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प्रधानमंत्री मोदी का देवदूत अवतार, हर वक्त कर रहे हैं काम ही काम

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नरेन्द्र मोदी और ‘कर्मयोगी’ एक-दूसरे के पर्यायवाची बन चुके हैं। नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि रख जिस ऊर्जा और उत्साह के साथ 7 अक्टूबर, 2001 को एक सेवक के रूप में अपनी यात्रा की शुरुआत की थी, वो आज 20 साल बाद भी प्रधानमंत्री के रूप में यथावत जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा 4 दिनों का था, ऐसे में उनके पास जो भी समय उपलब्ध थे, उन्होंने उसका भरपूर उपयोग किया। उन्होंने अपने अमेरिका दौरे में 65 घंटों के भीतर 24 बड़ी बैठकों में हिस्सा लिया। इनमें से 4 लंबी बैठकें तो फ्लाइट में ही हुईं। फ्लाइट में ही उन्होंने कई आधिकारिक फाइलों को भी निपटाया। प्रधानमंत्री मोदी की कोशिश रहती है कि उनके हर दौरे को देश के लिए ज्यादा से ज्यादा व्यस्त और उत्पादक बनाया जाए।

रविवार (26 सितंबर, 2021) को अमेरिका के थकाऊ दौरे से लौटने के बाद भी देश में उनका व्यस्त कार्यक्रम जारी रहा। रात करीब 8.45 बजे नई दिल्ली में नए संसद भवन के निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंच गए। निर्माण स्थल पर करीब एक घंटे तक उन्‍होंने घूम-घूमकर काम के बारे में जानकारी ली। कंस्ट्रक्शन साइट पर प्रधानमंत्री मोदी पहली बार बिना किसी सूचना के अचानक पहुंचे थे। प्रधानमंत्री के इस ‘देवदूत अवतार’ को देखकर हर कोई हैरान है। लोग 71 वर्ष की अवस्था में प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा और लगन की तारीफ कर रहे हैं। कई बड़ी हस्तियां भी प्रधानमंत्री मोदी के व्यस्त शेड्यूल और उनकी मेहनत व लगन की मुरीद हो चुकी है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी देश सेवा में खुद को इतना व्यस्त रखते हैं कि थकान उन्हें महसूस भी हो तो वह हावी न होता।

20 सालों में कोई छुट्टी नहीं

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिन-रात देश के लिए काम करते हैं। 20 सालों में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते और प्रधानमंत्री के तौर पर कभी कोई छुट्टी नहीं ली। ऐसा करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री हैं। 2014 में कठिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागड़ोर संभालते ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से एक-एक कर निपटना आरंभ किया। कोरोना महामारी को बड़ी चुनौती मानते हुए प्रधानमंत्री मोदी विशेषज्ञों की कोर टीमों के साथ हर रोज 18 घंटे तक काम करते रहे हैं। वे जब तक जागते हैं, तब तक जनता और देश की सेवा का ही चिंतन करते हैं।  

व्यक्तिगत हित नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि

प्रधानमंत्री मोदी को कर्मयोगी इसलिए भी कहा जाता है, क्योंकि जनता के प्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन में आने से पहले या बाद भी, उन्होंने कभी-भी अपने व्यक्तिगत हित या पारिवारिक हित के लिए कोई कार्य नहीं किया। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश को ही अपना परिवार बना लिया है और सेवा की अलख को अखंड बनाए रखा है। इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत का संकल्प पूरा करने के लिए बिना रुके, बिना थके जुटे हुए हैं।

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