प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 08 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी और उस अटूट विश्वास को याद किया जिसने हजारों साल से सोमनाथ की महिमा को जीवित रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत के स्वाभिमान और अदम्य साहस का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘जय सोमनाथ! सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और सशक्त हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा। मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। यदि आप भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ जरूर शेयर करें।’
जय सोमनाथ !
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना… pic.twitter.com/dDXCPf1TMM
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि कई शताब्दियों तक आक्रमण होते रहे, लेकिन भक्तों की अटूट आस्था और भारत के संकल्प ने यह सुनिश्चित किया कि मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण हो। उन्होंने उन वीरों को नमन किया जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि ‘#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का ये अवसर, हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।’
#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा…
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प्रधानमंत्री ने मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल और केएम मुंशी के योगदान को याद किया। उन्होंने उस कार्यक्रम का भी जिक्र किया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में मंदिर के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया था।
अपने अगले पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा कि ‘मैं 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपसे साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की मौजूदगी में संपन्न हुआ था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी जी के साथ ही कई महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। साल 2001 के इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी और गृह मंत्री आडवाणी जी और कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे। वर्ष 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं!’
मैं 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपसे साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की… pic.twitter.com/pA8ob5jgE5
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सोमनाथ का पुनरुद्धार केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा खड़ा करना नहीं था, बल्कि एक सोई हुई सभ्यता के आत्म-सम्मान को जगाने का प्रयास था। यह मील का पत्थर हमारी सभ्यता की उस भावना का प्रतीक है, जो कभी हार नहीं मानती और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।









