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चीन को सबक सिखाने के लिए वायुसेना को जल्द मिलेंगे पांच और राफेल विमान, पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए होंगे तैनात

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भारत-चीन सीमा पर टकराव जारी है। कई दौर की बातचीत के बाद भी चीन अपने जिद पर अड़ा हुआ है। ऐसे में मोदी सरकार ने देश की सीमाओं की रक्षा और चीन को सबक सिखाने के लिए कोई कमी नहीं रखना चाहती है। इसी लिए सरकार ने फ्रांस से पांच और राफेल लड़ाकू विमानों को भारत लाने में तेजी दिखाई है। फ्रांस ने इन्हें भारतीय अधिकारयों को सौंप दिया है और जल्द ही स्वदेश लाया जाएगा। अक्टूबर में इस दूसरी खेप के भारत पहुंचने की उम्मीद है।

फ्रांस से राफेल की दूसरी खेप आने के बाद इन्हें पश्चिम बंगाल के कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया जाएगा। चीन से लगती पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए 4.5 फोर्थ जेनरेशन के इस फाइटर जेट को बंगाल में तैनात किया जाएगा ताकि चीन कोई चाल ना चल सके। वहीं लद्दाख में चीन से जारी तनाव के बीच राफेल लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सरहदों की निगरानी कर रहा है। अत्याधुनिक हथियारों से लैस राफेल ने एलएसी पर चीन के हर हौसले को पस्त कर दिया है।

इन पांच विमानों के भारत आने के बाद वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की कुल संख्या 10 हो जाएगी। राफेल की पहली खेप को आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है। जुलाई महीने में मिली 5 शुरुआती राफेल को अंबाला के एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात किया गया। राफेल फाइटर जेट को उड़ाने का जिम्मा वायुसेना में 17 गोल्डन एरो स्क्वाड्रन को दिया गया है।

राफेल का ये दशावतार इसीलिए भी महत्वपूर्ण है कि क्योंकि राफेल एक बार एयरबेस से उड़ान भरने के बाद 100 किलोमीटर के दायरे में 40 टारगेट एक साथ भेद सकता है। यानि भारतीय सीमा हर तरीके से सुरक्षित हो जाएगी। यानि चीन और पाकिस्तान दोनों की हर हरकत और हर चालबाजी राफेल का ये दशावतार खत्म कर देगा।

राफेल फाइटर जेट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि बिना दुश्मन देश की सीमा में प्रवेश किए चीन और पाकिस्तान में यह 600 किलोमीटर दूर तक के टारगेट को आसानी से तबाह कर सकता है। इस फाइटर जेट में बिना धरती पर उतरे हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है। एयर स्ट्राइक के लिए इसे बेहद जबरदस्त माना जाता है।

 

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