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भारत में बना 105वां यूनिकॉर्न, वर्ष 2022 में अब तक 20 कंपनियां इस क्लब में शामिल, जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन रहे युवा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार नया-नया मुकाम हासिल कर रहा है। जिस तरह सरकार स्टार्टअप सेक्टर को सुविधाएं और प्रोत्साहन दे रही है, उससे देश में यूनिकॉर्न बनने वाले स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि का ही कमाल है कि स्टार्ट-अप्स की दुनिया में झंडे गाड़ने के बाद भारत अब उभरते यूनिकॉर्न का ‘बादशाह’ बनने की ओर बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया योजना की पहल की थी, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि भारत इतनी जल्दी इस बुलंदी पर पहुंच जाएगा। मोदी सरकार के लगातार प्रोत्साहन मिलने के कारण भारत के नित-नए यूनिकॉर्न स्टार्टअप दुनिया में निरंतर नया मुकाम हासिल करते जा रहे हैं। भारत में अब यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। खास बात यह है कि इन 105 यूनिकॉर्न में से 60 से अधिक पिछले दो सालों में ही बने हैं। पीएम मोदी की प्रेरणा से भारत के उद्यमशील युवा अब तेजी से जॉंब सीकर की बजाय जॉब क्रिएटर बन रहे हैं।

भारत के स्टार्टअप्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है। अमेरिका और चीन के बाद भारत को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े इकोसिस्टम के रूप में देखा जा रहा है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। पिछले साल देश को 44 यूनिकॉर्न मिले थे और इस साल अब तक 20 यूनिकॉर्न मिल चुके हैं। महामारी के चलते लोगों के जीवन की उपयोगिता और रहन-सहन में आए अन-देखे बदलावों ने दुनिया भर में अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन बन चुकी स्टार्ट-अप कंपनियों की तरक़्क़ी को रफ़्तार दी है। भारत में यूनिकॉर्न की लहर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है। देश में यूनिकॉर्न की संख्या 105 हो गई है। आज वैश्विक स्तर पर हर 10 में से 1 यूनिकॉर्न का उदय भारत में हो रहा है। भारत में 5 मई 2022 तक 100 यूनिकॉर्न थे जिनका कुल मूल्‍यांकन 332.7 अरब डॉलर था। भारत में उद्यमशीलता की भावना देश के कोने-कोने में मौजूद है। सभी 36 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 647 जिलों में स्टार्टअप के प्रसार से यह बिल्‍कुल स्पष्ट है। घरेलू स्टार्टअप परिवेश आत्मनिर्भरता के मिशन की दिशा में प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। आत्‍मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण स्टार्टअप परिवेश में गहराई से निहित है और वह आगामी वर्षों में भी जारी रहेगी।

भारत का 105वां यूनिकॉर्न बना 5ire

पांचवीं पीढ़ी के ब्लॉकचेन 5ire ने सीरीज़ ए फंडिंग राउंड में यूके स्थित SRAM और MRAM ग्रुप से $100 मिलियन (करीब ₹798 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इसके साथ ही 5ire भारत का 105वां और 2022 में अब तक का 20वां यूनिकॉर्न बन गया है। फंडिंग के बाद 5ire की वैल्यूएशन $1.5 बिलियन के पार पहुंच गई है। फर्म ने कहा कि निवेश ने इसे भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्लॉकचैन यूनिकॉर्न बना दिया है। जुटाए गए धन का उपयोग व्यापार के विस्तार और एशिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप सहित तीन महाद्वीपों में भारत के संचालन के केंद्र और 5ire का विस्तार करने के लिए किया जाएगा।

अगस्त 2021 में हुई थी इस स्टार्टअप की स्थापना

कंपनी ने एक बयान में कहा कि 5ire अपने ब्लॉकचेन को और मजबूत करने के लिए निवेश करना जारी रखेगी और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी कि यह विकेन्द्रीकृत तकनीक वैश्विक स्तर पर बड़े आधार को लाभ पहुंचाए। स्टार्टअप के 70% कर्मचारी भारत से बाहर के हैं। यह वर्तमान में अपने कर्मचारियों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 150 करने की योजना बना रहा है। स्टार्टअप की स्थापना भारतीय मूल के उद्यमियों प्रतीक गौरी और प्रतीक द्विवेदी ने अगस्त 2021 में वेब 3 फाइनेंसर विल्मा मटिला के साथ की थी।

5ire संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध

SRAM और MRAM ग्रुप के अध्यक्ष डॉ शैलेश लाचू हीरानंदानी ने कहा, “हमें टिकाऊ प्रौद्योगिकियों में निवेश के साथ आगे बढ़ने पर बहुत भरोसा है। एक वैज्ञानिक के रूप में मैंने हमेशा बेहतर तरीके खोजने में विश्वास किया है और 5ire संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों के समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है। हम 5ire में नेतृत्व टीम की क्षमताओं में आश्वस्त हैं और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। 5ire के सीईओ और संस्थापक प्रतीक गौरी ने कहा, “हम ब्लॉकचेन में स्थिरता को एम्बेड करने और मौजूदा प्रतिमान को ‘फॉर-प्रॉफिट’ से ‘फॉर-बेनिफिट’ में बदलने के मिशन पर हैं। 5ire टीम ने एक ऐसा मंच विकसित करने के लिए चौबीसों घंटे काम किया है जो मानव जाति के लाभ के लिए प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं दोनों को जोड़ती है। केवल 11 महीनों में भारत से पैदा हुआ दुनिया का पहला और एकमात्र यूनिकॉर्न बनना इस बात का प्रमाण है कि हम सही रास्ते पर हैं। 5ire’s ने इससे पहले पिछले अक्टूबर में 110 मिलियन डॉलर के मूल्यांकन पर अपने सीड राउंड में 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई थी, जिसमें अल्फाबिट, मार्शलैंड कैपिटल, लॉन्चपूल लैब्स और मूनरॉक कैपिटल जैसे निजी और संस्थागत दोनों निवेशकों की भागीदारी थी।

फिनटेक स्टार्टअप OneCard बना था भारत का 104वां यूनिकॉर्न

पुणे स्थित फिनटेक स्टार्टअप OneCard भारत में 104वां यूनिकॉर्न बनी थी। Sliceके बाद क्रेडिट कार्ड चैलेंजर स्पेस में यह दूसरा यूनिकॉर्न है। रूपेश कुमार, अनुराग सिन्हा और विभव हाथी ने मिलकर 2019 में FPL Technologies के तहत OneCard की शुरुआत की थी। OneCard पहली बार क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को क्रेडिट स्कोर बनाने के लिए एक वर्चुअल, सेलफोन-बेस्ड कार्ड प्रोवाइड करता है। यह 3,000 रुपये और उससे अधिक की खरीद के लिए EMI की सुविधा भी देता है। स्टार्टअप OneScore नामक एक क्रेडिट स्कोर ट्रैकिंग और क्रेडिट मैनेजमेंट ऐप भी चलाती है। इस स्टार्टअप के लिए ताजा फंडिंग ऐसे समय में आई है जब buy now pay later (BNPL) प्लेटफॉर्म्स पर संभावनाओं के काले बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने आदेश में प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट प्रोवाइडर्स को नॉन-बैंक क्रेडिट लाइन ऑफर करने से रोक दिया है। OneCard के प्रतिस्पर्धियों में Slice, Karbon Card, Uni Card, और Kodo Card शामिल हैं। फिनटेक इंडस्ट्री अभी भी निवेशकों के बीच पसंदीदा हैं। इस इंडस्ट्री ने 2022 की पहली छमाही में 159 डील में 3.4 अरब डॉलर जुटाए हैं।

बैंकिंग प्लेटफॉर्म ‘ओपन’ बना था 100वां यूनिकॉर्न

स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई) के लिए नियो बैंकिंग प्लेटफॉर्म ‘ओपन’ ने मई 2022 में आईआईएफएल की अगुवाई वाले फंडिंग राउंड में 5 करोड़ डॉलर जुटाकर 1 अरब डॉलर से अधिक का बाजार मूल्यांकन हासिल कर लिया। इसके साथ ही ओपन भारत की 100वीं यूनिकॉर्न बन गई। ओपन ने यह कारनामा सीरीज डी फंडिंग राउंड में किया। इसमें आईआईएफएल के अलावा मौजूदा निवेशक टेमासेक, टाइगर ग्लोबल और 3वन4 कैपिटल ने हिस्सा लिया है। 6 महीने पहले कंपनी ने गूगल, टेमासेक, वीजा और जापान के सॉफ्टबैंक के नेतृत्व में 10 करोड़ डॉलर जुटाए थे तब कंपनी का मूल्यांकन 50 करोड़ डॉलर हो गया था। कंपनी की स्थापना अनीश अच्युथन, माबेल चाको, अजेश अच्युथन व डीना जैकब ने 2017 में की थी। इसका कारोबार छोटे व मध्यम आकार के व्यवसायों को चालू खाता प्रदान करने पर केंद्रित है। इस खाते में डिजिटल बैंकिंग, भुगतान, चालान और स्वचालित बहीखाता जैसी सेवाएं शामिल हैं। ओपन उन कुछ स्टार्टअप्स में से है जिनके संस्थापकों में 2 महिलाएं शामिल हैं।

नियो बैंक का कामकाज 100 प्रतिशत डिजिटल

नियो बैंक का कामकाज 100 प्रतिशत डिजिटल होता है। इसकी कोई ब्रांच नहीं होती है। हर काम एप के जरिये होता है। नियो बैंक हर ऐसी बैंकिंग सुविधाएं देते हैं जो परंपरागत बैंक में मिलती है। भारत में करीब एक दर्जन नियो बैंक हैं। इनमें रेजरपेएक्स, ओपन, नियो शामिल हैं। भारत में अभी तक भारतीय रिजर्व बैंक ने नियो बैंक को लाइसेंस नहीं दिया है। इस वजह से ये बैंक परंपरागत बैंकों के साथ मिलकर बैंकिंग सेवाएं देते हैं। इस मामले में आइसीआइसीआइ बैंक सबसे आगे है।

जनवरी 2016 में हुई थी स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत

स्टार्टअप इंडिया अभियान के शुभारंभ यानी 16 जनवरी 2016 के बाद से 2 मई 2022 तक देश में 69,000 से ज्यादा स्टार्टअप को मान्यता दी गई है। खास बात ये है कि भारत में इनोवेशन सिर्फ कुछ सेक्टर तक ही सीमित नहीं है। आईटी सेक्टर में 13 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान से 9 प्रतिशत, शिक्षा 7 प्रतिशत, पेशेवर एवं वाणिज्यिक सेवाओं से 5 प्रतिशत, कृषि 5 प्रतिशत और खाद्य एवं पेय पदार्थों से 5 प्रतिशत के साथ 56 विविध क्षेत्रों में समस्याओं को हल करने वाले स्टार्टअप को मान्यता दी गई है।

तेजी से बढ़ी यूनिकॉर्न की संख्या

प्रत्येक स्टार्टअप के लिए यूनिकॉर्न बनने की अपनी अनूठी यात्रा होती है, लेकिन भारत में स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनने के लिए मिनिमम समय 6 महीने और अधिकतम 26 साल है। वित्त वर्ष 2016-17 तक हर साल लगभग एक यूनिकॉर्न तैयार होता था वहीं पिछले चार वर्षों में (वित्त वर्ष 2017-18 के बाद से) यह संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर साल अतिरिक्त यूनिकॉर्न की संख्या में सालाना 66 प्रशित की वृद्धि हो रही है।

पहले यूनिकॉर्न बनने में 14 साल लगे

वेंचर कैपिटल फंड ओरियोस वेंचर पार्टनर (Orios Venture Partners) की इंडियन टेक यूनिकॉर्न रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, एक स्टार्टअप बनने के लिए आठ साल की औसत समय अवधि अब कम हो रही है। इसकी वजह वैश्विक निवेश की उपलब्धता और सुलभ पूंजी उपलब्धता है। 2005 से पहले Naukri.com, MakeMyTrip की स्थापना की गई थी, जिसे यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करने में 14 साल लगे। जबकि, Zomato, Flipkart और Policy Bazaar को लगभग 8.7 साल लगे। Nykaa और Oyo ने 5.8 वर्षों से भी कम समय लिया है। Udaan और Ola Electric को केवल तीन साल का समय लगा है।

सबसे ज्यादा फाइनेंसियल सेक्टर के स्टार्टअप्स को फायदा

वित्तीय भुगतान क्षेत्र यानी फाइनेंसियल सेक्टर में काम करने वाले स्टार्टअप्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। इसके बाद रिटेल और सास (सेवा के रूप में सॉफ्टवेयर) का नंबर आता है। अन्य वर्टिकल में लॉजिस्टिक्स, डेटा एनालिटिक्स, ट्रैवल, फूड और गेमिंग वाले स्टार्टअप शामिल हैं।

बेंगलुरु को पछाड़ कर दिल्ली बनी स्टार्टअप्स राजधानी

बेंगलुरु को पिछले कई सालों से भारत का स्टार्टअप कैपिटल कहा जाता रहा है। लेकिन इस साल के इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक भारत की राजधानी दिल्ली ने बेंगलुरु से ये तमगा छीन लिया। अप्रैल 2019 और दिसंबर 2021 के बीच बेंगलुरु में 4,514 नए स्टार्टअप बने, जबकि दिल्ली में 5,000 से भी अधिक स्टार्टअप शुरू किए गए। इससे पहले 41% यूनिकॉर्न भारत की स्टार्टअप राजधानी बेंगलुरु से आते थे। इसके बाद दिल्ली में 34% और मुंबई में 14% स्टार्टअप्स थे।

पेटेंट आवेदनों में हुई जबरदस्त वृद्धि 

इकोनोमिक सर्वे के मुताबिक, भारत में दायर पेटेंट की संख्या भी 2016-17 के 45,444 से बढ़कर 2020-21 में 58,502 हो गई। इसी तरह देश में दिए गए पेटेंट की संख्या भी 9,847 से बढ़कर 28,391 हो गई। खास बात यह है कि इस बार मल्टीनेशनल कंपनियों के बजाय भारतीयों की तरफ से पेटेंट आवेदनों की संख्या में तेजी से आ रही है। कुल आवेदनों में भारतीय निवासियों की हिस्सेदारी 2010-11 में 20 प्रतिशत थी। 2016-17 में यह बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत हुई और 2020-21 में यह 40 प्रतिशत हो गई है।

यूनिकॉर्न के मामले में भारत तीसरे पायदान पर

यूनिकॉर्न के मामले में इस वक़्त भारत, अमेरिका की 487 और चीन की 301 के बाद दुनिया में तीसरी पायदान पर है। भारत ने इस मामले में ब्रिटेन, इज़राइल, सिंगापुर, जर्मनी और अन्य देशों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। 53 यूनिकॉर्न के साथ इज़राइल, भारत के बाद चौथे स्थान पर है।

2021 में स्टार्ट-अप कंपनियों ने 42 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई

2021 का साल भारत के तकनीकी इकोसिस्टम के लिए सच में मील का पत्थर साबित हुआ है। इस एक साल के दौरान भारत की स्टार्ट-अप कंपनियों ने 1583 सौदों के ज़रिए 42 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई। ये साल बाज़ार से बाहर जाने, विलय और ख़रीद और IPO का भी साल रहा है। इस साल तकनीक के कारोबार की दुनिया से बाहर जाने वालों के लिहाज़ से भी रिकॉर्ड बना और 17.4 अरब डॉलर की रक़म वापस की गई, जो 2020 में लौटाई गई रक़म (84.3 करोड़ डॉलर) से 20 गुना अधिक थी।

2021 में 11 स्टार्ट-अप कंपनियों ने अपने IPO पेश किए

वर्ष 2021 में 11 स्टार्ट-अप कंपनियों ने अपने IPO के ज़रिए 7.3 अरब डॉलर की रक़म जुटाई। इनमें से ज़्यादातर में ख़ुदरा निवेशकों ने कई गुना ज़्यादा निवेश किया। भारत की सॉफ्टवेयर उत्पाद कंपनी फ्रेशवर्क्स ने ख़ुद को ज़ोरदार स्वागत के बीच अमेरिका के शेयर बाज़ार नैस्डैक में लिस्ट कराया। फ्रेशवर्क्स, 20 साल पहले लिस्ट हुई इन्फोसिस के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार में लिस्ट होने वाली दूसरी भारतीय कंपनी है।

स्टार्टअप कंपनियों से 35 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा

पूर्वानुमान ये संकेत देते हैं कि वर्ष 2025 तक भारत में एक लाख से ज़्यादा स्टार्टअप कंपनियां होंगी जिनमें 35 लाख से अधिक लोग काम कर रहे होंगे और इनमें से 200 से ज़्यादा यूनिकॉर्न होंगी; जिनका कुल बाज़ार मूल्य एक ख़रब डॉलर के क़रीब होगा। जो कंपनियां आगे चलकर यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल करेंगी और फिर ख़ुद को शेयर बाज़ार में लिस्ट करेंगी जिससे उनका कारोबार और दायरा भी बढ़ेगा।

देश में अपने ग्राहकों के लिए चीजों को आसान बना रहे हैं 62 प्रतिशत यूनिकॉर्न

करीब 62 प्रतिशत यूनिकॉर्न बिजनेस टू कंज्युमर (बी2सी) कंपनियां हैं। उनका लक्ष्य अपने ग्राहकों के लिए चीजों को आसान बनाना और दैनिक जीवन का हिस्सा बनना होता है। चीजों को किफायती रखना, स्टार्ट-अप की एक और अहम खासियत है। यूनिकॉर्न में एक और आम ट्रेंड यह है कि उनका बिजनेस मॉडल अमूमन टेक्नोलॉजी पर ही चलता है। उदाहरण के लिए, डिजिट ने ऐप के जरिए इंश्योरेंस की सुविधा दी। अर्बन कंपनी ने भारत में हैंडीमैन हायरिंग (छोटी-मोटी चीजों की मरम्मत करने आदि) के लिए ऐप डेवलप किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम

अगर कारोबार की भाषा में कहें तो जैसे-जैसे तकनीकी समाधान मुख्यधारा में आए, तो भारत में इंटरनेट की उपलब्धता का बाज़ार साल 2021 में बड़ी तेज़ी से बढ़ा और देश भर में ग्राहकों ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाया। वहीं भारत में कारोबार की मुख्यधारा ने अपनी गतिविधियों को मज़बूत किया और एक आत्मनिर्भर भारत की ओर क़दम बढ़ाने में सहयोग दिया। आज देश में 44 करोड़ मिलेनियल्स हैं। ऐसे में इंटरनेट के ग्राहकों की संभावनाएं पिछले तमाम आकलनों से कहीं ज़्यादा हैं। आज 83 करोड़ से ज़्यादा भारतीय इंटरनेट के उपभोक्ता हैं।

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