Home समाचार कब उठना? कब सोना? मोदी जैसा मेहनती प्रधानमंत्री न भूतो न भविष्यति

कब उठना? कब सोना? मोदी जैसा मेहनती प्रधानमंत्री न भूतो न भविष्यति

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देश के लिए साल के 365 दिन काम करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। मोदी सर्जिकल स्ट्राइक-2 की पूरी रात सोए नहीं और फिर पूरे दिन सिर्फ काम ही काम करते रहे। देश के बारे में दीवानगी की हद तक सोचना तथा सिर्फ और सिर्फ काम करते रहना प्रधानमंत्री मोदी के बुते की ही बात है। वे किस हद तक साल के तीन सौ पैंसठ दिन सिर्फ देश के बारे में सोचते हैं और काम करते हैं इसका अंदाजा उनके एक दिन की दिनचर्या से लगाया जा सकता है।
सर्जिकल स्ट्राइक-2 के तहत ‘ऑपरेशन बालाकोट’ को अंजाम देने वाली पूरी रात प्रधानमंत्री मोदी सोए नहीं। सूत्रों के मुताबिक जब भारत बालाकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी में बम बरसा रहा था, उस समय पूरी घटना पर उन्होंने अपनी नजर बनाए रखी। जैसे ही पायलट समेत सारे मिराज-2000 जेट लड़ाकू विमान देश लौटे, इस अभियान में शामिल सभी को सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ही बधाई दी।

मंगलवार की सुबह सर्जिकल स्ट्राइक-2 अभियान को लेकर सुरक्षा मामले की कैबिनेट कमेटी की 10 बजे हुई बैठक में हिस्सा लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने ‘ऑपरेशन बालाकोट’ के बारे में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तथा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से बारी-बारी चर्चा की। इसके ठीक बाद राष्ट्रपति भवन में आयोजित गांधी शांति पुरस्कार समारोह में शामिल हुए। फिर वे राजस्थान के चुरू गए। वहां उन्होंने आयोजित जनसभा को संबोधित किया। ‘ऑपरेशन बालाकोट’ के बाद यह उनकी पहली जनसभा थी, जहां उन्होंने देश को एक कविता के माध्यम से संदेश दिया कि वह न तो देश को रुकने देंगे न ही झुकने देंगे। उन्होंने संदेश दिया कि देश एक सुरक्षित हाथ में है।


वहां से वे दिल्ली लौट आए। वहां से लोटने के बाद शाम को दिल्ली मेट्रो की सवारी की। मेट्रो में उन्हें जिस तरह बच्चे के साथ खेलते देखा गया लगा ही नहीं कि उनके तन या मन पर किसी प्रकार की थकान हो। मेट्रो से ही वे दिल्ली के इस्ट ऑफ कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने दुनिया की सबसे वजनी श्रीमद् भगवद् गीता का विमोचन किया। और फिर इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया।

तभी तो उनके बारे में कहा जाता है कि देश को पहली बार ऐसा कोई प्रधानमंत्री मिला है जो कब सोता है, कब जगता है या फिर कब खाता है पता नहीं चलता, उनके बारे में इतना पता है कि वे महीने के तीसों दिन से लेकर साल के तीन सौ पैंसठों दिन बस देश के लिए ही सोचता है और देश के लिए ही काम करता है। तभी तो कहा गया है कि मोदी जैसा प्रधानमंत्री न भूतो न भविष्यति।

हमले वाले दिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम

  • हमले वाली रात सर्जिकल स्ट्राइक-2 की पूरी निगरानी
  • पायलट समेत लड़ाकू विमान वापस आने के बाद दी बधाई
  • सुबह 10 बजे सुरक्षा कैबिनेट कमेटी की बैठक में हिस्सा लिया
  • ‘ऑपरेशन बालाकोट’ पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से की चर्चा
  • गांधी शांति पुरस्कार के लिए आयोजित समारोह में शामिल हुए
  • राजस्थान जाकर चुरू में आयोजित जनसभा को संबोधित किया
  • चुरू से लौटने के बाद दिल्ली में मेट्रो ट्रेन से इस्कॉन मंदिर गए
  • वहां दुनिया की सबसे वजनी भगवद् गीता का अनावरण किया
  • इस्कॉन मंदिर में आयोजित समारोह में लोगों को संबोधित किया

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