प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, 31 मार्च को भगवान महावीर जयंती के अवसर पर गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की हजारों साल पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया ने हमेशा मत और पंथ के नाम पर टकराव देखे हैं, वहीं यह संग्रहालय भारत की उस महान सोच का प्रतीक है जो सभी धर्मों के गौरवशाली दर्शन को एक साथ समेटे हुए है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘इस म्यूजियम में भारत की सबसे बड़ी विशिष्टता के, सबसे बड़ी ताकत के दर्शन होते हैं। हमारी ताकत है- भारत की विविधता और विविधता में एकता। दुनिया ने हमेशा मत, मजहब और आस्था के नाम पर टकराव देखा है, लेकिन, इस म्यूजियम में भारत के दूसरे सभी धर्मों के भी गौरवशाली दर्शन होते हैं। वैदिक और बौद्ध परंपरा, वेद, पुराण, आयुर्वेद, योग, दर्शन, विभिन्न परंपराओं के सभी रंग एक साथ इंद्रधनुष की तरह उपस्थित हों, ये भारत में ही हो सकता है।’

पीएम मोदी ने कहा कि सम्राट संप्रति केवल एक ऐतिहासिक राजा नहीं थे, बल्कि विचार और व्यवहार को जोड़ने वाले एक सेतु थे। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई शासकों ने सत्ता के लिए आदर्शों को छोड़ दिया, लेकिन सम्राट संप्रति ने सिंहासन पर बैठकर भी अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का विस्तार किया। उन्होंने सत्ता को शासन नहीं, बल्कि सेवा और साधना का माध्यम बनाया।

प्रधानमंत्री ने संग्रहालय की संरचना और उसकी सात दीर्घाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर दीर्घा भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है। नवपद, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र जैसे सिद्धांत न केवल जैन धर्म की नींव हैं, बल्कि पूरी मानवता को दिशा देने वाले मूल मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और प्राचीन दर्शन का यहां एक साथ होना किसी इंद्रधनुष के समान है, जो केवल भारत की मिट्टी में ही संभव है।

पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि गुलामी की मानसिकता के कारण हमारी अमूल्य पांडुलिपियों की उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने तक्षशिला और नालंदा जैसी ज्ञान की धरोहरों को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन हमारे संतों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन संपदाओं को सहेज कर रखा। आचार्य भगवंत श्री पद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज जैसे संतों के प्रयासों से ही आज 3 लाख से ज्यादा पांडुलिपियां यहां सुरक्षित हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्राचीन ज्ञान के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया है। इस मिशन के तहत आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन, स्कैनिंग और केमिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने पास सुरक्षित प्राचीन दस्तावेजों को इस मिशन के तहत साझा करें ताकि भारत का सांस्कृतिक अभ्युदय हो सके।

आखिर में प्रधानमंत्री ने जनता के सामने 10 संकल्पों को दोहराया, जिसमें जल संरक्षण, स्वच्छता, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और विरासत के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और परिवारों से अपील की कि वे इस संग्रहालय में सिर्फ घूमने न आएं, बल्कि भारत के इस अमूल्य खजाने को समझने और महसूस करने का प्रयास करें।









