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सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम के 5 साल, 22 करोड़ 31 लाख किसान हुए लाभान्वित

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किसान देश की जीवन रेखा हैं और किसी भी देश का विकास उसके कृषि क्षेत्र के विकास के बिना अधूरा है। 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए मोदी सरकार संकल्पित है। किसानों को फसल की लागत कम करने, उन्हें उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने और उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। किसानो के कल्याण को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सुरतगढ़ से सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम की शुरूआत की थी। 

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम से 17 फरवरी 2020 तक 22.31 करोड़ किसान लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें इस योजना से पैदावार बढ़ाने में जबरदस्त मदद मिली है। इस योजना के तहत मिट्टी की टेस्टिंग के लिए 10,845 प्रयोगशालाएं मंजूर की गईं हैं, जो 2009 से 2014 तक मंजूर 171 लैब से 63 गुना अधिक हैं।

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम पर 2009 से 2014 के बीच 93.92 करोड़ रुपये का बजट था, जबकि 2014 से 2020 तक इसके लिए 1122 करोड़ रुपये के बजट का प्रवाधान किया गया है। साथ ही मिट्टी परीक्षण की क्षमता सालाना 1.78 करोड़ सैंपल से बढ़कर 3.33 करोड़ सैंपल हुई है। सॉयल हेल्थ कार्ड से खेतों की उपज बढ़ाने और लागात घटाने में मदद मिली है।

क्या है सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम ?

सॉयल हेल्थ कार्ड में सॉयल हेल्थ सुधार और उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पोषक तत्वों की उचित मात्रा की जानकारी के साथ खेतों की पोषण स्थिति पर किसानों को सूचना दी जाती है। सॉयल हेल्थ कार्ड एक तरह की ​प्रिंटेड रिपोर्ट होती है, जिसे किसान के हर एक जोतों के लिए दिया जाता है। इसमें मिट्टी के 12 पैरामीटर्स जैसे NPK, सल्फर, जिंक, फेरस, कॉपर, मैगनिशियम आदि के बारे में जानकारी दी जाती है।

सॉयल हेल्थ कार्ड का मकसद

इस स्कीम का मकसद है कि किसान अपनी खेती के स्वास्थ्य के हिसाब से उसमें उर्वरक डाले। इससे खादों का अंधाधुंध इस्तेमाल बंद होगा, जिससे लागत कम आएगी, फसल जहरीली नहीं होगी और उत्पादकता बढ़ेगी। देश में मोदी सरकार आने के बाद इस तरफ ज्यादा ध्यान दिया ताकि जैसे लोग अपनी सेहत का टेस्ट करवाते हैं वैसे ही धरती की भी कराएं। 

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