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वैक्सीन पर सिर्फ सियासत करने में व्यस्त है कांग्रेसी, राजस्थान में कुल 11.5 लाख कोरोना वैक्सीन के डोज खराब

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (20 मई, 2021) को सभी जिलाधिकारियों से कोविड -19 टीकों की कम से कम बर्बादी सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। उन्होंंने कहा था कि वैक्सीन की बर्बादी एक गंभीर मुद्दा है। एक भी खुराक बर्बाद करने का मतलब है किसी के जीवन को ढाल देने से वंचित कर देना। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के इस अनुरोध का असर ना तो कांग्रेस शासित राज्यों पर हुआ है और ना ही जिलाधिकारियों पर हुआ है। राजस्थान में पहले वैक्सीन की चोरी हुई, अब वैक्सीन की बर्बादी हो रही है। लेकिन इसकी चिंता किसी कांग्रेसी नेता को नहीं है।

हैरानी की बात यह है कि वैक्सीन की बर्बादी में राजस्थान सबसे आगे है। पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 प्रतिशत) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं। चुरू जिले में सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई है। इस मामले में 24.60 प्रतिशत के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है। वैक्सीन बर्बादी के मामले में यह जिला तीसरे नंबर पर है। वहीं 16.71 प्रतिशत वैक्सीन को बर्बाद करके कोटा चौथे नंबर पर है।

वैक्सीन की इस बर्बादी पर केंद्रीय मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सवाल उठाया है।शेखावत ने कहा, “प्रधानमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि कोविड के टीके की एक खुराक बर्बाद करना किसी व्यक्ति को जीवन कवच से वंचित करने जैसा है, लेकिन जिनकी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने की आदत ही बन चुकी हो तो उन्हें कैसे सुधारेंगे?” उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिर वैक्सीन की बर्बादी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?

केंद्रीय मंत्री ने वैक्सीन की बर्बादी को अपराध बताते हुए कहा, “ये लोगों के जीवन का सवाल है इसलिए इस कृत्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आगे कहा कि ये गहलोत की जिम्मेदारी है कि वे अपराधियों को सजा दें, अन्यथा हम ये मान लें कि इसके लिए मुख्यमंत्री खुद ही जिम्मेदार हैं।

कांग्रेसी नेताओं और उनकी राज्य सरकारों का एक ही मकसद है, किसी तरह मोदी सरकार को बदनाम करना है। कभी वैक्सीन की कीमत को लेकर राजनीति की, तो कभी वैक्सीन की कमी को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया। कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान के खिलाफ भी माहौल बनाने की कोशिश की। गैर-एनडीए दल खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी टीकाकरण अभियान पर ओछी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

टीकाकरण अभियान की शुरुआत से ही प्रोपेगैंडा की जा रही है। शशि थरूर, मनीष तिवारी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव जैसे कांग्रेसी नेताओं ने टीकाकरण के अभियान पर संदेह पैदा करने की कोशिश की। इससे कांग्रेस शासित राज्यों में टीकाकरण की रफ्तार धीमी रही। इसके बाद अचानक वैक्सीन की कमी को लेकर केंद्र सरकार पर हमले करने लगे। महामारी के समय कांग्रेसियों को अपने शासित राज्यों में कोरोन के खिलाफ लड़ने की जरूर है, तो वो मोदी सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। 

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