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मोदी सरकार के मेक इन इंडिया का कमाल, स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS का परीक्षण सफल, Apple और Google को मिलेगी कड़ी चुनौती

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता देते हैं, ताकि भारत की तकनीकी के क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म हो सके। प्रधानमंत्री मोदी के विजन और उनकी सरकार के प्रयास का परिणाम है कि मेक इन इंडिया की मुहिम रंग ला रही है। आज भारत तकनीकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता जा रहा है और विश्व के विकसित देशों को भी चुनौती देता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में मेक इन इंडिया को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत ने स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास किया है, जिससे अब देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को विदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम iOS और Android पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

पीएम मोदी के विज़न को पूरा करने की दिशा में एक बड़ी पहल

दरअसल केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार (24 जनवरी, 2023) को स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS का परीक्षण किया। केंद्रीय मंंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर बताया कि मेड इन इंडिया मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS का सफल परीक्षण हो चुका है। भारत में सशक्त, स्वदेशी, आत्मनिर्भर डिजिटल इंफ़्रास्ट्रक्चर के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विज़न को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे विदेशी तकनीकी के एकधिकार को चुनौती मिलेगी।

स्वदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम

BharOS को प्राइवेसी-फोकस्ड ऑपरेटिंग सिस्टम कहा जा रहा है, जिसे कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ हैंडसेट्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसे देश में मजबूत स्वदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस ऑपरेटिंग सिस्टम की यात्रा में कठिनाई आएंगी और दुनिया भर में कई लोग हैं जो कठिनाई लाएंगे। वे नहीं चाहेंगे कि इस तरह का कोई सिस्टम सफल हो।

भारत के 100 करोड़ मोबाइल फोन यूजर्स को होगा लाभ

इस स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के इनक्यूबेटेड फर्म द्वारा विकसित किया गया है। इस सॉफ्टवेयर को कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ हैंडसेट पर इंस्टॉल किया जा सकता है। इस ओएस को लेकर भारत के 100 करोड़ मोबाइल फोन यूजर्स को लाभ पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। इस ओएस की खास बात यह है कि यह हाईटेक सिक्योरिटी और प्राइवेसी के साथ आता है। यानी इस मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर्स को उनकी जरूरतों के अनुरूप एप चुनने और उपयोग करने के लिए अधिक स्वतंत्रता, नियंत्रण और लचीलापन मिलता है।

यूजर्स को मनचाहा एप्स का उपयोग करने में होगी आजादी

इस स्वदेशी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में नो डिफॉल्ट एप्स (NDA) दिया गया। इससे यूजर्स को एप्स का उपयोग करने में आजादी होगी। यूजर्स को उन एप्स का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा, जिनसे वे परिचित नहीं है या जिन्हें वे सिक्योरिटी के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानते हैं। स्वदेशी ओएस यूजर्स को उन एप्स पर अधिक कंट्रोल देता है, जो उनके डिवाइस में हैं। सिर्फ इतना ही नहीं यूजर्स उन एप को भी सिलेक्ट कर सकते हैं जिनको वह अपने डिवाइस में कुछ सुविधाओं या डाटा पर पहुंच के लिए एक्सेस देना चाहते हैं। आसान शब्दों में कहें तो इस ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर्स का कंट्रोल ज्यादा होता है।

Apple और Google के दबदबे को मिलेगी कड़ी चुनौती

भारत के सभी स्मार्टफोन विदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम iOS और Android से लैस हैं। इसलिए Apple और Google दोनों कंपनियां मोबाइल मार्केट में राज करती हैं। इनके द्वारा मनमाने चार्ज वसूले जाते हैं। अब भारत में मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम BharOS के लॉन्च होने के बाद Apple और Google के दबदबे को कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। इससे स्मार्टफोन की कीमत में कटौती हो सकती है। इससे Apple और Google की चिंताएं बढ़ गई हैं।

 

 

 

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