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खालिस्तानी पीआर फर्म ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट के लिए पॉप सिंगर रिहाना को दिए 18 करोड़ रुपये

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किसान आंदोलन में अचानक विदेशी शख्सियतों की एंंट्री और समर्थन ने सबको हैरान कर दिया था। अब इस समर्थन के पीछे की साजिशों का पर्दाफाश होने लगा है। ताजा खुलासे में यह पता चला है कि पॉप सिंगर रिहाना को किसान आंदोलन के समर्थन में पोस्ट करने के बदले 2.5 मिलियन डॉलर यानि करीब 18 करोड़ रुपये मिले थे। इस डील के पीछे कनाडा की पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का हाथ है, जिसने दिल्ली में प्रदर्शन की प्लानिंग की थी और टूलकिट नाम का एक डॉक्यूमेंट तैयार किया था।

किसान आंदोलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटा कर मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए खालिस्तान समर्थक पीआर फर्म स्काईरॉकेट काम कर रहा है। इसे एक खालिस्तानी एमओ धालीवाल डायरेक्ट करता है। उसी ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट करने के लिए रिहाना को भुगतान किया था। यहां तक कि स्काईरॉकेट ने कनाडा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल करने लिए भी अभियान चला रहा है।

रिहाना का पाकिस्तनी लिंक भी सामने आया है। रिहाना की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं, जिसमें सिंगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के असिस्टेंट और कैबिनेट मंत्री जुल्फी बुखारी के साथ दिखाई दे रही हैं। इस पर सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं। यहां तक कि लोग उन्हें पाकिस्तानी भी कह रहे हैं।

उधर रिहाना का नाम एक अन्य विवाद में भी घिरता हुआ नजर आ रहा है। रिहाना की कॉस्मेटिक कंपनी फैंटी ब्यूटी कैलिफॉर्निया ने खुलासा किया है कि ‘सिंगर चाइल्ड लेबर और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर अपने सप्लायर्स का ऑडिट नहीं करवाती है।’ कंपनी ने आगे कहा कि, ‘वह सप्लायर्स से ही उम्मीद करती है कि वे नियमों का ध्यान रखें।’ 

जब रिहाना को ट्वीट के बदले पेमेंट करने की खबर सामने आई तो कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर अपनी बात रखी। कंगना ने लिखा-इतना कम, इतने की तो मैं अपने फ्रैंड्स को गिफ्ट दे देती हूं। कितने सस्ते हैं ये सब यार, हा हा हा हा। फोर्ब्स इनकम की सबसे बड़ी धोखाधड़ी। उनके पास हस्तियों के वित्तीय डेटा तक पहुंच नहीं है फिर भी सितारों की नकली आय का दावा करते हैं। अगर मैं झूठ बोल रही हूं तो फोर्ब्स मेरे खिलाफ मुकदमा करें।

गौरतलब है कि ग्रेटा थनबर्ग ने सोशल मीडिया पर टूलकिट नाम का एक डॉक्यूमेंट शेयर किया जिसे थोड़ी देर बाद उन्होंने डिलीट कर दिया था। इसमें पूरे एजेंडे की प्लानिंग की पावर पॉइंट स्लाइड भी थी और पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन का लोगो भी लगा हुआ था। कनाडा के इस एनजीओ की वेबसाइट आस्क इंडिया पर किसानों से जुड़े तमाम प्रोपेगेंडा भरे पड़े हैं। साथ ही उनकी सोशल मीडिया साइट्स पर देश-विरोधी, खालिस्तान समर्थक मैटेरियल भी है। टूलकिट के मुताबिक ये कैम्पेन नवंबर 2020 से चल रहा है। 23 और 26 जनवरी के दिन इनकी बड़े लेवल इस प्रोपेगेंडा फैलाने की योजना थी।

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