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सरसों के सहारे कृषि कानून विरोधियों को मोदी सरकार का जवाब, सरसों की एमएसपी बढ़ने और लागत कम होने से किसानों की बढ़ेगी आमदनी, हरियाणा के किसानों को सर्वाधिक लाभ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार किसानों के हित में लगातार फैसले ले रही हैं। इसी क्रम में मोदी सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2022-23 के लिए सरसों की एमएसपी को 400 रुपये बढ़ाकर 5,050 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया, जो पिछले वर्ष में 4,650 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके माध्यम से मोदी सरकार ने दिल्ली बॉर्डर और करनाल में धरना दे रहे कृषि कानून विरोधियों को करारा जवाब दिया है। साथ ही सरसों उत्पादक किसानों को संदेश दिया है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील है। सरकार के इस फैसले से एक ओर कम पानी में पकने वाली सरसों की फसल के प्रति रुझान बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर गेहूं की तुलना में उत्पादन लागत कम होने से आमदनी भी बढ़ेगी। इससे दक्षिण व पश्चिम हरियाणा के किसानों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा।

हरियाणा में लगभग 5 से 6 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई जाती है। प्रति हेक्टेयर पैदावार लगभग 20 क्विंटल (प्रति एकड़ 8 क्विंटल) है। वर्ष 2018-19 में 2.68, 2019-20 में 6.15 व बीते वर्ष 2020-21 में सबसे अधिक 7.49 लाख मीट्रिक टन सरसों एमएसपी पर खरीदी गई। गौरतलब है कि सरसों की अधिक पैदावार होने से तेल का भी अधिक उत्पादन होगा। इसके साथ ही सरसों तेल की कीमतों में गिरावट आने से आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा। मोदी सरकार ने सरसों तेल उत्पादकों को भी संरक्षण देने की कोशिश की है। इसके तहत इसी वर्ष दो फरवरी को पाम आयल पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। आयात शुल्क व कृषि विकास सेस मिलाकर तीस प्रतिशत से अधिक ड़्यूटी लगने से तेल कारोबारी अन्य देशों से अधिक मात्रा में तेल आयात नहीं कर पाए।

खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए मस्टर्ड मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देश के 11 प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों के 368 जिलों में सरसों की खेती पर जोर दिया गया है। अब तक देश के 60 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होती थी। सरकार की योजना लगभग 9 मिलियन हेक्टेयर भूमि को सरसों की खेती के तहत लाने और 2025-26 तक इसके उत्पादन को लगभग 17 मिलियन टन तक बढ़ाने की है। अब सरकार का फोकस ऐसे प्रदेशों पर भी है जहां सरसों की खेती लायक स्थितियां मौजूद हैं लेकिन वहां पर किसानों का रुझान इस तरफ नहीं है। भारत खाने के तेल की अपनी जरूरतों का करीब 70 प्रतिशत आयात करता है। इसलिए मोदी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही देश को तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रही है।

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