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UN में पीएम मोदी ने की आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की अपील, चीन को दी नसीहत

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भरपूर प्रयास किया कि पाकिस्तान अपनी आतंकवाद की नीति छोड़े, लेकिन वह लगातार अपनी नापाक हरकतों को जारी रखा। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए पीएम मोदी ने जो नीति अपनाई उसका मकसद एक तरफ आतंकवादियों का सफाया था, तो दूसरी तरफ कूटनीति के जरिए पाकिस्तान को उसके मित्र राष्ट्रों से अलग-थलग करके, उस पर आर्थिक और नैतिक दबाव बढ़ाना शामिल था। इस नीति के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) से इतर आतंकवाद पर एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और आतंक पर करारा प्रहार किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के ‘स्ट्रैटेजिक रिस्पॉन्सेज टू टेररिस्ट एंड वायलेंट एक्सट्रेमिस्ट नैरेटिव्स’ सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और तत्परता की अपील की।  उन्होंने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए सभी देशों को एक साथ आने की जरूरत है। पीएम मोदी ने आतकंवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर यूएन द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों पर सवाल उठाने वाले देशों को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकियों को किसी भी तरह से फंड और हथियार नहीं मिलने चाहिए। इशारों इशारों में चीन पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमें यूएन के प्रतिबंधित सूची में आतंकियों के नाम शामिल करने और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स जैसी व्यवस्थाओं पर किसी भी तरह से राजनीति करने से बचना चाहिए। इस तरह की व्यवस्थाओं को हमें लागू करना चाहिए और इन्हें और मजबूत करने की तरफ आगे बढ़ना चाहिए।

भारत के अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, विविधता और समावेशी विकास आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरता को बढ़ावा देने वाली विचारधाराओं के खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। उन्होंने बहुपक्षीय स्तर पर आतंकवाद-निरोधी सहयोग को संस्थागत बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में अन्य देशों की क्षमता निर्माण में चल रहे सहयोग को बढ़ाने की दिशा में काम करेगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) गीतेश शर्मा ने बताया कि पीएम मोदी ने जलवायु परिवर्तन की तरह ही संपूर्ण विश्व से आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद कहीं भी हो उसे आतंकवाद के रूप में ही देखा जाना चाहिए, अच्छे आतंकवाद और बुरे आतंकवाद के रूप में नहीं।

पाकिस्तान लगातार यह बात कह रहा है कि भारत उसकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के लिए उसे ब्लैकलिस्ट कराने पर जोर दे रहा है और उसे विश्व में अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है। बाते दें कि पिछले महीने ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की फंडिंग पर निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को डाउनग्रेड कर ब्लैकलिस्ट कर दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ यह कार्रवाई टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम रहने पर की गई थी। इसके बाद चीन ने पाकिस्तान का साथ देते यूएन लिस्टिंग और एफएटीएफ पर सवाल उठाए थे। चीन ने कहा था  कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ बड़े प्रयास और बलिदान किए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान को अधिक सहयोग तथा मान्यता देनी चाहिए।

माना जा रहा है कि चीन पाक को ब्लैक लिस्ट से निकलवाने की कोशिशों में जुटा है। इसकी एक वजह यह है कि चीन के पाक में कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ब्लैक लिस्ट में डाले जाने के बाद उसकी पहले से ही खराब अर्थव्यवस्था डूबने की कगार पर आ जाएगी।

चीन लगातार पाक के बचाव में उसके आतंकियों को भी बचाता रहा है। हाल ही में उसने यूएन में मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने की कोशिशों में भी अड़ंगा लगाया था। हालांकि, बाद में सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के दबाव में उसने अपना फैसला बदल दिया था। चीन कुछ साल पहले भी हाफिज सईद को आतंकी घोषित करने की कोशिशें रोकी थीं। तब भी उसे दबाव में झुकना पड़ा था।

 

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