प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार, 6 अप्रैल को बीजेपी के स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी आज जिस ऊंचाई पर है, वह लाखों कार्यकर्ताओं के संघर्ष, सेवा और संकल्प का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कार्यकर्ताओं के समर्पण ने ही बीजेपी को इस मुकाम तक पहुंचाया, और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना ही पार्टी की सबसे बड़ी पहचान बनी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत कार्यकर्ताओं के योगदान को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब पार्टी के पास न संसाधन थे और न सत्ता, लेकिन कार्यकर्ताओं का विश्वास और समर्पण अटूट था। ‘एक पैर रेल में और दूसरा जेल में’- इस जज्बे के साथ कार्यकर्ताओं ने पार्टी को मजबूत किया। उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में कार्यकर्ताओं ने दमन और साजिशों का सामना किया, लेकिन पीछे नहीं हटे। पीएम मोदी ने बंगाल और केरल में राजनीतिक हिंसा का जिक्र करते हुए उन कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने पार्टी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी की सफलता के पीछे नीयत, नीति और निष्ठा की लंबी यात्रा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरणा लेकर पार्टी ने शुचिता और सेवा की राजनीति को अपनाया। उन्होंने बताया कि पार्टी ने खुद को एक मजबूत कैडर-बेस्ड संगठन के रूप में खड़ा किया, जहां कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी ताकत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने हमेशा जनसेवा को प्राथमिकता दी। संसाधनों की कमी के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता हर आपदा और सामाजिक बदलाव में लोगों के साथ खड़े रहे। यही वजह है कि समय के साथ जनता का विश्वास बीजेपी पर बढ़ता गया।
उन्होंने 1984 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भले ही कांग्रेस को बड़ी जीत मिली, लेकिन जनता धीरे-धीरे सेवा आधारित राजनीति की ओर आकर्षित हो रही थी। पीएम मोदी ने कहा कि देश की राजनीति में दो धाराएं बनीं एक सत्ता की और दूसरी सेवा की। और अंततः सेवा की राजनीति को जनता का समर्थन मिला। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि बीजेपी ने ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धांत स्थापित किया है। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना ही पार्टी की पहचान बन गया है।
भाजपा के आने से देश की राजनीति में दो धाराएं स्पष्ट हो गई। एक धारा बनी सत्ता आधारित राजनीति तो दूसरी धारा बनी सेवा आधारित राजनीति।
सत्ता को प्राथमिकता देने वाली राजनीति का धीरे धीरे पतन होने लगा और सेवा आधारित राजनीति को धीरे धीरे लोगों का भारी समर्थन मिलने लगा।
आज हमें इस बात… pic.twitter.com/uhzL7Hh0cs
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) April 6, 2026
गठबंधन राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने एनडीए का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एनडीए 25 साल से अधिक समय से राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए काम कर रहा है और इसका लगातार विस्तार पार्टी की समावेशी सोच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी का गवर्नेंस मॉडल स्थिरता और भरोसे पर आधारित है। ‘जो कहते हैं, वो करते हैं’- यह पार्टी की पहचान बन चुकी है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने वर्षों पहले महिला आरक्षण का संकल्प लिया था और अब उसे पूरा किया गया है।
गरीबी उन्मूलन पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अंत्योदय के सिद्धांत पर चलते हुए सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता पाई है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को इसका आधार बताया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि यह पार्टी के पुराने संकल्पों में से एक था, जिसे पूरा किया गया। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को भी याद किया।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानी Goods and Services Tax (GST), ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ जैसे कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि ये देश को एक सूत्र में पिरोने के प्रयास हैं। साथ ही नई शिक्षा नीति के जरिए मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज का भारत दुनिया से दूरी नहीं, बल्कि नजदीकी बनाकर चल रहा है। पर्यावरण और विकास के संतुलन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित किया है कि तेज आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। सौर ऊर्जा क्षमता में हुई बड़ी बढ़ोतरी को उन्होंने इसका उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई बड़े फैसलों का जिक्र किया, जैसे तीन तलाक पर रोक, सीएए कानून, नए संसद भवन का निर्माण और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम पार्टी के संकल्प और ईमानदार प्रयासों का परिणाम हैं। भविष्य की योजनाओं पर बोलते हुए पीएम मोदी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन पर देश में गंभीर चर्चा हो रही है और सकारात्मक दिशा में काम जारी है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे निःस्वार्थ भाव से काम करते रहें, ताकि देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।









