गांधी परिवार के नेतृत्व वाली कांग्रेस इन दिनों एक अजीबोगरीब स्थिति से गुजर रही है। आजकल कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से नहीं, बल्कि अंदर से खड़ी होती नजर आ रही है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जिस आक्रामक अंदाज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विदेश नीति पर हमलावर हैं, उसी तेजी से उनकी अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके नैरेटिव की हवा निकालते जा रहे हैं।
रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी – ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
सरकार चाहे इसे “नॉर्मल” बताए, लेकिन हकीकत ये है:
• उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे
• MSMEs को सबसे ज्यादा चोट…— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 21, 2026
Rupee: ₹95 → ₹100
Stocks: Crashing
Economy: Collapsed
Jobs: Gone
Income: Falling
Savings: Wiped out
Cylinders: UnavailableWhy?
PM = CompromisedHe is desperate to protect himself and his financial structure. But 140 crore Indians know – PM Modi has surrendered India’s…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 30, 2026
देश की विदेश नीति आज compromised है, क्योंकि PM मोदी खुद compromised हैं।
मोदी सिर्फ़ वही करते हैं जो अमेरिका और इज़राइल उनसे करवाना चाहते हैं।
मोदी कभी भी भारत के हित के फैसले ले ही नहीं सकते – और ये साफ दिख रहा है। pic.twitter.com/fieCdr4RY0
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 24, 2026
राहुल गांधी लगातार यह माहौल बनाने में जुटे हैं कि देश की विदेश नीति फेल हो चुकी है और सरकार वैश्विक दबाव में झुकी हुई है। लेकिन सवाल यह है कि जब अपने ही अनुभवी नेता इस दावे को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और उनकी अपनी ही टीम के ‘सेनापति’ प्रधानमंत्री की कूटनीति के मुरीद नजर आ रहे हैं, तो यह हमला कितना ठोस बचता है?
शशि थरूर- संयम कमजोरी नहीं, ताकत है
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी के सीनियर लीडर शशि थरूर ने साफ शब्दों में उस लाइन को नकार दिया, जिस पर राहुल गांधी राजनीति खड़ी कर रहे हैं। थरूर ने दो टूक कहा कि मौजूदा हालात में भारत का संयम कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। यानी जिस चुप्पी को राहुल गांधी निशाना बना रहे हैं, उसे उनकी ही पार्टी के दिग्गज रणनीतिक परिपक्वता बता रहे हैं।
“𝐑𝐞𝐬𝐭𝐫𝐚𝐢𝐧𝐭 𝐢𝐬 𝐧𝐨𝐭 𝐬𝐮𝐫𝐫𝐞𝐧𝐝𝐞𝐫, 𝐢𝐭’𝐬 𝐚 𝐬𝐭𝐫𝐞𝐧𝐠𝐭𝐡, 𝐚 𝐰𝐚𝐲 𝐨𝐟 𝐬𝐡𝐨𝐰𝐢𝐧𝐠 𝐭𝐡𝐚𝐭 𝐰𝐞 𝐤𝐧𝐨𝐰 𝐰𝐡𝐚𝐭 𝐨𝐮𝐫 𝐢𝐧𝐭𝐞𝐫𝐞𝐬𝐭𝐬 𝐚𝐫𝐞 𝐚𝐧𝐝 𝐰𝐢𝐥𝐥 𝐚𝐜𝐭 𝐟𝐢𝐫𝐬𝐭 𝐚𝐧𝐝 𝐟𝐨𝐫𝐞𝐦𝐨𝐬𝐭 𝐭𝐨 𝐩𝐫𝐨𝐭𝐞𝐜𝐭 𝐭𝐡𝐞𝐦.”
* Congress MP… pic.twitter.com/ryMeNYZhtB
— BJP (@BJP4India) March 20, 2026
#WATCH | Kochi, Keralam: On PM Modi’s meeting with CMs on the West Asia conflict, Congress MP Shashi Tharoor says, “We are all united when it comes to the national interest. If today there is a UDF Govt in Kerala, we are not going to be seceding from the Union. We have to look… pic.twitter.com/aXbp7WZenA
— ANI (@ANI) March 28, 2026
कमलनाथ- गैस किल्लत नहीं
इसके बाद कमलनाथ जैसे पुराने कांग्रेसी वफादार का बयान आया, जिसने राहुल गांधी के आर्थिक हमलों की भी धार कुंद कर दी। जहां राहुल देश में गैस संकट और महंगाई का डर दिखा रहे हैं, वहीं कमलनाथ ने साफ कह दिया कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी मुद्दे गढ़ रहे हैं या उन्हें गलत जानकारी दी जा रही है? दोनों ही स्थितियां नेतृत्व की समझ पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
Kamalnath- There’s no Shortage of LPG. An atmosphere being created that there is a shortage to create panic.
Even Congress leaders are ashamed of what Rahul Gandhi and Congress IT Cell @SupriyaShrinate is doing. pic.twitter.com/p8VuUdbZh5
— Ankur Singh (@AnkurSingh) April 2, 2026
आनंद शर्मा- कूटनीति को बताया परिपक्व और कुशल
वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी बिना लाग-लपेट के यह संकेत दे दिया कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर राजनीति करना सही रास्ता नहीं है। उन्होंने मिडिल ईस्ट संकट में भारत की कूटनीति को परिपक्व और कुशल बताया, जो सीधे-सीधे राहुल गांधी के आरोपों के उलट खड़ा होता है।
Indian diplomatic handling of the crisis has been mature and skillful avoiding potential minefields. (5/11)
— Anand Sharma (@AnandSharmaINC) April 2, 2026
मनीष तिवारी: यह संघर्ष भारत का नहीं है
इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी साफ कर दिया कि यह कोई साधारण संघर्ष नहीं है, बल्कि बेहद जटिल वैश्विक स्थिति है, जहां संतुलन ही सबसे बड़ी ताकत है। तिवारी ने स्पष्ट संकेत दिया कि विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषय को केवल राजनीतिक हमले का हथियार बनाना न केवल अपरिपक्वता, बल्कि जोखिम भरा दृष्टिकोण भी हो सकता है।
#WATCH | Delhi | On West Asia conflict, Congress MP Manish Tewari says, “It’s important to understand that there is not one war which is happening in West Asia. There are multiple wars which are taking place…. What is happening between Israel and Iran and the United States,… pic.twitter.com/csuArPjBSo
— ANI (@ANI) March 17, 2026
अश्विनी कुमार- प्रधानमंत्री का योगदान सराहनीय
इतना ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाते हुए ईरान-इजराइल युद्ध के मुद्दे पर मोदी सरकार के रुख की खुलकर सराहना की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में भारत के प्रधानमंत्री का योगदान सराहनीय है। उनका यह बयान कांग्रेस के झूठे प्रचार और दोहरे रवैये की पूरी तरह पोल खोलता है, क्योंकि जिस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही थी, उसी पर उसके पूर्व वरिष्ठ नेता ने सच्चाई को स्वीकार करते हुए मोदी सरकार की नीति और नेतृत्व की प्रशंसा की है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व कांग्रेस नेता अश्विनी कुमार ने कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाते हुए ईरान-इज़राइल युद्ध के मुद्दे पर मोदी सरकार के रुख की खुलकर सराहना की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में भारत के प्रधानमंत्री का योगदान सराहनीय है।
उनका यह बयान… pic.twitter.com/725Llyj84L
— Rakesh Tripathi (@rakeshbjpup) April 4, 2026
पूरी तस्वीर साफ है राहुल गांधी जिस मुद्दे पर सरकार को घेरना चाहते हैं, उसी मुद्दे पर उनकी अपनी पार्टी में ही सहमति नहीं है। अनुभवी नेता जहां कूटनीति में संतुलन और परिपक्वता की बात कर रहे हैं, वहीं राहुल गांधी हर मुद्दे को आक्रामक विरोध में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीति में विरोध जरूरी है, लेकिन जब विरोध तथ्यों से ज्यादा नैरेटिव पर टिका हो और अपने ही साथी उस नैरेटिव को खारिज करने लगें, तो यह केवल रणनीति की विफलता नहीं, बल्कि नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी के लिए यह सिर्फ राजनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि साख की परीक्षा बनती जा रही है, क्योंकि जब अपनों के बयान ही सबसे बड़ा विरोध बन जाएं, तो विपक्ष की जरूरत ही नहीं रह जाती।









