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तीन कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के सदस्य का बड़ा खुलासा, कानून के पक्ष में थे 73 में से 61 किसान संगठन, किसानों ने खोया मौका

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तीन कृषि कानूनों की वापसी के पांच महीने बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के एक सदस्य अनिल घनवट ने सीलबंद रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सबको हैरान कर दिया है। घनवट ने दावा किया है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने से पहले पैनल ने 73 किसान संगठनों से बातचीत की थी। इनमें से 61 किसान संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा लाये गए कृषि कानूनों का समर्थन किया था। ये संगठन देश के साढ़े 3 करोड़ किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले आंदोलन करने वाले 40 संगठनों ने बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अपनी राय प्रस्तुत नहीं की। 

वामपंथी नेताओं ने किसानों को किया गुमराह

अनिल घनवट ने कहा कि वामपंथी नेताओं ने किसानों को गुमराह किया। साथ ही ये भी भ्रम फैलाया कि इससे एमएसपी खत्म हो जाएगा। जबकि कानून में कुछ भी ऐसा नहीं था। अनिल घनवट ने कहा कि उत्तर भारत के जिन किसानों ने कृषि कानूनों को लागू नहीं होने दिया, उन्होंने खुद की आय को बढ़ाने का एक बड़ा मौका खो दिया। घनवट के मुताबिक सीलबंद रिपोर्ट में भी कृषि कानूनों को रद्द न करने की सलाह दी गई थी। इन कृषि कानूनों को रद्द करना या लंबे समय तक लागू न करना उन लोगों की भावनाओं के खिलाफ है जो इसका मौन समर्थन करते हैं।

रिपोर्ट किसानों और नीति निर्माताओं के लिए काफी अहम

स्वतंत्र भारत पार्टी के अध्यक्ष और किसान नेता घनवट ने कहा कि तीनों कानूनों को निरस्त कर दिया गया है। इसलिए अब इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। लेकिन समिति की रिपोर्ट किसानों और नीति निर्माताओं के लिए काफी अहम है और इसलिए उन्होंने इसे सार्वजनिक करने का फैसला किया है। हालांकि यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल 21 मार्च, 2021 को सीलबंद लिफाफे में जमा कर दी गई थी लेकिन इस रिपोर्ट में क्या थी, इसके बारे में लोगों को पता नहीं था। हमने शीर्ष अदालत को तीन बार पत्र लिखकर रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया। लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।

तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा

गौरतलब है कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर किसान सगठनों के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद पिछले साल 19 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए आंदोलनरत किसानों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह किया था। निरस्त किए गए तीन कृषि कानून – कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) कानून, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून और आवश्यक वस्तुएं (संशोधन) कानून थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैनल का गठन

तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन करने वाले 40 किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में से एक था। प्रदर्शन और किसानों की मांग को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी, 2021 को एक पैनल का गठन किया था। इस पैनल में कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और अनिल घनवट शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्यीय टीम बनाई थी, लेकिन किसान नेता भूपिंदर सिंह मान ने इससे खुद को अलग कर लिया था।

 

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