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United We Stand का नारा देने वाले इंडी अलायंस में ब्रेकअप! विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ ही लड़ रहे

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आजादी के बाद देश पर करीब 60 साल तक शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ने कभी साफ नीयत से काम नहीं किया। आजादी के बाद ही उसने अंग्रेजों के चरित्र को अपना लिया और ‘फूट डालो राज करो’ से लेकर भ्रष्टाचार तक हर हथकंडे अपना ही नहीं लिए बल्कि बखूबी सीख भी लिए। 60 सालों में घोटालों की लंबी फेहरिस्त कांग्रेस के नाम दर्ज है। देश लगे आपातकाल का एकमात्र दाग भी कांग्रेस के नाम पर ही है। कांग्रेस की नीति कभी भी देश का भला नहीं रहा बल्कि परिवारवाद ही उसके मूल में रही। उसकी नीयत में हमेशा से ही खोट रही है। नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन के लिए राजनीतिक दलों को एकजुट कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस इसमें कूद पड़ी और इंडी अलायंस बन गया। विपक्षी दलों में एकजुटता दर्शाने के लिए United We Stand का नारा भी दिया गया लेकिन कांग्रेस की वजह से ही अब इंडी अलायंस में ब्रेकअप की खबरें आने लगी हैं। इंडी अलायंस की बैठक में कहा गया था कि सीट शेयरिंग के लिए कमेटी बनाई जाएगी लेकिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जिस तरह से अपने-अपने उम्मीदवार उतार रही है उससे अब साफ हो रहा है कि इंडी अलायंस में सबकुछ ठीक नहीं है।

कांग्रेस ने नीतीश से छीन ली विपक्षी गठबंधन की कमान?
हाल के दिनों की राजनीति को देखें तो किसी भी मुद्दे पर कांग्रेस आगे आ जाती है। हाल में बिहार में जातिगत गणना सर्वे रिपोर्ट के आंकड़े जारी होने के बाद जैसे ही नीतीश कुमार चर्चा में आए वैसे ही कांग्रेस ने ओबीसी का मुद्दा जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया। पार्टी के प्रमुख नेता राहुल गांधी ने तो इसको लेकर प्रेस कांफ्रेंस तक कर दी और कांग्रेस शासित राज्यों में जाति सर्वे कराने की घोषणा कर दी। इससे साफ है कि कांग्रेस इंडी अलायंस के किसी भी दल के नेता कद बढ़ जाए ये बर्दाश्त करने वाली नहीं है। विपक्षी दलों को एकजुट करने के दौरान भी नीतीश कुमार का कद बढ़ने लगा था और कांग्रेस को यह बात रास नहीं आई।

बेंगलुरू में नीतीश के खिलाफ लगे पोस्टर, अनस्टेबल प्राइम मिनिस्टर उम्मीदवार’
पटना के बाद इंडी अलायंस की दूसरी बैठक कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में 17-18 जुलाई को हुई। इस मीटिंग के समय भी कुछ ऐसा हुआ जो नीतीश कुमार के सियासी कद को कतरने जैसा था। बेंगलुरु की सड़कों पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधने के लिए पोस्टर लगाए गए जिनमें नीतीश को ‘अनस्टेबल प्राइम मिनिस्टर उम्मीदवार’ बताया गया था। कहां तो उन्हें संयोजक बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन यहां तो उन्हें टारगेट किया गया। शायद यही वजह रही जो नीतीश कुमार मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए थे। वे पहले ही मीटिंग से निकलकर पटना के लिए रवाना हो गए। यह कांग्रेस की बुरी नीयत को दर्शाता है।

सुखपाल खैरा की गिरफ्तारी I.N.D.I. Alliance के टूटने की शुरुआत
पंजाब में कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी गठबंधन I.N.D.I. Alliance में दरार आने की अटकलें तेज हो गई। दरअसल, पंजाब में आम आदमी पार्टी यानी AAP की सरकार है। इंडी अलायंस में आप और कांग्रेस एक दूसरे के पार्टनर भी हैं। ऐसे में पंजाब में कांग्रेस विधायक की गिरफ्तारी के बाद दोनों पार्टियां एक दूसरे के आमने-सामने आ गई हैं। सुखपाल सिंह खैरा को सात साल पुराने एक मामले में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामले को लेकर विपक्षी गठबंधन पर असर दिख सकता है।

दिल्ली में कांग्रेस सभी लोकसभा सीट लड़ेगी, AAP ने कहा- I.N.D.I. Alliance बनाने का औचित्य ही क्या है?
दिल्ली में कांग्रेस की एक बैठक के बाद पार्टी के नेताओं ने संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस हाईकमान ने की तरफ से दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर मजबूत तैयारी करने के निर्देश मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के मूड में नहीं है और दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर लड़ना चाहती है। कांग्रेस नेताओं के बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस बीच आम आदमी पार्टी ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने दिल्ली में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो I.N.D.I. Alliance बनाने का औचित्य ही क्या है? आम आदमी पार्टी नेता विनय मिश्रा ने कहा है कि कांग्रेस नेताओं का ये बहुत हैरान करने वाला बयान है। ऐसे बयानों के बाद गठबंधन का क्या मतलब रह जाता है?

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को दिखाया ठेंगा
बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों ने इंडी अलायंस बनाया, तब सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल उठे थे। अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी की दावेदारी को खारिज कर दिया। 230 सदस्यों वाली मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली लिस्ट में कांग्रेस ने उन पांच सीटों पर भी कैंडिडेट उतार दिया, जहां समाजवादी पार्टी दावा कर रही थी। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी की ओर से 2018 में जीती गई सीट बिजावर से भी चरण सिंह यादव को टिकट थमा दिया। 2018 में समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार 67 हजार के अधिक वोटों से बिजावर सीट पर जीत दर्ज की थी। अब सपा मध्यप्रदेश में 9 सीटों पर कैंडिडेट उतारेगी और बीजेपी के साथ कांग्रेस से भी मुकाबला करेगी।

मप्र में कांग्रेस, सपा और AAP आमने-सामने
विपक्षी पार्टियों ने इंडी अलायंस तो बना लिया लेकिन विधानसभा चुनावों में यहीं पार्टियां एक-दूसरे का पत्ता काटने में लगी हुई हैं। मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक-दूसरे के सामने खड़े हैं। इन तीनों पार्टियों में प्रदेश स्तर पर कोई गठबंधन नजर नहीं आ रहा है। यहां सभी पार्टियां एक-दूसरे की कमियां गिनाने में लग हुई हैं। लिहाजा ये दल एक दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं। मेहगांव सीट पर कांग्रेस ने राहुल भदौरिया को टिकट दिया है तो वहीं, इसी सीट से सपा ने बृजकिशोर सिंह गुर्जर को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने सतिंदर भदौरिया पर इस सीट के लिए भरोसा जताया है। सेवड़ा सीट से कांग्रेस ने फूल सिंह बरैया को चुनावी मैदान में उतारा है, तो उनके प्रतिद्वंद्वी के तौर पर सपा के आरडी राहुल अहिरवार और आम आदमी पार्टी ने रमणी देवी जाटव को उम्मीदवार बनाया है।

सपा ने 2018 में 52 सीटों पर उतारे थे उम्मीदवार, 1 पर मिली थी जीत
मध्य प्रदेश चुनाव 2018 में समाजवादी पार्टी ने 52 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को केवल एक सीट बिजावर पर जीत मिल पाई थी। 45 सीटों पर समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। पार्टी को कुल मतदान में से 4 लाख 96 हजार 25 वोट ही मिले थे, यानी कुल मतदान का सिर्फ 1.30 फीसदी हिस्सा ही पार्टी हिस्से में आया था। पार्टी इस चुनाव में नोटा से भी कम वोट मिले थे। हालांकि, पार्टी का प्रदर्शन आम आदमी पार्टी, बीएलएसपी और जेडीएस जैसी पार्टियों से बेहतर था। मध्य प्रदेश के सामाजिक समीकरण पर गौर करें तो यहां के 25 से 30 सीटों पर यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। 50 सीटों पर ये ठीक-ठाक संख्या में हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश के यादव मतदाताओं में समाजवादी पार्टी के प्रति रुझान कम ही दिखता है।

राजस्थान में भी कांग्रेस, सपा और AAP आमने-सामने
राजस्थान में कांग्रेस सरकार में है और वह सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं AAP ने भी 200 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने की बात कही है। वहीं समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए अपना विस्तार कर रही है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस बार राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। उन्होंने प्रदेश के एक विधानसभा सीट पर उम्मीदवार के नाम के एलान के साथ इसकी ऑफिशियल शुरुआत भी कर दी है।

छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस और AAP आमने-सामने
छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस सरकार में है और उसने सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है। वहीं आम आदमी पार्टी ने 90 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए अब तक 33 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

 

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