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अखिलेश यादव ने मां गंगा और उसमें आस्था रखने वाले करोड़ों हिन्दुओं का किया अपमान

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव औरंगजेब और जिन्ना की विचारधारा से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं। इसलिए उन्हें हिन्दुओं की आस्था की प्रतीक मां गंगा भी मैली नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने जिस तरह मुख्यमंत्री योगी के बहाने मां गंगा पर तंज कसा वो प्रधानमंत्री मोदी और उनके जैसे करोड़ों हिन्दुओें का अपमान है, जो मां गंगा में आस्था रखते हैं और उसमें स्नान करते हैं।

जौनपुर में अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गंगा में डुबकी लगाने पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अकेले ही गंगा में स्नान करते नजर आए। मुख्यमंत्री योगी जानते हैं कि गंगा साफ़ नहीं हो सकती। इसलिए उन्होंने डुबकी नहीं लगाई है। अखिलेश ने कहा कि इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी जो करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी गंगा को साफ नहीं किया जा सका। अब लोगों को बरगलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी गंगा स्नान की रस्म निभा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने अपने बयान से प्रधानमंत्री मोदी और बाबा विश्वनाथ का अपमान किया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण करने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने ललिता घाट पर गेरुए वस्‍त्र में गंगा में डुबकी लगाई। कलश में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दिया। गंगा जल में खड़े होकर नम: शिवाय का जाप करने के बाद आचमन के साथ हाथों में गंगा जल कलश लिया। गंगा नदी में स्नान करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के गर्भ गृह में प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा विश्वनाथ का गंगा नदी के जल से जलाभिषेक किया। अखिलेश यादव की माने तो प्रधानमंत्री मोदी ने मैली गंगा में स्नान कर गंदे पानी से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।

अखिलेश यादव ने उन लाखोंं हिन्दुओें का भी अपमान किया है, जो सावन में सोमवार को गंगा में स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। दशाश्वमेध घाट और शितला घाट से लेकर बाबा विश्वनाथ मंदिर तक चारों तरफ शिव भक्तों का हुजूम लग जाता है। हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए शिवभक्त बाबा की झांकी का दर्शन करते हैं और उन्हें अरघे से जल अर्पित कर अपनी मनोकामना के सफल होने की प्रार्थना करते नजर आते हैं। 

गंगा दशहरा के मौके पर देश के विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान करने को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए जुटने लगते हैं। करोड़ों की संख्या में महिला-पुरुष गंगा में स्नान करते हैं। आस्था के आगे गंगा के मैली होने का भाव भी खत्म हो जाता है। जय जय गंगे के जयघोष से गंगा में डुबकी लगाते हैं।

कुंभ के अवसर पर प्रयागराज में प्रतिदिन करोड़ों की संख्या लोग संगम में स्नान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि शुभ अवसर पर गंगा में स्नान करने से अनेक पुण्य फल मिलते है। कुंभ में किए गए एक स्नान का फल कार्तिक मास में किए गए हजार स्नान, माघ मास में किए गए सौ स्नान व वैशाख मास में नर्मदा में किए गए करोड़ों स्नानों के बराबर होता है। हजारों अश्वमेघ, सौ वाजपेय यज्ञों तथा एक लाख बार पृथ्वी की परिक्रमा करने से जो पुण्य मिलता है, वह कुंभ में एक स्नान करने से प्राप्त हो जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गंगा मैली है तो सावन के सोमवार, गंगा दशहरा और कुंभ के अवसर पर करोड़ों लोग क्यों स्नान करते हैं ? क्या सेक्युलर पार्टियां इस तरह हिन्दुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करती रहेंगी ?

 

 

 

 

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