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गहलोत सरकार ने लगाई इंटरनेट इमरजेंसी, उधर अजमेर में ‘सिर कलम’ करने का आह्वान, नफरती भाषण देने पर मौलवी समेत तीन लोग गिरफ्तार, गौहर चिश्ती फरार

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राजस्थान में नफरत फैलाने वाले असमाजिक तत्व अपनी करतूतों को बाज नहीं आ रहे हैं। उदयपुर में तालिबानी मर्डर और नफरती लावा उगलने के बीच अब अजमेर से भी नफरती भाषण देने की खबर आ रही है। ख्वाजा की नगरी अजमेर में ‘सिर कलम’ करने का आह्वान का मामला सामने आया है। यह अजब संयोग है कि मौलवी समेत तीन लोगों द्वारा यह आह्वान उसी दिन (17 जून) को किया गया, जिस दिन रियाज मोहम्मद ने उदयपुर में हत्या करने के नापाक इरादों का वीडियो बनाया था। पुलिस ने नफरती भाषण के आरोप में एक मौलवी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें इन लोगों ने पैगंबर के कथित अपमान का बदला लेने के लिए सिर कलम करने का आह्वान किया था। अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार लोगों की उदयपुर हत्याकांड से जुड़ाव की जांच की जा रही है।

बर्बर मर्डर के बाद गहलोत ने इंटरनेट इमरजेंसी लगाकर लोगों का मौलिक अधिकार छीना
उदयपुर के टेलर कन्हैयालाल के बर्बर मर्डर में भले ही राजस्थान सरकार ने उदयपुर के एसपी और आईजी रेंज को हटा दिया हो, लेकिन लोगों का गुस्सा कायम है और तीसरे दिन शुक्रवार को भी विरोध में अलग-अलग शहरों में बंद का आह्वान किया गया है। एक और बंदी सरकार ने भी की है। गहलोत सरकार ने पिछले चार दिन से उदयपुर मर्डर के बाद राजस्थान में इंटरनेट बैन कर दिया है। यानि इंटरनेट इमरजेंसी लगा दी है। एक इमरजेंसी 1975 में इंदिरा गांधी सरकार ने भी लगाई थी। अब गहलोत सरकार ने इंटरनेट इमरजेंसी लगाकर लोगों का मौलिक अधिकार ही छीन लिया है। 1975 में कोई सरकार के खिलाफ लिख-बोल नहीं सकता था। आम आदमी के सारे अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। अब 47 साल बाद राजस्थान में वैसा ही माहौल है। उदयपुर मामले में पुलिस का फेल्योर सामने आ चुका है, लेकिन उसकी सजा आम लोगों को इंटरनेट बंद करके दी जा रही है। पिछले दो दिन से करोड़ों राजस्थानियों के नेटबंदी के नाम पर सरकार ने मौलिक अधिकार छीन लिए हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उदयपुर के दोनों ‘आतंकियों’ के खिलाफ आक्रोष, अजमेर में भी भाषण में नफरती नारे
कन्हैया के हत्यारे दोनों आतंकियों को उदयपुर कोर्ट में पेश करने के दौरान लोगों में काफी रोष देखा गया। इस बीच सिर तन से जुदा जैसा नफरती भाषण का मामला अजमेर में सामने आया है। अजमेर पुलिस को शक है कि 17 जून को अजमेर दरगाह के मुख्य प्रवेश द्वार से दिए गए नफरती भाषण से उकसावे में आकर दो लोगों ने मंगलवार को उदयपुर में एक दर्जी की हत्या कर दी थी। सूत्रों ने बताया कि दर्जी की हत्या के बाद दोनों आरोपियों मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने वही नारे (गुस्ताखे-ए-नबी की एक ही सजी, सर तन से जुदा) लगाए जो उस दिन नफरती भाषण के दौरान लगाए गए थे। पुलिस ने ऐसे लोगों को पकड़ा है। दरगाह थाने के एसएचओ दलवीर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार लोगों की पहचान मौलवी फकर जमाली, रियाज और ताजिम के रूप में हुई, जिन्हें नफरती भाषण देने का आरोप में रात में पकड़ा गया।

नुपूर शर्मा के खिलाफ अजमेर रैली में पैगंबर के अपमान का बदला लेने का आह्वान
उल्लेखनीय है कि भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नुपुर शर्मा की पैगंबर के खिलाफ कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में 17 जून को रैली निकाली गई थी। रैली शुरू होने से कुछ समय पहले, गौहर और अन्य लोगों ने सभा को संबोधित किया और कथित तौर पर पैगंबर के अपमान का बदला लेने का आह्वान किया था। बाद में उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की निर्मम हत्या कर दी गई। उस पर भी नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट डालने का आरोप है।

उदयपुर के ‘आतंकियों’ को उकसाने में चारों आरोपियों की भूमिका की भी होगी जांच
अजमेर के पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने कहा कि नफरती भाषण देने के मामले में मुख्य आरोपी गौहर चिश्ती फरार है और उसकी तलाश जारी है। इसके लिए कई जगह दबिश दी गई है। एचएचओ सिंह ने कहा, ‘‘अजमेर दरगाह के निजाग गेट से दिए गए नफरती भाषण के दौरान वे (आरोपी) भी गौहर चिश्ती के साथ मौजूद था।’’ एक अन्य पुलिस अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि उदयपुर में हुई दर्जी की हत्या के मामले के आरोपियों को उकसाने में इन चारों की कितनी भूमिका थी ?

अब ये हाल…कन्हैया की बर्बर हत्या करनेवाले आतकिंयों का !!

 

 

 

 

 

 

 

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