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धोखेबाज चीन को सबक सिखाने की बनी बड़ी रणनीति, इजरायल के साथ मिलकर हाइटेक वेपन सिस्टम्स तैयार करेगा भारत

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चीन ने 1962 में भारत के साथ धोखेबाजी की थी, जिसकों भारत आज तक नहीं भूल पाया है। चीन से मिले धोखे से सबक लेते हुए मोदी सरकार सीमा पर पूरी तरह सतर्क है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सख्त तेवरों ने जता दिया है कि भारत अब चीन के धोखे में आने वाला नहीं है। मोदी सरकार चीन की हर चाल को नाकाम करने और उसके दुस्साहस का जवाब देने के लिए बड़ी रणनीति पर काम कर रही है। 

अत्याधुनिक हथियारों का तंत्र विकसित करने की योजना

भारत ने इजरायल के साथ मिलकर अत्याधुनिक हथियारों का पूरा तंत्र विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए भारत और इजरायल के रक्षा सचिव की अगुवाई में गुरुवार को रक्षा सहयोग पर संयुक्त कार्यसमूह (Joint Working Group on Defence Cooperation) के अंदर एक नया सब-ग्रुप बना दिया गया।

भारत और इजरायल का संयुक्त उप-कार्यसमूह का गठन

इस रक्षा औद्योगिक सहयोग पर उप-कार्यसमूह का मुख्य काम तकनीक के हस्तांतरण, रक्षा उपकरणों का संयुक्त विकास और उत्पादन, तकनीकी सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इनोवेशन और तीसरे देशों को संयुक्त निर्यात सुनिश्चित करना होगा। भारत को हथियारों के आपूर्तिकर्ता देशों की लिस्ट में इजरायल करीब दो दशकों से चौथे स्थान पर कायम है। वह भारत को हर साल करीब 1 अरब डॉलर (करीब 70 अरब रुपये) मूल्य का सैन्य निर्यात करता है।

संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पर जोर

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अब जब भारत का रक्षा उद्योग भी मजबूत हो रहा है तब दोनों देशों के बीच अनुसंधान एवं विकास (R&D) के साथ-साथ साझे विकास एवं उत्पादन की परियोजनाएं बढ़ाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा, इजरायल मिसाइलों, सेंसरों, साइबर सिक्यॉरिटी और वायरस डिफेंस सब-सिस्टम्स के क्षेत्र में वर्ल्ड लीडर है। बहरहाल, भारतीय रक्षा मंत्रालय में रक्षा उद्योग एवं उत्पादन के संयुक्त सचिव संजय जाजू और इजरायली रक्षा मंत्रालय में एशिया एंड पसिफिक रीजन के डायरेक्टर इयाल कैलिफ नवनिर्मित उप-समूह के नेतृत्वकर्ता हैं।

भारतीय सेना में बराक-8 मिसाइल सिस्टम्स शामिल

यह पहल ऐसे वक्त में हुई है जब भारतीय सशस्त्र बलों में सतह से हवा में मार करने वाले अगली पीढ़ी के बराक-8 मिसाइल सिस्टम्स शामिल किए जा रहे हैं। ये 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के तीन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और इजरायली एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) की साझी परियोजनाओं का हिस्सा हैं। 

मोदी सरकार आने के बाद मजबूत हुए रक्षा संबंध

इजरायल के साथ रक्षा सहयोग को तब से मजबूती मिलने लगी जब इजरायल ने 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए करगिल युद्ध के दौरान भारत को आपातकालीन परिस्थितियों में हथियार भेजे। 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और भी मजबूत हुए। भारतीय सशस्त्र बलों ने अब तक अपने बेड़े में फालकॉन अवाक्स और हेरॉन, सर्चर-2 और हार्लोप ड्रोन से लेकर बराक एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स एवं स्पाइडर क्विक-रिएक्शन एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम्स तक शामिल कर लिया है।

बालाकोट में हुआ था स्पाइस-2000 बॉम्ब का इस्तेमाल

भारत ने इजरायल से पाइथन और डर्बी एयर-टु-एयर मिसाइल से लेकर क्रिस्टल मेज और स्पाइस-2000 बॉम्ब तक खरीदा है। पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकवादी अड्डे को तबाह करने के लिए स्पाइस-2000 बॉम्ब का इस्तेमाल ही किया गया था।

अभी इजरायल के साथ होंगे कई रक्षा सौदे

अभी इजरायल के साथ भारत के कई रक्षा सौदे पाइपलाइन में हैं। भारतीय वायुसेना दो और फालकॉन अवाक्स की डील करने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पिछले महीने ‘प्रॉजेक्ट चीता’ की गति तेज करने का फैसला किया जिसके तहत लेजर गाइडेड बमों से युक्त हेरॉन ड्रोनों, हवा से सतह में मार करने वाले टैंक रोधी मिसाइलों के साथ-साथ दूसरे प्रेसिजन गाइडेड हथियार भी खरीदे जाने हैं।

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