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मोदी सरकार ने राशनकार्डधारियों को दी बड़ी राहत, 30 सितंबर तक बढ़ी आधार से लिंक कराने की समय-सीमा

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कोरोना संकट और लॉकडाउन को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राशन कार्ड को आधार से जोड़ने की अवधि सितंबर तक बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि बायोमेट्रिक पहचान नहीं होने के बावजूद लाभार्थी को उसके हिस्से का राशन कोटा मिलता रहेगा। केंद्र सरकार ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है जब ऐसी खबरें चल रही थीं कि आधार से नहीं जुड़े राशन कार्ड रद्द हो जाएंगे।

आधिकारिक बयान में बताया गया कि सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को राशन कार्ड को आधार संख्या से जोड़ने की जिम्मेदारी खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की सात फरवरी 2017 की अधिसूचना के आधार पर दी गई है। इस अधिसूचना को समय-समय पर संशोधित किया जाता रहा है। मौजूदा संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने अधिसूचना में फिर संशोधन करने का फैसला किया। 

इस संशोधन के मुताबिक जब तक मंत्रालय सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश नहीं जारी करता तब तक किसी भी सही लाभार्थी को उसके हिस्से का राशन देने से मना नहीं किया जाएगा। 

देश में कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन लागू है। बीते 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के तीसरे चरण की अवधि 17 मई को खत्‍म होने वाली है। इस संकट में लोगों को भोजन की दिक्‍कत न हो इसलिए केंद्र सरकार ने तीन महीने तक के लिए कुल 15 किलो मुफ्त राशन देने का ऐलान किया था।

यह सहायता राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलो सस्ते राशन के कोटा के अलावा है। केंद्र सरकार के मुताबिक देश में 80 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं, जो इसके दायरे में आते हैं।

बता दें कि मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के माध्यम से सरकारी धन लूटने वालों के सभी रास्ते धीरे-धीरे बंद कर दिए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानि पीडीएस के जरिए सब्सिडी वाला खाद्यान्न उपलब्ध कराने में जबरदस्त धांधली थी। मोदी सरकार ने सख्ती के साथ राशन कार्डों को आधार से जोड़ने की मुहिम छेड़ी है और इसी का असर है कि करोड़ों की तादाद में फर्जी राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। इससे हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी गलत लोगों के पास जाने से बची है।

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