भारत का आर्थिक इतिहास कई मोड़ों से गुजरा है, किंतु बीते एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जिस परिवर्तन ने देश की दिशा और दृष्टि दोनों बदली हैं, उसका नाम है—स्टार्टअप आंदोलन। यह परिवर्तन न तो आकस्मिक है और न ही केवल बाजार की दे है। इसके पीछे स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति, दीर्घकालिक सोच और नीतिगत स्थिरता रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई स्टार्टअप इंडिया पहल आज भारत को वैश्विक नवाचार मानचित्र पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित कर चुकी है। 2014 से पहले देश में पांच सौ स्टार्टअप भी नहीं थे, लेकिन बीते एक दशक में इनकी संख्या लाखों में हो चुकी है। यही नहीं कुछ स्टार्टअप को यूनीकॉर्न भी बन चुके हैं। आज (16 जनवरी) स्टार्टअप दिवस के मौके पर इस क्रांतिकारी परिवर्तन के बारे में जानना प्रासंगिक होगा। ताजा आंकड़े इस बदलाव की गहराई से पड़ताल करते हैं। पिछले साल 2025 में देश में औसतन हर दिन 136 नए स्टार्टअप शुरू हुए हैं। भारत स्टार्टअप इंडिया से एंटरप्रेन्योरियल भारत की ओर बढ़ रहा है। द इंडस एंटरप्रेन्योर्स की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले सालों में स्टार्टअप्स जीडीपी में 15 प्रतिशत का योगदान दे सकती है।
देश में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या 2.09 लाख के पार पहुंची
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत में स्टार्टअप बंद होने की दर दुनिया में सबसे कम मानी जा रही है। यह केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी पर उस भरोसे का संकेत है जो नीति, बाज़ार और उद्यमियों के बीच बना है। पिछले एक साल में ही 50 हजार से अधिक नए स्टार्टअप शुरू हुए हैं। इतना ही नहीं देश में कुल पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या 2.09 लाख के पार पहुंच गई है। काबिले जिक्र है कि पहली बार नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया अभियान की शुरुआत हुई थी। पिछले एक दशक में ना सिर्फ स्टार्टअप्स की दुनिया में भारत के युवाओं ने नाम कमाया है, बल्कि भारत के यूनिकार्न भी वैश्विक स्तर पर देश का परचम फहरा रहे हैं।
🚨🇮🇳 ‘India’s startup mission has become a revolution’: PM Modi
In just 10 years, India has grown from under 500 startups to over 200,000, becoming the world’s third-largest startup ecosystem, the Prime Minister said. pic.twitter.com/nDG8nTJwJA
— Sputnik India (@Sputnik_India) January 16, 2026
आधे से अधिक स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरे
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि स्टार्टअप को महज शहरी, अभिजात्य अवधारणा बनने नहीं दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि 52.6 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं। छोटे शहरों और कस्बों का युवा आज तकनीक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में नवाचार कर रहा है। यह वही भारत है जो कभी रोज़गार के लिए महानगरों की ओर पलायन करता था; आज वही भारत रोजगार सृजन का केंद्र बन रहा है।
A time when most people from middle-class families dreamt only to secure a job, @StartupIndia has sparked a new entrepreneurial culture in Bharat under the leadership of PM Shri @narendramodi ji.
Today, youth from Tier 2 and
Tier 3 cities and even from villages are launching… pic.twitter.com/hGl174hQez— Tejasvi Surya (@Tejasvi_Surya) January 16, 2026
आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा स्टार्टअप
महाराष्ट्र में अब तक 34,444 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं, कर्नाटक में 20,330, दिल्ली में 19,273 और उत्तर प्रदेश में 19,207 स्टार्टअप सक्रिय हैं। गुजरात में 16,805, तमिलनाडु में 13,105, तेलंगाना में 10,804 और हरियाणा में 10,295 स्टार्टअप कार्यरत हैं। केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी हज़ारों स्टार्टअप विकसित हो रहे हैं। यह तस्वीर दर्शाती है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप संस्कृति किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे संघीय भारत में जड़ें जमा चुकी है।
स्टार्टअप से दो करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित
इस परिवर्तन का सामाजिक प्रभाव भी उतना ही गहरा है। बीते एक दशक में स्टार्टअप क्षेत्र से दो करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। यह रोजगार पारंपरिक सरकारी या कॉरपोरेट ढांचे से अलग है—यह कौशल, नवाचार और उद्यमिता पर आधारित है। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी, ग्रामीण नवाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार इस बात का प्रमाण है कि स्टार्टअप आंदोलन समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ओरियोस वेंचर पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले 20 स्टार्टअप्स ने ऐसा 13.3 वर्षों में कर दिखाया। 2024 में औसत 13.4 वर्ष लगे। हालांकि 2023 में मामाअर्थ और यात्रा ने 12.5 वर्षों में ही शेयर बाजार में जगह बनाई। 2022 और 2021 में इस मुकाम तक पहुंचने में 16 साल लगे थे।
स्पेस-टेक, बायोटेक, आईए, ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट में स्टार्टअप
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का एक बड़ा योगदान यह भी रहा है कि स्टार्टअप को केवल ई-कॉमर्स या ऐप आधारित व्यवसायों तक सीमित नहीं रहने दिया गया। आज भारत के स्टार्टअप स्पेस-टेक, बायोटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-साइंस, ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट-टेक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं। निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप उपग्रह और लॉन्च प्रणालियाँ विकसित कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में तकनीकी समाधान आम जनजीवन को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। यह वही आधार है जिस पर विकसित भारत 2047 का सपना खड़ा है।
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
वैश्विक परिदृश्य में भी भारत की स्थिति उल्लेखनीय है। अमेरिका और ब्रिटेन के बाद भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। वर्ष 2025 में भारतीय स्टार्टअप्स ने लगभग 94,500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया। यह पूंजी केवल आर्थिक लाभ का संकेत नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक स्थिरता, स्पष्ट नीतियों और नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय भरोसे का प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी की ‘रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म’ की नीति ने निवेशकों को दीर्घकालिक विश्वास दिया है।
भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आत्मविश्वास बढ़ा रहे
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप्स को केवल बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा। कर सुधार, आसान अनुपालन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फंड ऑफ फंड्स और सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स को प्राथमिकता, ये सभी कदम इस बात के संकेत हैं कि सरकार एक सक्षम इकोसिस्टम तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध रही है। यही कारण है कि आज भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आत्मविश्वास के साथ खड़े हैं। आज स्टार्टअप इंडिया पहल के एक दशक पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस बात पर विशेष बल दिया, वह इस पूरी यात्रा का सार है। उन्होंने कहा कि भारत अब प्रयोग से डरने वाला देश नहीं, बल्कि नवाचार को प्रोत्साहन देने वाला राष्ट्र बन चुका है।
देश की समस्याओं के स्वदेशी समाधान की प्रयोगशालाएं
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, स्टार्टअप केवल लाभ कमाने की इकाइयां नहीं, बल्कि देश की समस्याओं के स्वदेशी समाधान तैयार करने की प्रयोगशालाएं हैं। यह कथन बताता है कि सरकार की दृष्टि केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और रणनीतिक भी है।भारत का स्टार्टअप आंदोलन किसी एक योजना या एक वर्ष की उपलब्धि नहीं है। यह एक सुनियोजित, दूरदर्शी और नेतृत्व-प्रेरित परिवर्तन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह आंदोलन भारत को केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान प्रदाता राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर है। यदि यही गति, नीति-निरंतरता और नवाचार का उत्साह बना रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का नाम केवल स्टार्टअप हब के रूप में नहीं, बल्कि विश्व की समस्याओं के समाधानकर्ता के रूप में लिया जाएगा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 16 जनवरी को कहा कि स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं बल्कि एक ‘रेनबो विजन’ है, जो देश के विभिन्न क्षेत्रों को नए अवसरों से जोड़ने का माध्यम बना है.
पूरी खबर- https://t.co/sIqKeEX4q6 pic.twitter.com/HrjuLo2imY— DW Hindi (@dw_hindi) January 16, 2026
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आवास पर भारतीय एआई स्टार्टअप्स के साथ एक अहम गोलमेज बैठक भी की थी। यह बैठक अगले महीने भारत में होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले आयोजित की गई। इस बैठक में ‘एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज’ के तहत चुने गए 12 भारतीय एआई स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इन स्टार्टअप्स ने प्रधानमंत्री के सामने अपने आइडिया, इनोवेशन और अब तक के कामकाज का पूरा प्रेजेंटेशन दिया।

ये स्टार्टअप्स अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें भारतीय भाषा फाउंडेशन मॉडल, मल्टीलिंगुअल एलएलएम, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-ऑडियो और टेक्स्ट-टू-वीडियो तकनीक शामिल है। इसके अलावा ई-कॉमर्स, मार्केटिंग और पर्सनलाइज्ड कंटेंट के लिए जनरेटिव एआई से 3डी कंटेंट, इंजीनियरिंग सिमुलेशन, एडवांस एनालिटिक्स और हेल्थकेयर डायग्नोसिस जैसे सेक्टर भी शामिल रहे। बैठक के दौरान स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने माना कि अब दुनिया में एआई इनोवेशन का केंद्र भारत की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने समाज में बदलाव लाने में एआई की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के जरिए भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सामने एक ऐसा अनूठा मॉडल पेश करना चाहिए जो ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ की भावना पर आधारित हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर किफायती और समावेशी एआई को बढ़ावा देना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप्स और एआई उद्यमी भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं। उन्होंने देश में इनोवेशन और बड़े पैमाने पर समाधान लागू करने की बड़ी क्षमता की ओर इशारा किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर दुनिया का भरोसा ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय एआई मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और डेटा प्राइवेसी के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक अलग पहचान बनानी चाहिए और क्षेत्रीय भाषाओं व स्वदेशी कंटेंट को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इस बैठक में अवतार, भारतजेन, फ्रैक्टल, GAN, GENLOOP, GNANI, IntelliHealth, Sarvam, Shodh AI, Socket AI, Tech Mahindra और Zenteiq जैसे एआई स्टार्टअप्स के सीईओ और प्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी बैठक में मौजूद रहे।
PM Modi chairs the Roundtable with Indian AI Start-Ups. Comes Ahead of the AI summit in Delhi in February. pic.twitter.com/C1rhxs8fHs
— Sidhant Sibal (@sidhant) January 8, 2026









