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।

एयरपोर्ट की खूबसूरती देख खो जाएंगे आप, चांद-सितारों के बीच होने का होगा एहसास

गोल्डन रंग से जगमग T2 में बेहतरीन तरीके से काम किया गया है। यह देखने में काफी आलीशान लग रहा है। 17 सुरक्षा चेक-इन लेन के साथ कुल टर्मिनल क्षेत्र 2,55,645 वर्ग मीटर होगा। इतना ही नहीं इसके गेट लाउंज में बैठने की क्षमता 5,932 होगी। टर्मिनल के अंदर और बाहर दोनों ही तरफ हरी-भरी हरियाली देखी जा सकती है। यहां यात्रियों को बेहद की लग्जरी अनुभव मिलने वाला है। टर्मिनल के डिजाइन के लिए, अमेरिकी आर्किटेक्चर फर्म स्किडमोर, ओविंग्स एंड मेरिल (एसओएम) को चुना गया था।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट को इस तरह किया जा रहा तैयार

उत्तर प्रदेश, भारत में पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला एकमात्र राज्य बनने की ओर अग्रसर है। हवाई अड्डे का विकास कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और भविष्य के लिए विमानन क्षेत्र बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के मुताबिक है। इसके साथ ही कुशीनगर हवाई अड्डे और अयोध्या में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के विकास का गवाह यही उत्तर प्रदेश बन रहा है। ये हवाई अड्डा उत्तर भारत का लॉजिस्टिक गेटवे भी होगा। अपने पैमाने और क्षमता के चलते यह एयरपोर्ट यूपी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह प्रदेश की क्षमता को दुनिया के सामने लाएगा और वैश्विक मानचित्र पर राज्य को स्थापित करने में मदद करेगा। पहली बार भारत में एक हवाई अड्डे की अवधारणा एक एकीकृत मल्टी मोडल कार्गो हब के साथ की गई है, जिसमें कुल लागत और समय को कम करने पर ध्यान दिया गया है।

देश का पहला ट्रांजिट हब बनेगा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट

नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे का काम शुरू हो गया है। इसे एशिया पैसेफिक ट्रांजिट हब विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। देश में अभी किसी एयरलाइंस का ट्रांजिट हब नहीं है। इसी के मद्देजनर जेवर एयरपोर्ट में एशिया पैसेफिक ट्रांजिट हब विकसित करने की योजना है। इसके लिए किसी बड़ी एयरलाइंस से समझौता होता है। समझौता करने वाली एयरलाइंस अन्य एयरलाइंस को अपने साथ जोड़ती है। हब बनने के बाद उसकी सभी फ्लाइट यहां से होकर गुजरेंगी।

ट्रांजिट हब बनने से एयरपोर्ट में फ्लाइट का आना-जाना अधिक होगा

ट्रांजिट हब बनने से एयरपोर्ट में फ्लाइट का आना-जाना अधिक होगा। जब फ्लाइट अधिक आएंगी तो रोजगार के अवसर बनेंगे और व्यापार भी बढ़ेगा। इसलिए यह हब बनने से अनेक फायदे मिलेंगे। यात्री सुविधाएं, सामान प्रबंधन, इम्मिग्रेशन आदि पर जोर दिया जाएगा। एयरपोर्ट में लाउंज से सीधे विमान तक पहुंचने की सुविधा मिल सकती है। यहां पर यात्रियों के सामान को रखने पहुंचाने में नई तकनीक का इस्तेमाल होगा इसके लिए मल्टी लेयर लैगेज पार्किंग बनेगी। यहां पर अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। जेवर एयरपोर्ट में भी पेरिस के ज्यूरिख एयरपोर्ट की तरह तकनीक देखने को मिलेगी।

नोएडा एयरपोर्ट के लिए 6200 हेक्टेयर भूमि आरक्षित

एयरपोर्ट के लिए कुल 6200 हेक्टेयर भूमि आरक्षित है। क्षेत्रफल के मामले में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनना है। इससे पहले किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट सऊदी अरब, डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट व डलास इंटरनेशनल एयरपोर्ट अमेरिका आदि तीन एयरपोर्ट ही क्षेत्रफल के मामले में सबसे बड़े हवाई अड्डों में शुमार थे। हालांकि, रनवे के मामले में दूसरे अन्य एयरपोर्ट बड़े हैं। उल्लेखनीय है कि जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण अलग-अलग चरणों में पूरा होगा।

नोएडा एयरपोर्ट से सालाना 7 करोड़ यात्री सफर करेंगे

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) स्थित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का ठेका टाटा समूह को मिला है। नोएडा हवाई अड्डे का पहला चरण अगले दो वर्षों में तैयार होने की उम्मीद है और यह टाटा प्रोजेक्ट्स द्वारा शुरू की गई दूसरी हवाई अड्डा परियोजना होगी। पहला प्रयागराज (इलाहाबाद) हवाई अड्डा टर्मिनल होगा। जेवर में बनने वाला एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रेटर नोएडा के जेवर में एयरपोर्ट की नींव रखी थी। यहां कुल पांच रनवे बनने हैं। पहले चरण के लिए 1334 हेक्टेयर भूमि पर दो रनवे का निर्माण कार्य शुरू है। पहले फेज का निर्माण भी चार भागों में होगा। एक रनवे का निर्माण कार्य 2024 में पूरा हो जाएगा। इस पर करीब 5700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एयरपोर्ट के चालू होने पर शुरुआती दौर में सालाना एक करोड़ 20 लाख यात्री सफर करेंगे। संख्या बढ़ने पर दूसरे चरण में एक और रनवे का निर्माण होगा। बाकी दो और रनवे का निर्माण अगले चरणों में होगा। चारों चरण पूरे होने पर एयरपोर्ट से सालाना करीब सात करोड़ यात्री सफर करेंगे।

नोएडा एयरपोर्ट परियोजना पर कुल 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान

परियोजना पर कुल 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान हैं। दूसरे चरण के लिए जिस भूमि को लिया जा रहा है, उस पर एक रनवे व एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहालिंग (एमआरओ) का केंद्र बनेगा। देश के 85 प्रतिशत हवाई जहाज मेंटेनेंस रिपेयर, ओवरहालिंग के लिए विदेश जाते हैं। इस पर सालाना 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह रकम विदेश चली जाती है। अब यहीं पर यह सुविधा होने से देश का पैसा बचेगा।

हवाई नेटवर्क : बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों का भी रखा ख्याल

साल 2021 हवाई नेटवर्क को छोटे शहरों तक पहुंचाने का भी गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल यूपी के प्रमुख बौद्ध स्थल कुशीनगर में हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। इसके साथ ही, बरेली, ग्वालियर, जबलपुर भी हवाई नेटवर्क से जुड़ गए। ग्रेटरनोएडा का जेवर एयरपोर्ट लगातार सुर्खियों में रहा। इस साल में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी देश में हवाई यात्रा नेटवर्क को मजबूत करने के लिए काफी काम किया है। पूरे भारत में कनेक्टिविटी में सुधार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से 100 रूट शुरू किए गए। 12 हवाई अड्डों का संचालन किया गया, जिसमें 3 हेलीपोर्ट शामिल हैं।

भारत दुनिया के बड़े एयरपोर्ट की सूची में चौथे स्थान पर होगा

नोएडा एयरपोर्ट एमआरओ का बड़ा केंद्र बनने से विदेश जाने वाली मुद्रा की बचत होगी और युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इसके बन जाने से भारत दुनिया के बड़े एयरपोर्ट की सूची में चौथे स्थान पर पहुंच जाएगा। क्षेत्रफल के आधार पर दुनिया के मौजूदा पांच सबसे बड़े एयरपोर्ट में सऊदी अरब का किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट 77,600 है, अमेरिका का डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट 13,571 हे. और अमेरिका डलास इंटरनेशनल एयरपोर्ट 6,963 हेक्टेयर भूमि पर बना है। इसके बाद अमेरिका के दो अन्य आरलैंडो इंटरनेशनल एयरपोर्ट 5383 है और वाशिंगटन डल्लास इंटरनेशनल एयरपोर्ट 4856 हेक्टेयर भूमि में बना हैं। जबकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुल 6200 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा।

देवघर एयरपोर्ट से बोकारो, दुमका और जमशेदपुर में हवाई सेवा के बढ़े आसार

पीएम मोदी ने 12 जुलाई 2022 को 401.03 करोड़ रुपये की लागत से बनी देवघर एयरपोर्ट जनता को समर्पित किया। इसके साथ ही झारखंड में एयरपोर्ट की संख्या दो हो गयी है। देवघर के अलावा रांची का भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है। अब बोकारो, दुमका और जमशेदपुर से भी जल्द हवाई सेवा उपलब्ध होगी। इस संबंध में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज देवघर में इसके संकेत भी दिए हैं।

बोकारो, दुमका और जमशेदपुर से भी जल्द भरेगी उड़ान

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सिंधिया ने कहा कि देवघर के लोगों ने जो सपना देखा था, आज वह सपना एयरपोर्ट और 16000 करोड़ की योजना के रूप में साकार हो रहा है। जल्द ही देवघर से रांची, देवघर से पटना और देवघर से दिल्ली को जोड़ा जायेगा। इससे देवघर आने वाले भक्तों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज के दिन संकल्प लेते हैं कि अभी झारखंड में दो एयरपोर्ट है एक रांची और अब देवघर। जल्द ही बोकारो, दुमका और जमशेदपुर में एयरपोर्ट बनायेंगे।

झारखंड का दूसरा प्रवेश द्वार बनेगा देवघर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी का मानना है कि हवाई चप्पल पहनने वाले के पास हवाई अड्डा आये, इस सोच के साथ सरकार काम कर रही है. इसी के लिए उड़ान योजना की शुरुआत की गयी है। कहा कि जहां से एयरपोर्ट संचालित होता है वहां के आर्थिक विकास का पहिया तेजी से आगे बढ़ता है। उन्होंने देवघर एयरपोर्ट के शुरू हो जाने से वे निश्चित रूप से कह सकते हैं कि झारखंड का दूसरा प्रवेश द्वार देवघर जरूर बनेगा। इस एयरपोर्ट से 2.50 करोड़ जनता के लिए नयी हवाई सेवा मिलेगी। अभी देवघर कोलकाता के बीच विमान सेवा शुरू हुई है। जल्द ही रांची, पटना और दिल्ली के लिए भी हवाई सेवा शुरू होगी। इस दौरान उन्होंने देश में हवाई सेवा कैसे विकसित हुआ, उपलब्धियां गिनायी।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पर्यटन, विकास व रोजगार को उड़ान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2021 को एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। समारोह में मौजूद रहे नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोविड-19 की स्थिति सामान्य होने पर अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने के साथ ही 24 नवंबर से कुशीनगर से दिल्ली और 18 दिसंबर से कुशीनगर से मुंबई व कोलकाता की नियमित उड़ान सेवा शुरू करने की घोषणा की थी। स्पाइस जेट ने 24 नवंबर के बजाए 26 नवंबर से दिल्ली के लिए उड़ान शुरू की। कुशीनगर हवाई अड्डे की अनुमानित लागत 260 करोड़ रुपये है। यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों को भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर जाने की सुविधा देगा और दुनिया भर के बौद्ध तीर्थस्थलों को जोड़ने की कोशिश है। इस हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश और बिहार के आस-पास के जिलों को भी लाभ होगा।

हवाई अड्डे : मुद्रीकरण, विकास, ई-गवर्नेंस और ड्रोन नियम-21

ड्रोन नियम 2021 को 25 अगस्त 2021 को अधिसूचित किया गया। नीति का उद्देश्य भारत को ड्रोन के अनुसंधान और विकास, परीक्षण, निर्माण और संचालन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है। पीपीपी मॉडल के तहत लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम सहित 6 हवाई अड्डों को प्रबंधन के लिए सौंप दिया गया। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत, अगले 3 वर्षों में मुद्रीकरण के लिए 25 अतिरिक्त हवाई अड्डों की पहचान की गई। 25 सितंबर 2021 को, AAI ने देश में विमानन उद्योग विकास को बढ़ाने के लिए एक उदार FTO नीति की घोषणा की। एयरसेवा 3.0 को 02 अक्टूबर 2021 को शिकायत निवारण की बेहतर सुविधा के साथ लाइव किया गया। 11 नवंबर 2021 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (ईजीसीए) में ई-गवर्नेंस शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य डीजीसीए की प्रक्रियाओं और कार्यों में व्यापार करना, पारदर्शिता और स्वचालन को आसान बनाना है।

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