पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 01 अप्रैल को 7 लोक कल्याण मार्ग पर सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मौजूदा हालात के असर की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पिछले एक महीने में इस मुद्दे पर यह दूसरी विशेष बैठक है, जो सरकार की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है।
बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर देश के आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे हर संभव कदम उठाकर जरूरी सेवाओं और सप्लाई को सुचारू बनाए रखें। साथ ही, उन्होंने सही और समय पर जानकारी जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि अफवाहों और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।
कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई को लेकर सरकार पूरी तरह तैयार है। आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए अलग-अलग देशों से गैस खरीदने की रणनीति अपनाई जा रही है। खास बात यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी पर भी सख्ती दिखा रही है। ‘एंटी-डायवर्जन’ अभियान के तहत गैस के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही, पाइप गैस कनेक्शन के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को स्थिर और सुविधाजनक विकल्प मिल सके।
गर्मियों में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए सरकार ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। 7-8 गीगावाट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग तंत्र से छूट दी गई है। साथ ही, थर्मल पावर स्टेशनों तक पर्याप्त कोयला पहुंचाने के लिए रेलवे रेक की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित न हो।
कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। यूरिया उत्पादन को बनाए रखा जा रहा है और डीएपी व एनपीकेएस जैसे उर्वरकों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से समन्वय बढ़ाया गया है। राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक मिल सके।

खाद्य कीमतों पर भी सरकार की नजर बनी हुई है। पिछले एक महीने से जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें स्थिर हैं। इस स्थिति को बनाए रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जो राज्यों के साथ मिलकर लगातार निगरानी कर रहे हैं। फल और सब्जियों की कीमतों पर भी रीयल-टाइम नजर रखी जा रही है, ताकि आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित न हो।
वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारत कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में संभावित चुनौतियों से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री ने केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों तक तुरंत और सटीक जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर, सरकार का फोकस साफ है – वैश्विक संकट के बीच देश में जरूरी सामानों की उपलब्धता, कीमतों की स्थिरता और आम नागरिकों के हितों की हर हाल में रक्षा सुनिश्चित करना।









