‘अरे वाह! आपने तो कमाल कर दिया… नमस्ते बेटा, सत श्री अकाल!’- ये शब्द किसी घर के बड़े बुज़ुर्ग के नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के थे। ‘परीक्षा पे चर्चा’ में जब पीएम मोदी छात्रों से रूबरू हुए, तो मंच पर पीएम नहीं, एक दोस्त नजर आया।
This is why the moment mattered
A student shared that she has the same birthday as PM @narendramodi and felt inspired after seeing him. It turned into a special moment as children spoke about his warmth and the ease with which he connects with them.#ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/teFlAqZswc
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इस बार परीक्षा पे चर्चा सिर्फ सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रही। यह एक खुली और दिल से निकली बातचीत बन गई। देश के अलग-अलग कोनों से आए बच्चों से पीएम मोदी ने जिस अपनापन और सहजता से संवाद किया, उसने पूरे माहौल को हल्का, भरोसेमंद और उत्साह से भरा बना दिया।
Exam pressure was loud. The calm was louder.
Catch how #ParikshaPeCharcha26 flipped the classroom mood. pic.twitter.com/9qe7rFqfpu
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कार्यक्रम की शुरुआत ही सरप्राइज से हुई। जैसे ही प्रधानमंत्री छात्रों के सामने आए, बच्चों की आंखें खुली की खुली रह गईं। रिमोट बॉर्डर टाउन से आई मानसी हों या सिक्किम की श्रेया- सबको लगा था कि कार्यक्रम औपचारिक होगा, लेकिन पीएम मोदी का यूं अचानक सामने आ जाना किसी सपने जैसा था। ठंड और घबराहट गायब हो गई, और जगह ले ली मुस्कान और जोश ने।
Pure Love from every corner of India. #ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/MpjP9MYqsf
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संवाद की शुरुआत हुई एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल से। गुजरात की सानवी ने सवाल किया- जब पेरेंट्स, टीचर्स और दोस्त तीनों अलग-अलग पढ़ाई का तरीका बताते हैं, तो सही क्या है? प्रधानमंत्री मोदी ने खाने की थाली का उदाहरण देते हुए बात आसान कर दी। उन्होंने कहा, जैसे हर किसी का खाने का तरीका अलग होता है, हर भाई-बहन के खाने का तरीका अलग होता है, वैसे ही पढ़ाई का भी अपना पैटर्न होता है। दूसरों की कॉपी मत करो, अपने पैटर्न पर भरोसा रखो।
आप अपने पैटर्न पर पूरा भरोसा रखे, लेकिन जो पैटर्न के लिए सुझाव मिलते है, उन्हें पूरा ध्यान से सुने, समझने की कोशिश करें। जो आपको ठीक लगता है अपने लिए; उन्हें अपने पैटर्न में जोड़ने की कोशिश करें।
– पीएम @narendramodi #ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/pU8SCEN8gG
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मणिपुर के छात्र आयुष ने जब सिलेबस पीछे छूट जाने का डर बताया, तो पीएम ने उन्हें एक ‘सीक्रेट’ मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अगर आप जनवरी के पहले हफ्ते में ही जान लें कि तीसरे हफ्ते में क्या पढ़ाया जाना है, और उसे थोड़ा पहले से देख लें, तो क्लास में आप टीचर से एक कदम आगे होंगे। जब आप आगे हों, तो पीछे रहने का डर खुद खत्म हो जाता है।
मन को जोतो,
फिर मन को जोड़ो और फिर
आपको पढ़ाई के जो विषय रखने है रखो।
तो हमेशा आप स्टूडेंट को सफल पाओगे।शिक्षकों के लिए प्रधानमंत्री @narendramodi की सलाह। #ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/cGnErlX08B
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वेंकटेश के ‘मार्क्स या स्किल’ के सवाल पर प्रधानमंत्री ने बैलेंस की बात की। उन्होंने कहा कि लाइफ स्किल और प्रोफेशनल स्किल दोनों जरूरी हैं। शिक्षा और स्किल जुड़वां भाई-बहन हैं। अगर आपको वकील बनना है तो कानून की किताबें ज्ञान देंगी, लेकिन कोर्ट में वकालत करना एक स्किल है जिसे आपको सीखना ही होगा। किताबें ज्ञान देती हैं, लेकिन असली सीख अनुभव और अभ्यास से आती है।
Marks or skills? 👀
PM @narendramodi breaks the myth and explains why balance is the real flex.#ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/lz4lZwmLkK
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इमोता के श्याम ने पूछा कि क्या सिर्फ पुराने सवालों पर फोकस करना सही है। पीएम मोदी ने कहा कि यही वजह है कि पेपर ‘भारी’ लगने लगता है। पूरा सिलेबस पढ़ना जरूरी है, क्योंकि शिक्षा का मकसद सिर्फ परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि जीवन बनाना है।
एकम कौर के सवाल पर पीएम मोदी ने साफ कहा कि 12वीं की पढ़ाई पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर सिलेबस सही से समझ लिया गया, तो प्रतियोगी परीक्षाएं अपने आप आसान हो जाती हैं।

आजकल के दौर में गेमिंग को लेकर अक्सर डांट पड़ती है, लेकिन पीएम ने यहां छात्रों का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि गेमिंग कोई बुरी चीज नहीं है, बस इसे जुए और फिजूलखर्ची से दूर रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्र खुद गेम क्रिएटर बनें और भारतीय कहानियों जैसे ‘पंचतंत्र’ या ‘अभिमन्यु’ पर गेम्स बनाएं।
#WATCH प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दौरान छात्रों से बातचीत की।
उन्होंने कहा, “…सिर्फ इसलिए समय बर्बाद न करें क्योंकि भारत में इंटरनेट सस्ता है। मैंने सट्टेबाजी के खिलाफ कानून बनाया है। हम देश में ऐसा नहीं होने देंगे लेकिन गेमिंग एक स्किल… pic.twitter.com/ljiwLgkWx6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 6, 2026
कई छात्रों ने बताया कि ‘एग्जाम वॉरियर’ पढ़ने के बाद उनका डर कम हो गया। किसी ने गणित से दोस्ती कर ली, तो किसी ने टाइम मैनेजमेंट सीख लिया। पीएम मोदी ने सलाह दी कि सोने से पहले अगले दिन की टू-डू लिस्ट बनाओ और दिन के अंत में चेक करो, समय खुद कंट्रोल में आने लगेगा।

बातचीत का अंत बड़े विजन के साथ हुआ। पीएम मोदी ने बच्चों को याद दिलाया कि 2047 में, जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब यही बच्चे देश के सबसे मजबूत स्तंभ होंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना आपके ही कंधों पर है। बड़े सपने देखना अपराध नहीं है, बस उन सपनों को पूरा करने के लिए बायोग्राफी पढ़ें और छोटे-छोटे कदम उठाएं।
विकसित भारत के लक्ष्य को तय करने के लिए परीक्षा पे चर्चा संवाद के दौरान प्रधानमंत्री @narendramodi ने बच्चों को बताए 5 मंत्र।
आइए सुनें…#ParikshaPeCharcha26 pic.twitter.com/NKXY6D4UNU
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कार्यक्रम खत्म होते-होते बच्चों की आंखों में चमक थी और चेहरे पर भरोसा। किसी ने कविता सुनाई, किसी ने स्केच दिया, किसी ने बांसुरी बजाई। सिक्किम की श्रेया ने हिंदी-नेपाली-बंगाली में देशभक्ति गीत सुनाया, तो मानसी ने अपनी मां का लिखा गीत ‘तू बढ़ता चल’ गाया। पीएम मोदी ने मां को बधाई दी और बच्चों को असम का पारंपरिक ‘गमोसा’ भेंट किया।
These moments from #ParikshaPeCharcha26 just felt wholesome. pic.twitter.com/EXttP2sqog
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कार्यक्रम खत्म हुआ, लेकिन बच्चों की आंखों में आत्मविश्वास और चेहरे पर भरोसा साफ दिख रहा था। परीक्षा पे चर्चा एक बार फिर साबित कर गई कि जब डर की जगह संवाद आ जाए, तो परीक्षा भी दोस्त बन जाती है।









