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देश में मेडिकल संस्थानों का हो रहा तेजी के विस्तार, जितने डॉक्टर 70 सालों में नहीं बने…उतने अगले 10 सालों में बनने जा रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि एक समय था, जब कैंसर का नाम सुनते ही गरीब और मध्यम वर्ग हिम्मत हारने लगता था। लेकिन बीते कुछ सालों में जरूरी दवाओं की कीमतों में काफी कमी आने से आज स्थिति बदल चुकी है। सरकार के सेवा भाव और संवेदनशीलता से गरीबों का सस्ता इलाज सुनिश्चित हो रहा है।देश में आज जिस तेजी से मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, उससे बहुत बड़ी संख्या में डॉक्टरों की जरूरत होगी। देश में जितने डॉक्टर पिछले 70 वर्षों में बने, उतने अगले 10 वर्षों में ही बनने जा रहे हैं।वैक्सीन की 150 करोड़ डोज का ऐतिहासिक मुकाम
प्रधानमंत्री ने कोलकाता के चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के नए कैम्पस का वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ही देश ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव को पार किया है। साल की शुरुआत देश ने 15 से 18 साल की उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन से की थी। वहीं आज साल के पहले महीने के पहले हफ्ते में ही, भारत ने वैक्सीन की 150 करोड़ डोज का ऐतिहासिक मुकाम भी हासिल किया है। ये आंकड़ों के हिसाब से बहुत बड़ी संख्या है,  दुनिया के ज़्यादातर बड़े बड़े देशों के लिए भी ये किसी आश्चर्य से कम नहीं है। भारत के लिए ये- एक नई इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो असंभव को संभव करने के लिए कुछ भी कर गुजरने का हौसला रखती है।

सिर्फ 5 दिन के भीतर ही डेढ़ करोड़ से ज्यादा बच्चों को भी वैक्सीन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हमारा ये वैक्सीनेशन प्रोग्राम उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना खतरनाक ये भेष बदलने वाला कोरोना वायरस है। आज एक बार फिर दुनिया कोरोना के नए omicron वैरियंट का सामना कर रही है। सिर्फ 5 दिन के भीतर ही डेढ़ करोड़ से ज्यादा बच्चों को भी वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी है। ये उपलब्धि पूरे देश की है, हर सरकार की है। उन्होंने कहा कि मैं विशेष रूप से इस उपलब्धि के लिए देश के वैज्ञानिकों का, वैक्सीन मैन्यूफैक्चरर्स का, हमारे हेल्थ सेक्टर से जुड़े साथियों का धन्यवाद करता हूं। सबके प्रयासों से ही देश ने उस संकल्प को शिखर तक पहुंचाया है, जिसकी शुरुआत हमने शून्य से की थी।कैंसर के इलाज के लिए ज़रूरी दवाओं की कीमतों में काफी कमी की गई
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक हमारे यहां गरीब और निम्न मध्यम वर्ग, स्वास्थ्य सुविधाओं से इसलिए वंचित रहे क्योंकि या तो इलाज सुलभ ही नहीं था, या बहुत महंगा था। गरीब अगर गंभीर बीमारी से ग्रसित होता था, तो उसके पास दो ही विकल्प थे- या तो वो कर्ज ले, अपना घर या जमीन बेचे या फिर इलाज का विचार ही टाल दे। कैंसर की बीमारी तो ऐसी है जिसका नाम सुनते ही गरीब और मध्यम वर्ग हिम्मत हारने लगता था। बीते सालों में कैंसर के इलाज के लिए ज़रूरी दवाओं की कीमतों में काफी कमी की गई है। कैंसर की भी 50 से अधिक दवाइयां, बहुत कम कीमत पर उपलब्ध हैं। कैंसर की सस्ती दवाओं को उपलब्ध कराने के लिए विशेष अमृत स्टोर भी देशभर में चल रहे हैं।  सरकार का यही सेवा भाव, यही संवेदनशीलता, गरीबों को सस्ता इलाज सुनिश्चित कराने में मदद कर रहा है। सरकार जो प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस प्रोग्राम चला रही है, उसकी मदद से 12 लाख गरीब मरीजों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा मिली है।डिमांड और सप्लाई के गैप को भरने के लिए मिशन मोड पर काम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक और बहुत बड़ी समस्या हमारे हेल्थ सेक्टर की रही है- डिमांड और सप्लाई में बहुत बड़ा गैप। डॉक्टर और दूसरे हेल्थ प्रोफेशनल्स हों या फिर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, डिमांड और सप्लाई के इस गैप को भरने के लिए भी देश में आज मिशन मोड पर काम हो रहा है। साल 2014 तक देश में अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की संख्या 90 हज़ार के आसपास थी। पिछले 7 सालों में इनमें 60 हज़ार नई सीटें जोड़ी गई हैं। देश में कैंसर केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 19 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट्स, और 20 टर्शरी केयर कैंसर सेंटर्स भी स्वीकृत किए गए हैं।  30 से अधिक संस्थानों पर तेज़ी से काम चल रहा है।

 

 

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