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कोरोना संकट के बीच राहत के संकेत, संक्रमण के नए मामलों में गिरावट, दूसरे देशों से बेहतर स्थिति में भारत

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देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब तक 12,380 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 1489 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। इस घातक वायरस ने अब तक 414 मरीजों की जान ले ली है। इसी बीच एक राहत का संकेत मिला है कि पिछले कुछ दिनों से तेजी से बढ़ रहे संक्रमण के नए मामलों में ब्रेक लगा है। पिछले 24 घंटे में नए मामलों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। दिल्ली में बुधवार को सिर्फ 17 नए मामले सामने आए जो पूरे अप्रैल में किसी भी दिन का सबसे कम आंकड़ा है। इसी तरह मुंबई में बुधवार को नए मामलों में एक दिन पहले की तुलना में 35 प्रतिशत की कमी आई। मौत के मामले भी सिर्फ 2 आए जो पिछले 11 दिनों में सबसे कम थे।

देश में नए मामलों में 25 प्रतिशत की कमी
नए मामलों में लगातार इजाफे के बीच देश में बुधवार को सिर्फ 866 नए मरीज सामने आए। उससे एक दिन पहले यानी मंगलवार की तुलना में यह करीब 25 प्रतिशत कम है। इस हफ्ते नए मामलों में भी यह सबसे कम आंकड़ा है। सोमवार को देश में कोरोना वायरस के 1200 से ज्यादा नए मामले सामने आए थे। मंगलवार को भी करीब 1100 नए मामले सामने आए। अगर आज भी यह ट्रेंड बरकरार रहता है तो भारत कोरोना वायरस के कर्व को फ्लैट करने में जल्द ही कामयाब हो सकता है।

दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे ग्राफ पर बुधवार को लगा ब्रेक
देश में महाराष्ट्र के बाद दिल्ली कोरोना वायरस से दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में कोरोना का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा था जिस पर बुधवार को ब्रेक लग गया। कल राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस के कुल 17 ही नए मामले आए जो पूरे अप्रैल महीने में किसी एक दिन का सबसे कम आंकड़ा है। बुधवार को दिल्ली में कोरोना से 2 मौतें हुईं जिससे अब यहां मौत का आंकड़ा 32 पहुंच चुका है।
दिल्ली में 68 प्रतिशत मामले तबलीगी जमात से जुड़े
अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में नए मामलों में कमी के लिए निजामुद्दीन मरकज से निकाले गए लोगों में अब ‘जीरो पॉजिटिव’ केस आने को जिम्मेदार कहा जा सकता है। यहां कुल 1578 केसों में से 1080 यानी 68 प्रतिशत तो तबलीगी जमात से जुड़े लोगों के हैं। राहत की बात है कि मरकज से निकालकर क्वारंटीन में रखे गए लोगों में अब पॉजिटिव केस बहुत कम मिल रहे हैं।
महाराष्ट्र : नए मामलों में 34 प्रतिशत की कमी 
देश में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा कहर झेल रहे महाराष्ट्र में भी बुधवार को सुधार दिखा और नए मामलों में 34 प्रतिशत तक की कमी देखी गई। बुधवार को महाराष्ट्र में कुल 232 नए मामले सामने आए जो पिछले 6 दिनों में सबसे कम था और मंगलवार की तुलना में 34 प्रतिशत कम।
मुंबई में नए मामलों में 35 प्रतिशत की कमी
महाराष्ट्र में सबसे बुरी स्थिति मुंबई की है लेकिन अच्छी बात यह है कि बुधवार को वहां नए मामलों में 35 प्रतिशत की कमी आई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को 140 नए मामले सामने आए जबकि 2 मरीजों की मौत हो गई। शहर में यह पिछले 11 दिनों में कोरोना से मौत का सबसे कम आंकड़ा था जहां अब तक 114 मौतें हो चुकी हैं। मुंबई में अब तक कोरोना के कुल 1896 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
170 जिलों में हॉटस्पॉट्स, 207 की निगरानी
सरकार ने अब तक 170 जिलों में कोविड-19 हॉटस्पॉट्स या ‘रेड जोन्स’ एरिया की पहचान की है। इन हॉटस्पॉट्स में देश के सभी 6 मेट्रो शहर- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नै, बेंगलुरु और हैदराबाद भी शामिल हैं। इनके अलावा 207 जिले ऐसे हैं जहां कोरोना के मामलों के दोगुनी होने की रफ्तार फिलहाल तो कम है, लेकिन उनके हॉटस्पॉट्स बन जाने की आशंका भी बनी हुई है। इन जिलों की पहचान वाइट जोन या नॉन-हॉटस्पॉट्स के तौर पर की गई है और वहां कड़ी नजर रखी जा रही है। बाकी जिले जहां अब तक कोरोना के एक भी नए केस नहीं आए हैं, उन्हें ग्रीन जोन में रखा गया है।

आंकड़ों में भारत अन्य देशों से कैसे बेहतर…?
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस महामारी से लड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के नियमों का पालन सही ढंग से किया गया, तब कोरोना के संक्रमण पर जल्द ही भारत नियंत्रण कर सकता है। इस दौरान पीएम ने दावा किया कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में भारत दूसरे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
हर एक मिलियन यानि 10 लाख लोगों पर कोरोना के सामने आए केसों के मामले में भी भारत की स्थिति दूसरे देशों की तुलना में काफी बेहतर है। विश्‍व में 10 लाख लोगों पर 267 केस सामने आए हैं जबकि भारत में आश्‍चर्यजनक रूप से यह संख्‍या 9 जी हां केवल नौ है।
कोराना के खिलाफ इस वैश्विक जंग के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। दूसरे शब्‍दों में कहें तो अमेरिका, इटली, जर्मनी, स्‍पेन जैसे विकसित देशों की तुलना में भारत में कोरोना के मामले काफी कम हैं। विश्‍व महाशक्ति अमेरिका में ही कोरोना के कारण अब तक 22 हजार से अधिक लोगों की जान गई और वहां दो लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में जहां प्रति दस लाख (मिलियन) पर औसतन 17.3 मौतें हुई हैं जबकि भारत में यह औसत इससे काफी नीचे 0.3 है। सुपरपावर अमेरिका में हर 10 लाख लोगों पर औसत 86 लोगों को जान गंवानी पड़ी है जबकि स्‍पेन में यह संख्‍या 402, इटली में 358 और फ्रांस में 261 है।
भारत और सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में 12,000 मामले पहुंचने तक इसे दोगुना होने में कितने दिन लगे इसे ग्राफ के माध्यम से समझा जा सकता है। भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 750 से 1500 तक पहुंचने में चार दिन लगे, वहीं अमेरिका, इटली और कनाडा में 2 दिन लगे, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी में 3 दिन लगे और स्पेन में एक दिन लगे। संक्रमण के मामले 1500 से 3000 तक पहुंचने में भारत में जहां 4 दिन लगे, वहीं अमेरिका, इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी में 3 दिन में ही आंकड़ा तीन हजार तक पहुंच गया। संक्रमण के मामले 3000 से 6000 तक पहुंचने में जहां भारत में 5 दिन लगे, वहीं अमेरिका, स्पेन में 2 दिन और इटली, ब्रिटेन और कनाडा में चार दिन लगे। इसी तरह संक्रमण के मामले 6000 से 12000 तक पहुंचने में भारत में 6 दिन लगे, वहीं अमेरिका 2 दिन, जर्मनी में 2 दिन और इटली में 3 दिन, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन में 4 दिन और कनाडा में 5 दिन लगे।   
अमेरिका में 10 लाख लोगों पर 1496 केस सामने आए हैं जबकि स्‍पेन में यह संख्‍या 10 लाख लोगों पर 3864, इटली में 2732 और फ्रांस में 2265 है। भारत में  इन आंकड़ों की तुलना करें तो साफ पता चलता है कि अमेरिका, स्‍पेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे दूसरे देशों की तुलना में भारत काफी बेहतर स्थिति में है। इसके अलावा भारत ने अब तक जितने लोगों में कोरोना वायरस की जांच की है, उसमें से केवल 4.7 प्रतिशत लोगों को ही कोरोना पॉजिटिव पाया गया है,जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम है। भारत की कोशिश अब लॉकडाउन और सोशल डिस्‍टेंसिंग जैसे उपायों का पालन कर कोराना के खिलाफ यह कठिन लड़ाई जीतने पर है। लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि कोरोना की चुनौती के मुकाबला करने में विकासशील देश भारत, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में विकसित स्थिति में हैं।

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