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यूपी के नतीजों से पहले ही अखिलेश का ईवीएम रोना शुरू, ईवीएम को इधर-उधर करने के मनगढ़ंत आरोप, सपा कार्यकर्ताओं का हंगामा, आयोग ने कहा ईवीएम सीलबंद और सुरक्षित

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पांच राज्यों में हुए चुनावों के परिणाम गुरुवार को आएंगे। उससे पहले सोमवार को आए एग्जिट पोल में ज्यादातर ने यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी को बढ़त और पंजाब में त्रिशंकु सरकार बनने का अनुमान जताया है। यूपी में योगी सरकार की वापसी के संकेत के साथ ही ईवीएम पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। संभावित हार का ठीकरा फोड़ने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर ईवीएम को चुना है। चुनाव के नतीजों का दिन जैसे-जैसे नजदीक आता है ईवीएम पर सवाल उठने शुरू हो जाते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था उस वक्त भी ईवीएम हैकिंग के आरोप लगाए गए थे। लेकिन जब चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को ईवीएम हैक करने की चुनौती दी तो कोई सामने नहीं आया था।

अखिलेश यादव ने वाराणसी में गाड़ियों से ईवीएम की मूवमेंट का मुद्दा उठाया
करीब-करीब सभी एग्जिट पोल में बीजेपी की योगी सरकार को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। इनमें यूपी की 403 में से बीजेपी को 220 से 275 सीटें मिलने का और सपा को 100 से 150 सीटें मिलने का आंकलन है। इस संभावित हार की बौखलाहट समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव पर अभी से नजर आने लगी है। हार की जिम्मेदारी किसी पर डालने की परिपाटी के चलते यादव ने वाराणसी में गाड़ियों से ईवीएम की मूवमेंट का मुद्दा उठाया है। उन्होंने एक तरह से हार मानते हुए कहा कि भाजपा को जिताने के लिए प्रशासन वोट चुराने में लगा हुआ है। यह लोकतंत्र का आखिरी चुनाव है, जिसके बाद लोगों को क्रांति करनी होगी।

 

ईवीएम से चुनाव में धांधली के आरोप में सपा कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि चुनाव में धांधली की कोशिश की जा रही है। बात सिर्फ बनारस की नहीं है। समाजवादी पार्टी ने नतीजों से पहले ही ईवीएम की सुरक्षा को लेकर यूपी के कई जिलों में हंगामा करना शुरू कर दिया है। ईवीएम से छेड़छाड़ या अदला-बदली के मनगढ़ंत आरोपों पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में प्रदर्शन किया है। वाराणसी, अलीगढ़, सोनभद्र, बदायूं, बरेली, आगरा, मेरठ समेत कई 20 जिलों में सपा प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने स्ट्रांग रूम की निगरानी कर रहे हैं।

संभावित हार देखकर भड़के अखिलेश, आयोग ने आरोपों को गलत बताया
भाजपा ने अखिलेश के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि उनकी हार को देखकर अखिलेश यादव भड़क गए हैं, जिससे वह ईवीएम पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। इस बीच चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा है कि वाराणसी में गाड़ी से बरामद की गई ईवीएम मशीनें अधिकारियों के लिए मतगणना की ट्रेनिंग के मकसद से लाई गई थीं। चुनाव आयोग ने कहा कि इन मशीनों का मतदान में इस्तेमाल नहीं किया गया। दरअसल, अक्सर देखा गया है कि जब राजनीतिक दल चुनाव हारते हैं तो वह सबसे पहले हार का ठीकरा ईवीएम पर ही फोड़ते हैं।

बीजेपी की रिकॉर्ड मतों से जीत पर भी कांग्रेस और आप ने ईवीएम पर की शंका
बीजेपी जब 2014 में रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीती, तो असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने ईवीएम पर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा की जीत ईवीएम की वजह से हुई है। ईवीएम पर सवाल उठाने वालों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तो 2017 में चुनाव आयोग के खिलाफ ऐसा बिगुल फूंका कि केजरीवाल के विधायक सौरभ भारद्वाज ने खुलेआम ईवीएम को हैक करने का डेमो तक कर डाला। भारद्वाज ने सदन में बताया कैसे 5-स्टेप में ईवीएम को हैक किया जा सकता है।

पिछला चुनाव हारने के बाद भी सपा-बसपा ने ईवीएम पर आरोप लगाए
2017 में हुए विधानसभा चुनावों में हार का मुंह देखने वाली बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी ईवीएम पर ही आरोप लगाया था। मायावती ने एक बयान में कहा था कि भाजपा की जीत सिर्फ ईवीएम में हुई छेड़खानी की वजह से हुई है। मायावती के साथ-साथ अखिलेश यादव ने भी ईवीएम पर ही आरोप लगाए थे कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के चलते ईवीएम में छेड़खानी हुई नतीजतन उनकी पार्टी चुनाव हार गई। इसी प्रकार 2017 में हुए गुजरात चुनाव के नतीजों से पहले ही विपक्षों दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ का मुद्दा जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया था। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से लेकर गुजरात कांग्रेस के नेता पहले ही कहने लगे कि अगर भाजपा ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं करती है तो गुजरात में कांग्रेस की जीत पक्की है।

आयोग ने 2017 में ईवीएम हैक करने की खुली चुनौती दी थी
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, चुनाव आयोग ने 2017 के मई में राजनीतिक दलों को अपने दावे को साबित करने और ईवीएम को हैक करने के लिए खुली चुनौती दी। आयोग ने 12 मई को ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को खुली चुनौती में शामिल होने के लिए तीन जून को आमंत्रित किया था। चुनाव आयोग ने खुला चैलेंज दिया कि मई के पहले हफ्ते से लेकर 10 मई के बीच कोई भी उनकी इन मशीनों को हैक करके दिखाए।

एनसीपी और सीपीएम आगे आए पर ईवीएम को हैक करने में अक्षम रहे
आयोग ने यह भी कहा कि यह चुनौती एक हफ्ते या 10 दिन के लिए रहेगी और इसमें विभिन्न स्तर होंगे। इस दौरान ईवीएम में टैंपरिंग करने के साथ इन मशीनों को खोलकर उसमें भी छेड़छाड़ करने की चुनौती दी। इसके लिए आयोग ने पांच राज्यों के 12 विधानसभा क्षेत्रों में इस्तेमाल की गयी 14 मशीनों को हैक करने के लिए तैयारी रखा था। लेकिन आयोग की इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए ज्यादातर दल तैयार ही नहीं हुए। 3 जून को आयोजित होने वाली चुनौती को स्वीकार करने के लिए 26 मई की निर्धारित समय सीमा तक सिर्फ दो दलों एनसीपी और सीपीएम ने आवेदन किया था। इन दलों के प्रतिनिधि तय समय पर चुनाव आयोग पहुंचे लेकिन उन्होंने ईवीएम को हैक करने में अपनी अक्षमता जाहिर की।

 

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