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बढ़ते ग्लोबल चैलेंजेज के बीच वैश्विक संस्थाओं में सुधार अब आवश्यक ही नहीं, अति आवश्यक- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के बीच 5 मार्च को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौता ज्ञापनों पर दस्तखत किए गए। राष्ट्रपति स्टब के साथ संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया जिन ग्लोबल चैलेंजेज से जूझ रही है, उनका समाधान पुराने ढांचे पर चल रही वैश्विक संस्थाओं से संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन संस्थाओं का रिफॉर्म अब केवल आवश्यक ही नहीं, बल्कि अति आवश्यक हो गया है।

प्रधानमंत्री मोदी का इशारा संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की ओर था, जो दशकों पुराने ढांचे पर टिकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन संस्थाओं में व्यापक सुधार नहीं होगा, तब तक दुनिया में बढ़ते संघर्षों और अस्थिरता का ठोस समाधान निकालना मुश्किल रहेगा। पीएम मोदी ने यह भी साफ किया कि सैन्य संघर्ष किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। शांति केवल डायलॉग और डिप्लोमेसी के जरिए ही संभव है, और इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय मंचों का होना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, भारत संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करना भी वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। इसके लिए दुनिया के देशों को एक सुर में आवाज उठाने की जरूरत है। भारत और यूरोप को दुनिया की दो बड़ी diplomatic powers बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड जैसे लोकतांत्रिक देश रूल ऑफ लॉ में विश्वास रखते हैं और वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि अलेक्जेंडर स्टब केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक थिंकर, लेखक और एथलीट के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्टब ने ‘आयरनमैन ट्रायथलॉन’ पूरा किया है। इसी संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा कि अब भारत और फिनलैंड मिलकर इनोवेशन, डिजिटल और सस्टेनेबिलिटी का एक नया “ट्रायथलॉन” पूरा करेंगे। राष्ट्रपति स्टब की यह भारत यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि वे रायसीना डायलॉग के मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए हैं।

साल 2026 की शुरुआत में हुए भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता फिनलैंड और भारत के बीच निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग के नए रास्ते खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि नोकिया के मोबाइल फोन ने करोड़ों भारतीयों के हाथों में तकनीक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन अब यह साझेदारी केवल मोबाइल फोन तक सीमित नहीं है। फिनलैंड के आर्किटेक्ट्स की मदद से चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बनाया गया है, जो दोनों देशों के सहयोग का बड़ा उदाहरण है। इतना ही नहीं, असम के नुमालीगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी ‘बैंबू टू बायो-एथेनॉल’ रिफाइनरी भी फिनलैंड के सहयोग से स्थापित की गई है। ये प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि कैसे फिनलैंड की तकनीक और भारत की जरूरतें मिलकर नए समाधान तैयार कर रही हैं।

अब नई स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत भारत और फिनलैंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6G टेलीकॉम, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्लीन एनर्जी जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में साथ काम करेंगे। यह सहयोग केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें दोनों देशों के रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और प्राइवेट सेक्टर की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

डिफेंस, स्पेस, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी दोनों देश सहयोग को और गहरा करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड जैसे जिम्मेदार देश मिलकर दुनिया के लिए भरोसेमंद टेक्नोलॉजी और सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करने में योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फिनलैंड भारतीय छात्रों और प्रतिभाओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। इसी दिशा में दोनों देशों ने एक व्यापक माइग्रेशन एंड मोबिलिटी एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए फिनलैंड में पढ़ाई और काम के अवसर और अधिक व्यवस्थित तथा सुलभ होंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्डिक क्षेत्र में फिनलैंड भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देश अब आर्कटिक और पोलर रिसर्च के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए एक “स्वस्थ ग्रह” दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। इसी कड़ी में इस वर्ष भारत, फिनलैंड के सहयोग से वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी करेगा। इस मंच के जरिए सस्टेनेबिलिटी और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ जैसे विचारों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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