प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता के दूरदर्शी विजन पर चलते हुए भारत के एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र से एक बड़ी खबर मिली है। वैज्ञानिकों ने यहां परमाणु ऊर्जा को लेकर जारी एक प्रयोग में ऐतिहासिक सफलता पाई है। इस उपलब्धि को हासिल करने के साथ ही भारत अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा चुका है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) भारत का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर है। भारत ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र में क्रिटिकैलिटी यानी क्रांतिकता हासिल कर ली है। अब भारत का परमाणु कार्यक्रम इसी क्रिटिकैलिटी की सफल राह पर आगे बढ़ेगा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। इसका असर यह होगा कि भारत जल्द ही पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा पैदा करने की जगह स्वच्छ अक्षय ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार हो जाएगा। परमाणु विज्ञान की भाषा में ‘क्रिटिकैलिटी’ का मतलब है कि रिएक्टर अब अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। अब इसे चलाने के लिए किसी बाहरी दखल की जरूरत नहीं है, ये खुद न्यूट्रॉन पैदा करेगा और खुद ही बिजली बनाएगा।
एफबीटीआर में चार दशक बाद मोदी राज में मिली ऐतिहासिक सफलता
भारत पिछले करीब 40 साल से एक फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) में प्रयोगों को अंजाम दे रहा है। अब जाकर मोदी राज में भारत को ऐतिहासिक सफलता मिल पाई है। भारत का परमाणु ऊर्जा विभाग इस दौरान परमाणु ईंधन के सही और पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल की कोशिशों में जुटा है। चूंकि अन्य कोई भी देश अपनी संवेदनशील परमाणु ऊर्जा तकनीक भारत को मुहैया कराने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए आईजीसीएआर ने खुद ही एक परिपूर्ण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को बनाने में ताकत झोंक दी। इसी का नतीजा है कि कलपक्कम में पीएफबीआर भी अब सफलता की ओर है। कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) भारत का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर है। 500 मेगावाट (MWe) क्षमता वाले इस उन्नत रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) की ओर से डिजाइन और भाविनी की तरफ से निर्मित किया गया है। इसे बनाने में 200 से ज्यादा भारतीय उद्योगों और लघु एवं मध्यम उद्योगों की भूमिका रही है।
इससे जितना परमाणु ईंधन जलेगा, उससे अधिक नया ईंधन बनेगा
पारंपरिक ऊर्जा संयंत्रों के उलट, यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अपने संचालन के दौरान जितना परमाणु ईंधन जलाता है, उससे कहीं अधिक नया ईंधन (फिसाइल सामग्री) पैदा करता है। इसके कोर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है, जिसके चारों ओर यूरेनियम-238 का एक ब्लैंकेट रखा जाता है। जब एक रसायनिक प्रतिक्रिया पूरी हो जाती है तो इसी दौरान उच्च गति वाले न्यूट्रॉन एक रिएक्शन के बाद बेकार माने जाने वाले यूरेनियम-238 को ताजा प्लूटोनियम में बदल देते हैं। इसका इस्तेमाल एक बार फिर नए ईंधन के रूप में किया जा सकता है। एक तरह से कहें तो यह कभी न खत्म होने वाला ईंधन बन जाता है।
भारत के लिए कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र इसलिए है खास
दुनियाभर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र मौजूदा समय में लाइट वॉटर रिएक्टरों का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें ईंधन के तौर पर यूरेनियम लगता है। हालांकि, दुनिया में यूरेनियम के भंडार लगातार घट रहे हैं और नए भंडार की कम मौजूदगी की वजह से धीरे-धीरे खात्मे की कगार पर पहुंचने वाले हैं। भारत के पास भी यूरेनियम के भंडार काफी कम हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत के पास दुनिया का केवल एक प्रतिशत यूरेनियम है। हालांकि, फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की खास बात यह है कि पारंपरिक रिएक्टर्स से इतर इनमें ईंधन के तौर पर प्लूटोनियम और थोरियम का भी इस्तेमाल हो सकता है।
पीएम मोदी ने देश की असैन्य परमाणु यात्रा में निर्णायक कदम बताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर ली है। यह उन्नत रिएक्टर, जो खपत से अधिक ईंधन उत्पादन करने में सक्षम है, हमारी वैज्ञानिक क्षमता की गहराई और इंजीनियरिंग कौशल की शक्ति को दर्शाता है। यह कार्यक्रम के तीसरे चरण में हमारे विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उनके साथ-साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर, देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने भी इस उपलब्धि की चर्चा शुरू कर दी।
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026
इस सफलता से दुनिया के सबसे विशिष्ट क्लब में आया भारत
दुनिया में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की तकनीक अत्यंत जटिल है। अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे कई विकसित देशों ने तरल सोडियम को सुरक्षित रूप से संभालने में विफलता और अन्य वित्तीय चिंताओं के कारण अपने कार्यक्रमों को बंद कर दिया। इसके व्यावसायिक रूप से ग्रिड से जुड़ने के बाद, रूस के बाद भारत दुनिया का केवल दूसरा देश बन जाएगा जिसके पास वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा। चूंकि यह रिएक्टर पहले चरण के रिएक्टरों से निकले इस्तेमाल किए गए ईंधन का दोबारा इस्तेमाल करता है, यह परमाणु कचरे की मात्रा को कई गुना कम कर देता है। इसके अलावा, थोरियम रिएक्टरों से निकलने वाले कचरे में ऐसे आइसोटोप नहीं होते, जिनकी हाफ-लाइफ 35 वर्ष से ज्यादा हो, जिससे कचरे को लंबे समय तक विशाल भूमिगत स्टोरेज में डंप करने की चिंता काफी कम हो जाती है।
भारत में है वैश्विक थोरियम भंडार का लगभग 25 फीसदी हिस्सा
एक आंकलन के मुताबिक, वैश्विक थोरियम भंडार का लगभग 25 फीसदी हिस्सा भारत में,खासकर दक्षिण भारत की तटीय रेत में मौजूद है। यह भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा थोरियम का भंडार बनाता है। थोरियम को जब तेज रफ्तार के न्यूट्रॉन के संपर्क में लाया जाता है तो यह यूरेनियम-233 पैदा करता है। यानी थोरियम सीधे तौर पर एक बेहद कीमती परमाणु तत्व में बदल जाता है। कलपक्कम का यह रिएक्टर इसी काम में माहिर है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर यह सफल होता है तो भारत अपने थोरियम भंडार से वर्षों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा।
क्रिटिकैलिटी किसी परमाणु रिएक्टर के संचालन के लिए बहुत ही खास
कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ऐतिहासिक क्रिटिकैलिटी हासिल करने की वजह से चर्चा में आया है। दरअसल, क्रिटिकैलिटी किसी परमाणु रिएक्टर के संचालन की वह खास स्थिति है, जिसमें परमाणु विखंडन की शृंखला प्रतिक्रिया (चेन रिएक्शन) स्थिर हो जाती है और यह प्रतिक्रिया लगातार जारी रखने में सक्षम हो जाती है। इसका मतलब है कि यह रिएक्टर अब बिना किसी बाहरी दखल के मौजूदा ईंधन के जरिए ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, यह बताना भी अहम है कि क्रिटिकैलिटी हासिल करना सीधे तौर पर बिजली पैदा करना नहीं है, बल्कि यह उसके लिए सबसे जरूरी और पहली शर्त है। अब इस रिएक्टर की क्षमता और कुशलता को समझने के लिए कम-क्षमता वाले कुछ परीक्षण किए जाएंगे, जिसके बाद इसे पावर ग्रिड से जोड़कर बिजली उत्पादन शुरू किया जा सकता है।
कमर्शियल ग्रिड से जोड़ा तो भारत दुनिया का दूसरा देश बनेगा
अगर यह संयंत्र सारे प्रयोगों में सफल हो जाता है और इसे बिजली पैदा करने के लिए वाणिज्यिक यानी कमर्शियल ग्रिड से जोड़ दिया जाता है तो भारत दुनिया का सिर्फ दूसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास व्यावसायिक रूप से संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा। अब तक यह उपलब्धि सिर्फ रूस के पास ही मौजूद है। इतना ही नहीं यह भारत के तीन-चरण के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की सबसे बड़ी सफलता है। यह उपलब्धि भविष्य में (तीसरे चरण में) भारत के विशाल थोरियम भंडार का ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करने का रास्ता साफ करती है।
भारत के लिए यह उपलब्धि कितनी बड़ी साबित होने वाली है
आने वाली चार शताब्दियों की ऊर्जा सुरक्षा: भारत के पास यूरेनियम का भंडार भले ही दुनिया का एक प्रतिशत हो, लेकिन वैश्विक थोरियम का लगभग 25 प्रतिशत भंडार भारत में मौजूद है। वर्तमान में भारत अपने ऊर्जा स्रोतों के लिए आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इस रिएक्टर की सफलता के बाद भारत अपने थोरियम भंडार का उपयोग करके अगले 400 वर्षों तक 500 गीगावाट (जीडब्ल्यू) बिजली उत्पन्न करने में सक्षम हो सकता है। यह एक तरह से आत्मनिर्भरता और तीसरे चरण का प्रवेश द्वार है। यह ऐतिहासिक कदम भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा की तरफ से तैयार किए गए तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण में प्रवेश करने के लिए एक निर्णायक कदम है। इसके जरिए भारत आखिरकार परमाणु ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है और उसे विदेशी परमाणु ईंधन का आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मिशन 2047: मोदी सरकार का 100 गीगावाट का महा-लक्ष्य
भारत की ऊर्जा जरूरत को देखते हुए सरकार ने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है। 2031-32 तक निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पूरे होने पर हमारी क्षमता बढ़कर 22,380 मेगावाट (लगभग 22 GW) हो जाएगी और साल 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल मना रहा होगा, तब सरकार का लक्ष्य 100 गीगावाट (100 GW) परमाणु बिजली पैदा करने का है। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार ने ‘शांति’ (SHANTI) एक्ट भी लागू किया है, ताकि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ सके और काम में तेजी आए। कलपक्कम की यह कामयाबी सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है. ये हर भारतीय के घर को बिना प्रदूषण वाली ‘सस्ती और निर्बाध’ बिजली देने का वादा है।
देश को जितनी जरूरत, उससे भी ज्यादा बिजली पैदा होगी
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ अजीत कुमार मोहंती इस सफलता को ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हैं। उन्होंने कहा, ‘कलपक्कम का ये स्वदेशी रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन पैदा करेगा, जो भारत के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के लिए निर्णायक है। ये उपलब्धि भविष्य में भारत के प्रचुर थोरियम भंडार के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे हम ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेंगे। जानकारों का कहना है कि जब ये रिएक्टर पूरी क्षमता से काम करना शुरू करेगा, तो भारत न केवल एक परमाणु महाशक्ति बनेगा, बल्कि नेट-जीरो उत्सर्जन (2070) के लक्ष्य की ओर भी तेजी से कदम बढ़ाएगा। भारत का ‘न्यूक्लियर युग’ अब सही मायने में शुरू हुआ है।
आर्थिक लाभ और बाहरी संकटों से बचाव के साथ स्वच्छ ऊर्जा
यूरेनियम की तरह ही थोरियम से बिजली पैदा करने पर कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित नहीं होती है, जिससे यह ऊर्जा का एक बहुत ही स्वच्छ स्रोत बन जाता है। पीएम मोदी सरकार के मुताबिक, यह भारत को अपने नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में भी काफी मदद करेगा। देश को सस्ती और प्रचुर मात्रा में बिजली मिलने से खाना पकाने और परिवहन के लिए आयातित गैस, पेट्रोल और डीजल पर हमारी निर्भरता कम हो सकती है। इसके अलावा, आयात कम होने से पश्चिम एशिया में तनाव (जैसे हालिया युद्ध और लाल सागर संकट) जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण आने वाले तेल और गैस संकट से भी भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सुरक्षित हो जाएगी।
भारत को दुनियाभर से मिली बधाइयां, पाक को मिर्ची लगी
भारत ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अभूतपूर्व कामयाबी हासिल करने से पड़ोसी पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है। पाकिस्तान ने भारत PFBR रिएक्टर में सफलता पर चेतावनी जारी करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर और स्ट्रैटजिक प्लान्स डिवीजन के सदस्य जाहिर काजमी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने भारत की इस ऐतिहासिक कामयाबी पर ‘अलर्ट’ जारी किया है। उन्होंने लिखा है ‘तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की घोषणा हो चुकी है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि भारत ने PFBR रिएक्टर में सफलता हासिल कर ली है। दुनियाभर से इसको लेकर बधाई संदेश मिल रहे हैं। सबसे खास बात ये है कि भारत का ये प्रोजेक्ट बिल्कुल स्वदेशी है। इसे भारत के एनर्जी सेक्टर के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। बहुत आसान शब्दों में समझें तो भारत ने ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में दुनिया के सबसे उन्नत देशों की कतार में अपनी जगह पक्की कर ली है। आने वाले वक्त में भारत को इससे जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता लगातार कम करने में मदद मिलेगी।









