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मोदी सरकार की सख्ती का असर, यूरोप के आठ देशों ने कोविशील्ड वैक्सीन को ग्रीन पासपोर्ट सिस्टम में किया शामिल

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वो जमाना चला गया, जब कोई देश या वैश्विक संगठन भारत को आखें दिखाकर दबाव में लाने की कोशिश करता था। आज मोदी राज में सबकुछ बदल चुका है। भारत आंख से आंख मिलाकर बातें करता हैं और जैसे को तैसे का मुहतोड़ जवाब दे रहा है। ग्रीन पासपोर्ट विवाद मामले में भारत ने यूरोपीय यूनियन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूरोपीय यूनियन भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन को मंजूरी नहीं देता है, तो भारत भी वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को लेकर जवाबी नीति लागू करेगा। ऐसे में यूरोप में किसी व्यक्ति को लगी वैक्सीन को भारत नहीं मानेगा और यूरोप से यहां आने वाले यात्रियों को भी 14 दिनों के अनिवार्य क्वारंटाइन का सामना करना पड़ेगा।

भारत की इस चेतावनी का तत्काल असर देखने को मिला है। गुरुवार यानि 1 जुलाई, 2021 को यूरोप के आठ देशों ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, सोल्वेनिया, ग्रीस, आइसलैंड, आयरलैंड और स्पेन ने कोविशील्ड वैक्सीन को डिजिटल सर्टिफिकेट के तौर पर मंजूरी दे दी है। अब सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड को ग्रीन पासपोर्ट सिस्टम में शामिल कर लिया गया है। दरअसल भारत ने यूरोपीय यूनियन के डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट में कोविशील्ड और कोवैक्सीन को अधिसूचित करने का अनुरोध किया था, ताकि भारत से वहां जा रहे नागरिकों को कोई परेशानी न हो। मौजूदा समय में किसी भी देश की यात्रा के लिए वैक्सीन पासपोर्ट बेहद जरूरी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने भी भारत सरकार से कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा उठाने की अपील की थी।

यूरोपीय देशों की यात्रा करने वाले भारतीयों को राहत

अब यूरोप के आठ देशों द्वारा कोविशील्ड वैक्सीन को ग्रीन पासपोर्ट योजना के तहत शामिल करने से इन देशों की यात्रा करने वाले भारतीयों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल भारत से बड़ी संख्या में लोग नौकरी या पढ़ाई के लिए यूरोपीय देशों की यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन भारतीय वैक्सीनों को ग्रीन पासपोर्ट सिस्टम से संबद्ध करने की इजाजत न मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। भारत ने यूरोपीय यूनियन के सामने कई बार इस मामले को उठाया था।

क्या है ग्रीन पासपोर्ट सिस्टम ?

यूरोपीय यूनियन की डिजिटल कोविड प्रमाणपत्र योजना या ‘ग्रीन पासपोर्ट’ सिस्टम वो सुविधा है, जिसमें वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद उसे डिजिटल पासपोर्ट से लिंक कर दिया जाता है। इसके तहत उन लोगों को यूरोपीय देशों की यात्रा पाबंदियों से छूट होगी जिन्होंने यूरोपीय चिकित्सा एजेंसी (ईएमए) द्वारा अधिकृत टीके लगवाए हैं। असल में कोविशील्ड को अब तक यूरोपीय यूनियन ने मंजूरी नहीं दी थी, जिससे भारतीयों को फिलहाल यूरोप जाने के लिए ग्रीन पास नहीं था। यूरोपीय यूनियन ने 1 जुलाई, 2021 से ग्रीन पासपोर्ट सिस्टम की शुरुआत कर दी है।

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