राम लला की जन्मस्थली अयोध्या अब केवल भारतीयों की आस्था के लिए प्रसिद्ध पवित्र शहर ही नहीं, बल्कि वह तीर्थयात्रा के अलावा पूरी अर्थव्यवस्था को गति देने वाला वैश्विक धार्मिक केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से न केवल धार्मिक श्रद्धालु इस पावन-पुण्य स्थली की ओर आकर्षित हो रहे हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव दूरगामी रूप ले रहा है। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा केवल एक सांस्कृतिक और धार्मिक मील का पत्थर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की इकोनॉमी के लिए एक ऐतिहासिक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) लखनऊ की ताजा केस स्टडी “इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या” ने ‘टेंपल इकोनॉमी मॉडल’ पर मुहर लगाते हुए स्पष्ट किया है कि अयोध्या अब देश के नए आर्थिक पावरहाउस के रूप में उभर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, सुविचारित बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दृढ़ता के संगम ने अयोध्या को एक पारंपरिक तीर्थस्थल से वैश्विक निवेश केंद्र में तब्दील कर दिया है, जिससे आने वाले समय में केवल पर्यटन गतिविधियों से 20,000-25,000 करोड़ का कर राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इससे स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को अभूतपूर्व बल मिलने वाला है।
विश्व के प्रमुख धार्मिक स्थल वेटिकन सिटी और मक्का से अधिक श्रद्धालु
अयोध्या का रूपांतरण केवल मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक, सांस्कृतिक और वैश्विक धार्मिक केंद्र का निर्माण है। जहां पहले यह मात्र एक पवित्र स्थल था, आज यह देश और विदेश दोनों के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हुए अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री के विजन और योगी सरकार की रणनीति के संयोजन से यह स्पष्ट हो गया है कि आस्था और विकास को एक साथ जोड़ा जा सकता है, जो अयोध्या की सफलता की सबसे बड़ी कथा है। अयोध्या की तीर्थ यात्रा की तुलना दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक पर्यटन स्थलों से की जा रही है। परंपरागत रूप से वेटिकन सिटी में लगभग 9 मिलियन (90 लाख) श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं, जबकि मक्का में लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) लोग आते हैं। अयोध्या ने राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज करते हुए मात्र कुछ महीनों में ही ये संख्या पार कर ली है, जिससे यह सिद्ध होता है कि अयोध्या न केवल भारत में बल्कि अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर भी प्रमुखता से उभर रहा है।
आर्थिक बदलाव: पांच सौ रूपये रोज से 2,500 तक का सफर
आईआईएम लखनऊ का अध्ययन अयोध्या की आर्थिक परिस्थितियों का एक चौंकाने वाला तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि कैसे स्थानीय लोगों की आय पांच गुना बढ़ गई है।
- अतीत का ठहराव: मंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की पहचान सीमित थी।
- वार्षिक पर्यटकों की संख्या महज 1.7 लाख थी और स्थानीय दुकानदारों की दैनिक आय 400 से 500 रुपये तक सिमटी हुई थी।
- वर्तमान का उछाल: प्राण प्रतिष्ठा के शुरुआती 6 महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे।
- आज छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय 5 गुना बढ़कर 2,500 तक पहुंच गई है।

निवेश और रोजगार: 1.2 लाख नौकरियों का बनेगा आधार
रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या का विकास अब ‘मल्टी-सेक्टरल’ हो चुका है। पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के इस पर फोकस ने अयोध्या में विकास गुणात्मक तेजी से हो रहा है।
- आतिथ्य क्षेत्र (Hospitality): ताज, मैरियट और विंडहैम जैसी दिग्गज होटल श्रृंखलाएं अब अयोध्या का हिस्सा हैं। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हो चुके हैं और ऑनलाइन बुकिंग में 400 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- MSME और उद्यमिता: प्राण प्रतिष्ठा के बाद लगभग 6,000 सूक्ष्म और लघु उद्योग नए सिरे से स्थापित हुए हैं। अनुमान है कि अगले 4-5 वर्षों में पर्यटन और परिवहन क्षेत्र में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
- रियल एस्टेट: प्रभु श्री राम लला के मंदिर के आसपास संपत्तियों की कीमतों में 5 से 10 गुना का उछाल देखा गया है, जो वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और सोलर सिटी मॉडल
अहम तथ्यों पर आधारित यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि अयोध्या का कायाकल्प 85,000 करोड़ रूपये की पुनर्विकास परियोजनाओं के दम पर हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और आधुनिक रेलवे स्टेशन ने इसकी कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर पर पहुंचा दिया है। साथ ही, अयोध्या को ‘मॉडल सोलर सिटी’ के रूप में विकसित कर सतत विकास (Sustainable Development) की मिसाल पेश की जा रही है। आईआईएम की रिपोर्ट यह सिद्ध करती है कि ‘आस्था’ जब योजनाबद्ध ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर’ से मिलती है, तो वह पूरे प्रदेश की जीडीपी को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखती है।
राम लला के भव्य-दिव्य मंदिर के आकर्षण ने ताजमहल के पीछे छोड़ा
दरअसल, उत्तर प्रदेश के वाराणसी, मथुरा- वृंदावन, प्रयागराज जैसे कई पवित्र स्थलों की अपनी ऐतिहासिक पहचान है। लेकिन अयोध्या ने मात्र कुछ महीनों में ही इतना आकर्षण पैदा किया है कि वह उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों जैसे ताजमहल को भी पीछे कर रहा है। 2024 में रिपोर्टों के अनुसार, अयोध्या और वाराणसी जैसे स्थलों ने 135.5 मिलियन (13.55 करोड़) घरेलू पर्यटकों को आकर्षित किया, जिसमें केवल 3,153 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के साथ यह आंकड़ा बहुत बड़ा रहा। वहीं ताजमहल तथा अन्य पर्यटन स्थलों की तुलना में अयोध्या में तीर्थ आधारित श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। IIM-लखनऊ की रिपोर्ट के अनुसार, होटल कमरों की संख्या 5,000 से अधिक हो गई है, और स्थानीय सेवा क्षेत्र में छोटे-बड़े व्यापारी सभी लाभान्वित हुए हैं। थोक से लेकर रिटेल दुकानों तक व्यवसायी अब पहले से कहीं अधिक राजस्व कमा रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से उत्पन्न हो रहे हैं।
अयोध्या में आस्था से अर्थव्यवस्था तक का ऐतिहासिक परिवर्तन
राम लला के दिव्य-भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल आया है। प्रधानमंत्री मोदी के विजन से प्रदेश की योगी सरकार होटल, परिवहन, खुदरा और सेवा क्षेत्र में विस्तार मैक्रो-स्तर पर काम कर रही है। आईआईएम-लखनऊ की समीक्षा रिपोर्ट बताती है कि तकनीकी और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने अयोध्या को धार्मिक-आधारित आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और MSME को भी लाभ मिला है। धार्मिक पर्यटन के कारण जहां आय में 5 गुना वृद्धि का प्रभाव देखा जा रहा है। वहीं, यह टेक्स्टाइल, आतिथ्य, रिक्शा सेवा, भोजनालय और वस्तु व्यापार में भी स्पष्ट उछाल देखा जा रहा है। अयोध्या में पर्यटन से जुड़े व्यवसायों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रमुख व्यवसायों जैसे होटल, होमस्टे, रेस्तरां और यात्रा एजेंसियों ने अपनी गतिविधियों को दोगुना से अधिक बढ़ाया है।
योगी सरकार ने अयोध्या के चतुर्दिश विकास पर विशेष महत्व दिया
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने है। धार्मिक-आर्थिक अवसरों को जोड़ते हुए पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। दीवोत्सव जैसे त्योहारों और विश्व-रिकॉर्ड-निर्माण प्रयासों के माध्यम से शहर की वैश्विक पहचान और भी मजबूत हुई है। यह दीर्घकालिक रणनीति न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक रूप से भी स्थिर विकास को सुनिश्चित करती है और विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं को निरंतर आकर्षित करती है। आर्थिक उछाल के साथ ही अयोध्या में बुनियादी ढांचे का भी विस्तार हुआ है। नई रेल, विस्तृत सड़कों, हवाई कनेक्टिविटी और बेहतर यात्री सुविधाओं के साथ। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के उन्नयन से यातायात में वृद्धि हुई है, जिससे अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा रहा है। UP सरकार के बजट प्रावधानों में अयोध्या के विकास के लिए 250 करोड़ रुपये एवं 8 धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण की घोषणा इस रणनीति का मुख्य हिस्सा है।
अयोध्या ने आध्यात्मिक आस्था को आर्थिक अवसरों में बदला
आध्यात्मिक आस्था को आर्थिक अवसरों में बदलना कोई आसान कार्य नहीं है, लेकिन अयोध्या ने अप्रत्यक्ष रूप से यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया है। यहाँ न केवल धार्मिक स्थल में दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादन, उद्यमिता, रोजगार और डिजिटल सेवाओं को भी प्रोत्साहित कर रहा है। अंततः, प्रधानमंत्री मोदी के विजन 2047 के तहत अयोध्या जैसे धार्मिक-आर्थिक हब देश को $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। धार्मिक पर्यटन में सुर्खियों में रहने वाले स्थलों में मक्का, वेटिकन सिटी, वाराणसी और अयोध्या शामिल हैं। यदि मक्का में हर वर्ष लगभग 2 करोड़ श्रद्धालु आते हैं और वेटिकन में लगभग 90 लाख, तो राम मंदिर के समर्पण के बाद अयोध्या में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं, जिससे वह एक वैश्विक तीर्थ स्थल का दर्जा पा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक पर्यटन से अयोध्या में tourism revenue आज ही नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में 100,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे यह न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय रूप से अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
अयोध्या में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में तेजी से हो रहा काम
लोगों का मानना है कि करीब दो साल पहले 22 जनवरी, 2024 को जबसे राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई है, तब से यहां देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं व विदेशी पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसे लेकर प्रदेश की योगी सरकार तेजी से अयोध्या का विकास करने में लगी है। अयोध्या को फोर लेन व सिक्स लेन सड़कों से जोड़ा जा रहा है। विश्वस्तरीय हवाई अड्डा व रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया है। इसके अलावा तमाम अन्य सुविधाएं भी अयोध्या में विकसित की जा रही हैं। 2024 में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है कि 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद से 20 मार्च के बीच 1 करोड़ 12 लाख श्रद्धालु रामलला का दर्शन कर चुके थे।
अयोध्या दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने की राह पर अग्रसर
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही अयोध्या दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनने जा रहा है। अमेरिकी कंपनी जेफ्फेरिज इक्विटी रिसर्च ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में अयोध्या में सालाना 5-10 करोड़ तीर्थयात्री आने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या में मंदिर निर्माण से लेकर अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर 850 अरब रुपए खर्च किया जाना है। इस अनुमान के मुताबिक अयोध्या तीर्थयात्री के आगमन के मामले में घरेलू आध्यात्मिक केंद्र को भी पीछे छोड़ने जा रहा है। क्योंकि आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति में सालाना 2.5 करोड़, जम्मू स्थित माता वैष्णव देवी के दर्शन करने सालाना 80 लाख तीर्थयात्री आते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की अच्छी सुविधा की वजह से अयोध्या बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर सकेगा।
अरबों रूपये से हो रहा है राम की नगरी अयोध्या का कायाकल्प
अयोध्या में मंदिर निर्माण से लेकर अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर 850 अरब रुपये खर्च किया जाना है। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें लगभग 18 अरब रुपए राम मंदिर के निर्माण पर खर्च किए गए हैं। 14.5 अरब रुपये लगाकर अयोध्या एयरपोर्ट के पहले चरण का काम पूरा किया गया और इस प्रकार के तीन और टर्मिनल का निर्माण किया जाना है। अभी सालाना 10 लाख तो दूसरे चरण का काम पूरा होने के बाद सालाना 60 लाख यात्री अयोध्या हवाई जहाज से आसानी से आ-जा सकेंगे। 2.4 अरब रुपये के निवेश से रेलवे स्टेशन का कायाकल्प किया जा रहा है। 1200 एकड़ में 22 अरब रूपये की लागत से ग्रीनफील्ड टाउनशिप का निर्माण प्रस्तावित है। अयोध्या की तरह दुनिया के अन्य तीर्थस्थलों के पास इतने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था नहीं है। भारत के कई तीर्थस्थानों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा नहीं होने के बावजूद सालाना 10-30 लाख तीर्थयात्री पहुंच जाते हैं। इन सबके अलावा अयोध्या में करीब 73 नए होटल का निर्माण पाइपलाइन में है। आईएचसीएल, मैरियट इंटरनेशनल होटल की चेन निर्माण के लिए करार भी कर चुकी है। आईटीसी भी संभावना तलाश रही है तो ओयो 1000 कमरे अपनी चेन में जोड़ने जा रही है।
दुनिया के सबसे बड़े आस्था स्थल और इनमें पहुंचने वाले श्रद्धालु
सरकार राम मंदिर बनने के बाद देश के सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं को अयोध्या में लाने की तैयारी में है। यहां पर साल में 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे। आइये जानते हैं कि दुनिया के वो धार्मिक स्थल, जहां सबसे अधिक लोग पहुंचते हैं..
1. वेटिकन सिटी – यह ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र है। यहां पर सालभर में करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालु जाते हैं।
2. मक्का मदीना – यह मुस्लिम समुदाय का सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है। यहां पर हर साल तीन करोड़ से भी ज्यादा लोग जाते हैं।
3. गोल्डन टेंपल – यह सिख समाज का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है। यहां पर हर साल देश-विदेश से साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
4. काशी विश्वनाथ – यह हिंदू समाज का सबसे बड़ा धार्मिक आस्था का केंद्र है। श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद यहां 2022 में करीब 7 करोड़ भक्त आए।









