प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 15 जनवरी को ‘संविधान सदन’ के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने न केवल भारत की विकास गाथा सुनाई, बल्कि दुनिया को यह भी बताया कि लोकतंत्र सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत का संस्कार है। उन्होंने कहा कि जिस सेंट्रल हॉल में आज मेहमान बैठे हैं, वहीं आजादी से पहले संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठकें हुई थीं। आज इसे संविधान सदन कहा जाता है और यह भारत की 75 साल की लोकतांत्रिक यात्रा का गवाह है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत बड़े ही हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में ‘स्पीकर’ का रोल बड़ा दिलचस्प होता है। नाम ‘स्पीकर’ है, लेकिन उन्हें बोलना कम और सुनना ज्यादा पड़ता है। प्रधानमंत्री ने उनकी सहनशीलता की तारीफ करते हुए कहा कि वे शोर-शराबे के बीच भी मुस्कुराते हुए सदन चलाते हैं।

पीएम मोदी ने सम्मेलन के मुख्य विषय ‘Effective Delivery of Parliamentary Democracy’ पर जोर देते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र का असली पैमाना ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ है। उन्होंने गर्व से साझा किया कि इसी लोक कल्याणकारी भावना की वजह से भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी की बेड़ियों से आजाद हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र इसलिए काम करता है क्योंकि जनता यहां सबसे ऊपर है। पीएम मोदी ने बताया कि प्रक्रियाओं से लेकर तकनीक तक हर चीज को लोकतांत्रिक बनाया गया है। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संकट के दौर में भी भारत ने 150 से ज्यादा देशों को दवाइयां और वैक्सीन भेजीं। लोगों की भलाई और कल्याण भारत के लोकतांत्रिक संस्कार हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त आशंका जताई गई थी कि इतनी विविधता वाला भारत लोकतंत्र नहीं संभाल पाएगा। लेकिन भारत ने इसी डायवर्सिटी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने साबित कर दिया है कि मजबूत डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस देश को स्थिरता, तेजी और बड़े पैमाने पर विकास – तीनों देते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत सैकड़ों भाषाओं और हजारों मीडिया संस्थानों वाला देश है। इतनी विविधता को संभालना आसान नहीं, लेकिन भारत का लोकतंत्र इसे उत्सव की तरह मनाता है। उन्होंने भारत को Mother of Democracy बताते हुए वैदिक काल, बुद्ध के संघ और तमिलनाडु की प्राचीन ग्राम सभाओं का जिक्र किया, जहां संवाद और सहमति से फैसले लिए जाते थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। यूपीआी दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है।मउन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक, दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। एविएशन, रेल और मेट्रो नेटवर्क में भी भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है। कृषि और दुग्ध उत्पादन का हवाला देते हुए पीएम ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।

प्रधानमंत्री ने 2024 के आम चुनावों को मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास बताया। करीब 98 करोड़ मतदाता, 8 हजार से ज्यादा उम्मीदवार और 700 से ज्यादा राजनीतिक दल इसमें शामिल थे। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं की भागीदारी का जिक्र किया। पीएम ने कहा कि आज भारत की राष्ट्रपति महिला हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में करीब 15 लाख महिला प्रतिनिधि हैं, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। यह भारत की लोकतांत्रिक मजबूती को दिखाता है।

कॉमनवेल्थ देशों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संगठन की करीब 50 फीसदी आबादी भारत में रहती है। भारत सभी सदस्य देशों के विकास में योगदान देना चाहता है। स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भारत अपने सभी कमिटमेंट पूरे कर रहा है और अपने अनुभव भी साझा कर रहा है। ग्लोबल साउथ का मुद्दा उठाते हुए पीएम ने कहा कि भारत हर वैश्विक मंच पर उसकी आवाज मजबूती से रख रहा है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी यही प्रयास किया गया।

उन्होंने बताया कि भारत ओपन सोर्स टेक प्लेटफॉर्म बना रहा है, ताकि ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों को भारत जैसे सिस्टम अपनाने में मदद मिल सके। सम्मेलन के उद्देश्य पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संसद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लोगों से जोड़ना बेहद जरूरी है, जिसमें स्पीकर्स और प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स की बड़ी भूमिका है। उन्होंने बताया कि भारत की संसद स्टडी टूर, ट्रेनिंग प्रोग्राम और इंटर्नशिप के जरिए लोगों को संसद से जोड़ रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि संसद में AI की मदद से बहसों का रियल टाइम अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी संसद को बेहतर समझ सके। अपने अनुभव साझा करते हुए पीएम ने कहा कि वे अब तक कॉमनवेल्थ के 20 से ज्यादा देशों में जा चुके हैं और हर संसद से कुछ न कुछ सीखकर आए हैं। अंत में पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सीखने-सिखाने की परंपरा को और मजबूत करेगा और सभी देशों के लोकतंत्र को नई दिशा देगा।









