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41 कोयला खदानों के वाणिज्यिक खनन की नीलामी प्रक्रिया शुरू, पीएम मोदी ने बताया आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में एक बड़ा कदम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार फैसले ले रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को 41 कोयला खदानों के वाणिज्यिक खनन की नीलामी प्रक्रिया शुरू की। सरकार के इस कदम से देश का कोयला क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुल जाएगा।

33,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की उम्मीद

वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत करने के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश कोरोना वायरस संक्रमण से अपनी लड़ाई जीत लेगा और इस संकट को एक अवसर में बदलेगा। यह महामारी भारत को आत्म निर्भर बनाएगी। कोयला खदानों की वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी से देश में अगले पांच से सात साल में 33,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की उम्मीद है।

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा कोयला निर्यातक बनाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत होना देश के कोयला क्षेत्र को ‘दशकों के लॉकडाउन’ से बाहर निकालने जैसा है। भारत का लक्ष्य दुनिया का सबसे बड़ा कोयला निर्यातक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार मौजूद होने के बावजूद देश अभी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला आयातक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए निजी कंपनियों को अनुमति देना चौथे सबसे बड़े कोयला भंडार रखने वाले देश के संसाधनों को जकड़न से निकालना है।’’

नीलामी प्रक्रिया को बनाया गया पारदर्शी

कोयला क्षेत्र को बंद रखने की पुरानी नीतियों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोयला नीलामी में पहले बड़े घोटाले हुए, लेकिन अब प्रणाली को ‘पारदर्शी’ बनाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नीलामी प्रक्रिया से राज्यों की आय बढ़ने के साथ-साथ सूदूर इलाकों का विकास होगा और रोजगार का निर्माण होगा।

राज्यों की आय में वार्षिक 20,000 करोड़ रुपये का योगदान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया का शुरू होना ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत की गयी घोषणाओं का ही हिस्सा है। यह राज्य सरकारों की आय में सालाना 20,000 करोड़ रुपये का योगदान करेगा।

सुधार के बाद पूरा कोल सेक्टर होगा आत्मनिर्भर 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक मजबूत माइनिंग और मिनरल सेक्टर के बिना भारत को आत्मनिर्भर बनाना संभव नहीं है। क्योंकि खनिज और खनन हमारी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इन रिफॉर्म्स के बाद अब कोयला उत्पादन और पूरा कोल सेक्टर भी एक प्रकार से आत्मनिर्भर हो पाएगा। पूर्वी भारत और मध्य भारत की एक बड़ी आबादी को उसके घर के पास ही बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में कॉमर्शियल माइनिंग के हमारे ये कदम इच्छित परिणाम लाएंगे। हमें वहां के गरीबों का भी भला करना है।

ऊर्जा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य 

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने के आह्वान के अनुरूप इस नीलामी प्रक्रिया का लक्ष्य देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भरता हासिल करना और औद्योगिक विकास को तेज करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोयला और खनन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, पूंजी और प्रौद्योगिकी लाने के लिए इसे पूरी तरह खोलने का बड़ा फैसला किया गया है।

कोयला उत्पादन को एक अरब टन तक पहुंचाने का लक्ष्य

कोयला और खान मंत्री प्रहलाद जोशी भी इस मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि देश के कोयला उत्पादन को एक अरब टन तक पहुंचाने के लिए क्षेत्र में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। कोयला क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोयला मंत्रालय ने फिक्की के साथ मिलकर 41 कोयला खदानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। यह नीलामी कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की गयी है।

2.8 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार 

सरकार के मुताबिक इन कोयला खदानों से होने वाला उत्पादन देश के 2025-26 तक अनुमानित कोयला उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत का योगदान करेगा। साथ ही इससे 2.8 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें करीब 70,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 2.10 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।

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