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केजरीवाल सरकार की योजना ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ में घोटाला, आरटीआई से नहीं मिला खर्च और लाभार्थियों का सही ब्यौरा

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दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अक्टूबर 2019 में ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ नाम से एक योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य था रास्तों पर होने वाली दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाना। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन पर काफी खर्च किए गए। लेकिन यह योजना भी घोटालों की भेंट चढ़ गई है। आरटीआई के जरिए जब इस योजना के लाभार्थियों और उस पर हुए खर्च के बारे में जानकारी मांगी गई, तो हैरान करने वाली और आधी-अधूरी जानकारी दी गई।

दिल्ली स्थित तिलक नगर के रहने वाले अधिवक्ता अनंतदीप सिंह ने आरटीआई दायर कर ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ योजना के बारे में केजरीवाल सरकार से जानकारी मांगी थी। उन्होंने योजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे। लेकिन कुछ सवालों के जवाब के लिए स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग से संपर्क करने का निर्देश दे दिया गया। कोई जानकारी लेने के लिए नंबर प्रदान कर दिया गया। जब दिल्ली के कई पुलिस थानों में इस योजना से संबंधित जानकारी के लिए संपर्क किया गया, तो थानों ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इससे और कई सवाल उठ खड़े हुए। 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या योजना की जवाबदेही अलग-अलग विभागों में बंटी हुई है? अगर बंटी है, तो उनके द्वारा योजना को लागू करने में किए गए खर्च और लाभार्थियों की संख्या का आंकड़ा जुटाने की जिम्मेदारी योजना से संबंधित विभाग की है या आरटीआई आवेदक की ? जब योनजा से संबंधित विभाग के पास पूरे आंकड़े नहीं है, तो किस आधार पर रकम को जारी किया जा रहा है? सरकार की तरफ से जो रकम जारी की गई, वह सही लाभार्थियों तक पहुंचा या नहीं इसकी जानकारी कौन एकत्रित करेगा?

ऐसे कई सवाल है, जिनका जवाब केजरीवाल सरकार के पास नहीं है। लेकिन दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने दावा किया है कि इस योजना के तहत अभी तक लगभग 7 करोड़ से ज़्यादा रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री अरविन्द केजरिवाल ने यहां तक दावा किया था कि अभी तक इस योजना के तहत कुल 3 हज़ार लोगों की जान बचाई जा चुकी है। ऐसे में अनंतदीप सिंह का मूल प्रश्न यही था कि एक योजना पर इतनी बड़ी राशि खर्च हुई तो उसका ब्यौरा भी होना चाहिए। इससे पता चलता है कि इस योजना में गड़बड़ी की गई है।

बता दें कि अनंतदीप सिंह ने 13 मार्च, 2020 को आरटीआई दियार किया था। उन्होंने ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ योजना के संबंध में कुछ सवाल पूछा था। उसका जवाब जुलाई 2020 में आया। उन सवालों को आप भी देखिए-

  • इस योजना के तहत अभी तक कुल कितने लोगों का उपचार हुआ है?
  • योजना के तहत जिन अस्पतालों में उपचार हुआ है उनका नाम और पता?
  • साथ ही जिन मरीजों का उपचार हुआ है उनकी जानकारी।
  • कितने अस्पतालों ने इस योजना के तहत आने वाली घटनाओं की जानकारी पुलिस को दी है?
  • अस्पताल जिन्होंने जानकारी दी है और पुलिस थाने जिन्होंने शिकायत दर्ज की है, उनके नाम।
  • क्योंकि दुर्घटना होने पर अक्सर प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है बल्कि उपचार के दौरान अस्पताल के लिए वह अहम दस्तावेज़ होता है। इस तरह की कितनी एफ़आईआर दर्ज हुई?
  • दुर्घटनाग्रस्त होने वाले लोगों की मदद करने वालों से जुड़ी जानकारी?
  • इस योजना के विज्ञापन में दिखाए गए लोगों की जानकारी जिनका उपचार इस योजना के तहत हुआ है और जिन लोगों ने मदद की है?
  • दिल्ली सरकार द्वारा इस योजना के तहत आने वाले निजी अस्पतालों पर किए गए खर्च का ब्यौरा?

सोशल मीडिया में दिल्ली सरकार की योजना ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ में गड़बड़ी को लेकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कोई लोगों ने इस योजना में घोटाले का आरोप लगाया है। 

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