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कोरोना पीड़ित एक मां की मार्मिक कविता पढ़कर भावुक हुए पीएम मोदी, चिट्ठी लिखकर अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ किया प्रोत्साहित

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में मानवीय संवेदना कूट-कूटकर भरी है। जब भी उनके सामने जीवन से जुड़ी कोई मर्मस्पर्शी बातें और घटनाएं समाने आती हैं, तो उनके अंदर का भावुक मन परेशान हो जाता है। वह हरसंभव मदद करने और पीड़ा कम करने के लिए खुद पहल करते हैं। हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कई परिवारों ने हौसले के साथ काम लिया और दूसरी लहर का डटकर सामना किया। इसी तरह गाजियाबाद के वसुंधरा में रहने वाली कोरोना पीड़ित एक मां ने हालात का हिम्मत के साथ सामना किया और एक मार्मिक कविता लिखी,जिसे पढ़कर प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए और चिट्ठी लिखकर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। 

पीएम मोदी का पत्र मिलने से परिवार में खुशी 

प्रधानमंत्री मोदी के खत आने के बाद गाजियाबाद के वसुंधरा में रहने वाले गगन कौशिक और उसका परिवार फूला नही समा रहा है। खत लिखने की वजह है गगन की पत्नी पूजा वर्मा। प्रधानमंत्री मोदी को पूजा की एक मार्मिक कविता काफी पसंद आई। इसलिए सबसे पहले पीएमओ से इस परिवार को फोन आया, फिर प्रधानमंत्री मंत्री की चिट्ठी।

जानिए प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में क्या लिखा ? 

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेजी गई चिट्ठी में लिखा है,” कोरोना से लड़ते वक्त अपने बच्चे से अलग रहते हुए आपने एक मां के मन में उभरने वाले विचारों, को जिस तरह से शब्दों में डाला है, वह भावुक करने वाला है। कविताएं संवाद का एक सशक्त माध्यम है। मन के विचारों और भावों को शब्दों में गढ़कर अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता कविताओं में है। आपकी कविता एक मां की ममता, स्नेह, बच्चे से दूर रहने पर उसकी चिंता, उसकी व्याकुलता ऐसा अनेकभावों को समेटे हैं।”

कोरोना की चपेट में आने के बाद बेटे की चिंता

गगन के परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी पूजा वर्मा और 6 साल का बेटा अक्ष है। दोनों पति पत्नी पेशे से इंजीनियर हैं। जब पूरे देश मे कोरोना की दूसरी लहर थी, उस वक्त पूजा का परिवार भी कोरोना की चपेट आ गया। एकल परिवार होने के चलते दोनों लोग होम आइसोलेशन में चले गए। तीन कमरों के फ्लैट में पति-पत्नी अलग-अलग कमरों में आइसोलेट हो गए, जबकि अक्ष को एक अलग कमरे में रखा। कोरोना की चपेट में आने के बाद पूजा और गगन ने सूझबूझ से, बेटे को कोरोना की चपेट में नहीं आने दिया। 

6 साल के मासूम का माता-पिता के साथ संघर्ष

गगन ने बेटे के लिए बाहर होटल से खाना आर्डर कर दिया। इस बीच 6 साल का अक्ष अपना पूरा काम खुद करता था। एक मां सब कुछ देखते रह जाती थी लेकिन बच्चे की मदद तक नही कर पा रही थी, बेबस थी। 6 साल का अक्ष बार बार दिन गिनता, घर में रहती मां से वीडियो कॉल करता था। किसी ना किसी बहाने से मां को बुलाता था। काफी दरवाजे से झांकता, तो कभी बालकनी से अपनी मां को निहारता रहता था। इसी बेबसी को एक मां ने कविता की शक्ल दी, फिर उसे पोस्ट किया।

कविता के रूप में बेबस मां का दर्द आया सामने  

पूजा का कहना है कि बेशक मैंने उस बुरे वक्त में अपने बेटे के साथ-साथ परिवार को भी समायोजित करके रखा। लेकिन इस दौरान एक मां होने के नाते अपनी भावनाओं को समायोजित नहीं कर पाई। यही कारण रहा कि मैंने एक कविता लिखी और उस कविता को अपने प्रधानमंत्री को भेजने के लिए भी प्रेरित हुई। जब मैंने मेरे द्वारा लिखी गई कविता भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री को भेजी तो मुझे यकीन नहीं था कि इसका जवाब आएगा।

प्रधानमंत्री मोदी को भेजी गई कविता “कोविड में मां की मजबूरी”

जाली के पीछे से मेरा लाल झांक रहा है, 

मासूम आंखों से मजबूर मां को ताक रहा है, 

कभी कहता है मैं, मम्मी, मम्मा नाराज हो क्या? 

न जाने कितने जतन किये मां को पास बुलाने के

आंखों में आंसू लेकर कहता आज तो मेरे पास सोओगी न? 

नींद नहीं आती मुझे, आपके साथ के बिना

चाहे तो मुझे बस सुला के चली जाना मां, मम्मी, मम्मा.

जाली के पीछे से मेरा लाल झांक रहा है

ये कैसी मजबूरी है, ये कैसी दूरी है? 

पास होकर भी मां बेटे में दो गज की दूरी है, 

ये कैसी महामारी, ये कैसी आपदा आई है जग में

मां की ममता, पिता का प्यार आज है लाचार

मां का दिल रह रह कर गले लगना चाहे लाल तुझे

एक पल जिसे ओझल न होने दिया अपनी आंखों से, 

जाली से पीछे से मेरा लाल झांक रहा है

क्या क्या बहाने मैं बनाता मां को पास बुलाने के

कभी कहता नहला दो, कभी कहता प्यारी मम्मी

कपड़े कुछ गीले हो गए हैं, बदल दो न

अच्छा ये तो बताओ, कल तो मेरे पास सोओगी न? 

नहीं बेटा, अबी तो चौदह दिन की और बात है

फिर कहता, चौदह मतलब कितने ? 

वन, टू, थ्री और आज कौन सा दिन है ? 

ये सब सुनकर जार जार रोता मां का मजबूर दिल है

क्यों जाली के पीछे से मेरा लाल झांक रहा है

क्यों ये बीमारी है आई, क्यों ये दूरी बनाई

दूर रहकर भी अपने लाल को सीने से लगाया मां ने

ढेरों आशीष देकर बलाओं से बचाया मां ने… 

 

 

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