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केजरीवाल का दोगलापन देखिए, पहले कहा था- किसान मंडी के बाहर या दूसरे स्टेट में फसल क्यों नहीं बेच सकता? अब कर रहे विरोध

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कृषि में सुधार करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने तीन नए कृषि कानून बनाए। कुछ किसान संगठन इसके विरोध में सड़कों पर बैठे हैं और आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जो सियासी दल और नेता आज आंदोलनकारी किसानों के पीछे खड़े हैं, वहीं पहले इस कानून की वकालत किया करते थे। उन नेताओं में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल है।

हम आपको एक वीडियो देखाने जा रहे हैं, जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने कृषि कानून के मामले में किस तरह दोगलापन दिखाया है और किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं। दरअसल ये वीडियो भारतीय उद्योग परिसंघ के यूट्यूब चैनल पर 17 फरवरी, 2014 को अपलोड हुआ था। वीडियो में केजरीवाल राष्ट्रीय भारतीय उद्योग परिसंघ के कार्यकारी सदस्यों से बातचीत करते हुए दिख रहे हैं। 

वीडियो में 1 मिनट 34 सेकंड पर एक शख्स ने केजरीवाल से पूछा कि हम कृषि क्षेत्र को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं? वीडियो में 7 मिनट 25 सेकंड पर केजरीवाल ने कहा, किसान मंडी के बाहर या दूसरे स्टेट में फसल क्यों नही बेच सकता? इस तरह के कंट्रोल से किसान दुखी है। इसे ठीक करने की जरूरत है।”

केजरीवाल के इसी सवाल का जवाब मोदी सरकार ने नए कृषि कानूनों के जरिए दिया है। सरकार ने कानून में किसानों को अपनी उपज को कहीं भी और किसी को भी बेचने की आजादी दी है, ताकि किसान अपनी उपज का उचित मूल्य हासिल कर सके। हालांकि कानून 2020 में बना है, लेकिन केजरीवाल ने ऐसा कानून बनाने का समर्थन 2014 में किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि केजरीवाल आज इसके विरोध में क्यों खड़े हैं ?

इस सवाल का जवाब भी 100 दिन से अधिक हो चुके आंदोलन से मिल चुका है। दरअसल आंदोलन पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसे सियासी दल इसका राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं क्योंकि अगले साल यानि 2022 में पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले है। आम आदमी पार्टी 2017 में पंजाब का चुनाव लड़ चुकी है और 2022 में उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। ऐसे में केजरीवाल का मकसद आंदोलनकारी किसान नेताओं के साथ मिलकर गरीब किसानों के खेतों में सियासी फसल उगाना और उन्हें धोखा देना है।

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